UP Politics Heats Up: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती द्वारा 2027 में अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान और गेस्ट हाउस कांड को समाजवादी पार्टी से जोड़ने के बयान पर सपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गेस्ट हाउस कांड पर सुप्रीम कोर्ट से समाजवादी पार्टी को क्लीन चिट मिल चुकी है, ऐसे में इस मुद्दे पर न उन्हें बोलना चाहिए और न ही हमें। शिवपाल यादव ने मायावती के बयान को राजनीतिक मजबूरी बताते हुए कहा कि चुनाव नज़दीक आते ही पुराने मुद्दों को उछालना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है और जनता बदलाव के मूड में है।

मायावती का बयान और सियासी संकेत
बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनकी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव पूरी मजबूती के साथ अकेले लड़ेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लखनऊ के गेस्ट हाउस में उनके साथ जो घटना हुई थी, उसके पीछे समाजवादी पार्टी के लोग ही थे। मायावती के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गेस्ट हाउस कांड चर्चा के केंद्र में आ गया है। मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बसपा लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है और पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर मायावती अपने कोर वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं।
गेस्ट हाउस कांड पर शिवपाल यादव का स्पष्ट रुख
शिवपाल सिंह यादव ने मायावती के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गेस्ट हाउस कांड एक पुराना मामला है और इस पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाजवादी पार्टी को क्लीन चिट दी जा चुकी है। उन्होंने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है तो इस मुद्दे को बार-बार उठाने का कोई औचित्य नहीं है। न हमें इस पर बोलना चाहिए और न ही उन्हें। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जाते हैं, लेकिन जनता अब इन बातों को समझती है। प्रदेश की जनता विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर वोट करती है, न कि पुराने विवादों के आधार पर।
अकेले चुनाव लड़ने पर सपा का जवाब
मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान पर शिवपाल यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यह उनका फैसला है और उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर वे अकेले चुनाव लड़ती हैं तो नतीजे वही आएंगे, जो अब तक आते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2027 में पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। शिवपाल यादव ने कहा कि सपा लगातार ज़मीन पर काम कर रही है और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।
2027 की तैयारी में जुटी सपा
शिवपाल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है और जनसमस्याओं को लेकर लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार से जनता त्रस्त है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। यही वजह है कि जनता अब समाजवादी पार्टी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।

बसपा की रणनीति पर सवाल
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बसपा का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी की मजबूरी भी हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में बसपा का जनाधार लगातार सिमटता गया है और पार्टी नेतृत्व पर निष्क्रियता के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में मायावती का आक्रामक बयान पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, गेस्ट हाउस कांड जैसे पुराने मुद्दों को उठाकर मायावती एक बार फिर दलित वोट बैंक को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह आने वाला समय बताएगा।
पुराने विवाद, नई राजनीति
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गेस्ट हाउस कांड हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। लेकिन समय के साथ जनता की प्राथमिकताएं बदली हैं। अब मतदाता विकास, सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को अधिक महत्व दे रहा है। शिवपाल यादव का बयान इसी बदली हुई राजनीति की ओर इशारा करता है, जहां पुराने विवादों के बजाय भविष्य की योजनाओं पर बात करने की जरूरत है।


