Uttarakhand के Char Dham में गैर-हिंदुओं पर रोक? CM Dhami के फैसले पर गरमाई Politics

Uttarakhand के Char Dham में गैर-हिंदुओं पर रोक? CM Dhami के फैसले पर गरमाई Politics
श्री गंगोत्री मंदिर समिति की रविवार को हुई बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत अब उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह प्रतिबंध देवता के शीतकालीन निवास ‘मुखबा’ पर भी लागू होगा। इसके साथ ही, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम सहित समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

मंदिर समितियों द्वारा प्रस्ताव की तैयारी

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जानकारी दी है कि वे जल्द ही एक प्रस्ताव भेज रहे हैं, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ के साथ-साथ अन्य सभी संबंधित मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को आने वाली बोर्ड बैठक में औपचारिक रूप से पेश किया जाएगा।
 

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हरिद्वार और ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र शहर’ बनाने की योजना

उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के घाटों पर भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है। हरिद्वार, जो कि 120 वर्ग किमी में फैला एक अत्यंत पवित्र शहर है, के 105 घाटों के संबंध में यह कदम उठाया जा सकता है। संतों और ‘गंगा सभा’ के अनुरोध पर सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को आधिकारिक रूप से “सनातन पवित्र शहर” घोषित करने की योजना भी बना रही है।

मुख्यमंत्री धामी का रुख

इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार धार्मिक स्थलों से जुड़े कानूनों की समीक्षा करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फैसला लेने से पहले सभी हितधारकों, जैसे तीर्थयात्रा समितियों के सदस्यों और प्रबंधन से जुड़े लोगों के विचारों और राय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
 

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स्थानीय आजीविका का सवाल

इस फैसले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के पास अब कोई चुनावी मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए ऐसे नए एजेंडे बनाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने मंदिर की छवि खराब होने का हवाला देते हुए पहले ही इस प्रतिबंध की मांग की थी। हालांकि, यह भी चिंता का विषय है कि कई गैर-हिंदू लोग इन क्षेत्रों में पर्यटन के जरिए अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।

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