प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने और उनमें भाषा के प्रति आत्मविश्वास जगाने के लिए शिक्षा विभाग अब एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ‘प्रखर राजस्थान 2.0 अभियान की सफलता के बाद, अब विद्यार्थियों के मौखिक पठन प्रवाह का जिला स्तरीय आकलन किया जाएगा। यह विशेष अभियान 19 से 23 जनवरी के बीच आयोजित होगा। शिक्षा विभाग के आधिकारिक के अनुसार आकलन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि ‘प्रखर राजस्थान’ के सौ दिवसीय पठन अभियान के बाद विद्यार्थियों की पढ़ने की गति और शुद्धता में कितना सुधार आया है।
खास होगा यह आकलन
आमतौर पर लिखित परीक्षाओं से छात्रों की योग्यता जांची जाती है, लेकिन यह पहली बार है जब ओआरएफ के जरिए उनके पढ़ने के प्रवाह पर इतना जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चा तेजी और स्पष्टता से पढ़ पाता है, तो उसकी समझने की क्षमता में स्वतः ही सुधार होता है। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के लिए शिक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को उनकी कक्षा के स्तर के अनुसार कहानी या अनुच्छेद पढ़ने को दिया जाएगा। शिक्षक स्टॉपवॉच के जरिए यह नोट करेंगे कि विद्यार्थी एक मिनट में कितने शब्द सही पढ़ पा रहा है। इस डेटा के आधार पर आगामी सत्र की शैक्षणिक योजना तैयार की जाएगी।
अभियान के मुख्य बिंदु
- -समय सीमा: 19 जनवरी से शुरू होकर 23 जनवरी तक चलेगा।
- -लक्ष्य: कक्षा वार निर्धारित शब्दों को प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता का आकलन।
- -पिछला आधार: सौ दिन के ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ अभियान में विकसित की गई पढ़ने की आदत को परखना।
- -डिजिटल ट्रैकिंग: आकलन के परिणामों को विभाग के पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा ताकि कमजोर क्षेत्रों की पहचान हो सके।
ओआरएफ से बदलेगी आदत
विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर उनमें समझ के साथ पढ़ने की आदत विकसित करना हमारा लक्ष्य है। प्रखर राजस्थान अभियान ने एक मजबूत नींव रखी है, अब ओआरएफ के माध्यम से हम उनकी प्रगति का सटीक डेटा जुटाएंगे।
– रामेश्वर जीनगर, सीबीइओ सुवाणा


