प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा की गई सख्त ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था अब श्रद्धालुओं, संतों और आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। शहर के कई प्रमुख मार्गों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों को बिना किसी ठोस वजह के लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाना पड़ रहा है। डीआरएम ऑफिस से बिजली घर चौराहे तक का मार्ग पूरी तरह सील कर दिया गया है। इस रास्ते पर भीड़ न होने के बावजूद पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को दूसरे रास्तों की ओर मोड़ते नजर आ रहे हैं। हनुमान मंदिर चौराहे से ही वाहनों को डायवर्ट कर दिया जा रहा है, जबकि मेडिकल चौराहे से संगम की ओर किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। इससे दूरदराज से आए श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, मेला क्षेत्र में बने पांटून पुलों से संतों और श्रद्धालुओं को सीधे आवागमन की अनुमति नहीं दी जा रही है। पुलिस एक पुल से दूसरे पुल की ओर घुमाकर भेज रही है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। कई श्रद्धालु और साधु-संत इसे अव्यवस्थित प्रबंधन बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक वाहन और कुछ विशेष गाड़ियां मेला क्षेत्र में बेधड़क प्रवेश करती दिखाई दे रही हैं। आम जनता के लिए जहां सख्त पाबंदियां हैं, वहीं वीआईपी और प्रशासनिक मूवमेंट पर कोई खास रोक नजर नहीं आ रही। प्रयागराज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक की ओर बनाए गए इंट्री प्वाइंट पर भी भारी बैरिकेडिंग कर दी गई है, जिससे यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे जीआरपी प्रभारी का कहना है कि स्टेशन पर फिलहाल कोई विशेष भीड़ नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भीड़ नहीं है तो आम लोगों को इस तरह की सख्ती से क्यों परेशान किया जा रहा है। मौनी अमावस्या जैसे पावन पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन यदि प्रबंधन संतुलित और व्यावहारिक नहीं होगा तो श्रद्धालुओं की आस्था और शहरवासियों की सुविधा दोनों प्रभावित होंगी।


