रामगढ़ कैंट स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह दीवान से हुई। प्रातः श्री अखंड पाठ साहिब की विधिवत समाप्ति की गई। इसके बाद अरदास हुई और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया गया। प्रकाश उत्सव को लेकर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था और वातावरण पूरी तरह गुरुबाणी की मधुर ध्वनि से गूंजता रहा। कीर्तन दरबार में गूंजा गुरु महिमा का गुणगान प्रकाश उत्सव के अवसर पर सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक कीर्तन दरबार सजाया गया। इस दौरान विभिन्न रागी जत्थों ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, त्याग और बलिदान पर आधारित शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए। कीर्तन सुनकर संगत भाव-विभोर हो गई। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से बताया गया कि गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर समाज को समानता, साहस और आत्मसम्मान का संदेश दिया। दोपहर 2:45 बजे कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके बाद संगत के लिए गुरु का लंगर वितरित किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। छह दिनों से निकल रही थीं प्रभात फेरियां प्रकाश उत्सव को लेकर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की ओर से पिछले छह दिनों से प्रभात फेरियों का आयोजन भी किया जा रहा था। सुबह-सुबह संगत गुरुबाणी का गायन करते हुए विभिन्न इलाकों से गुजरती थी, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। प्रभात फेरियों के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। रात्रि दीवान में प्रसिद्ध रागियों ने किया कीर्तन रात्रि में भी विशेष दीवान का आयोजन किया गया। शाम 6:15 बजे से रात 10 बजे तक कीर्तन दरबार चला, जिसमें प्रसिद्ध रागी और ग्रंथियों ने गुरु वाणी का कीर्तन किया। इस अवसर पर भाई बलजीत सिंह (पटियाला वाले), भाई सरबजीत सिंह (हजूरी रागी) और भाई विवेक सिंह (हेड ग्रंथी) ने विशेष रूप से संगत को संबोधित किया और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से जुड़े प्रसंग साझा किए। पूरे कार्यक्रम की समाप्ति रात 10:15 बजे हुई, जिसके बाद पुनः गुरु का लंगर वितरित किया गया। प्रकाश उत्सव शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। रामगढ़ कैंट स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह दीवान से हुई। प्रातः श्री अखंड पाठ साहिब की विधिवत समाप्ति की गई। इसके बाद अरदास हुई और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया गया। प्रकाश उत्सव को लेकर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था और वातावरण पूरी तरह गुरुबाणी की मधुर ध्वनि से गूंजता रहा। कीर्तन दरबार में गूंजा गुरु महिमा का गुणगान प्रकाश उत्सव के अवसर पर सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक कीर्तन दरबार सजाया गया। इस दौरान विभिन्न रागी जत्थों ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, त्याग और बलिदान पर आधारित शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए। कीर्तन सुनकर संगत भाव-विभोर हो गई। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से बताया गया कि गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर समाज को समानता, साहस और आत्मसम्मान का संदेश दिया। दोपहर 2:45 बजे कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके बाद संगत के लिए गुरु का लंगर वितरित किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। छह दिनों से निकल रही थीं प्रभात फेरियां प्रकाश उत्सव को लेकर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की ओर से पिछले छह दिनों से प्रभात फेरियों का आयोजन भी किया जा रहा था। सुबह-सुबह संगत गुरुबाणी का गायन करते हुए विभिन्न इलाकों से गुजरती थी, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। प्रभात फेरियों के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। रात्रि दीवान में प्रसिद्ध रागियों ने किया कीर्तन रात्रि में भी विशेष दीवान का आयोजन किया गया। शाम 6:15 बजे से रात 10 बजे तक कीर्तन दरबार चला, जिसमें प्रसिद्ध रागी और ग्रंथियों ने गुरु वाणी का कीर्तन किया। इस अवसर पर भाई बलजीत सिंह (पटियाला वाले), भाई सरबजीत सिंह (हजूरी रागी) और भाई विवेक सिंह (हेड ग्रंथी) ने विशेष रूप से संगत को संबोधित किया और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से जुड़े प्रसंग साझा किए। पूरे कार्यक्रम की समाप्ति रात 10:15 बजे हुई, जिसके बाद पुनः गुरु का लंगर वितरित किया गया। प्रकाश उत्सव शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।


