राजगीर में जैन पर्यटकों के मौत का मामला:जांच के लिए कर्नाटक नहीं जाएगी पुलिस टीम; परिजनों ने कमरे से बरामद कैश और जेवरात धर्शाला को किया दान

राजगीर में जैन पर्यटकों के मौत का मामला:जांच के लिए कर्नाटक नहीं जाएगी पुलिस टीम; परिजनों ने कमरे से बरामद कैश और जेवरात धर्शाला को किया दान

राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला में चार पर्यटकों की मौत मामले में जांच के लिए पुलिस टीम कर्नाटक नहीं जाएगी। पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव को मुख्य कारण बताते हुए पुलिस ने जांच दल को कर्नाटक भेजने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रविवार को राजगीर पहुंचे मृतकों के परिजनों ने एक अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए घटनास्थल से बरामद एक लाख 18 हजार रुपए कैश और आभूषणों को धर्मशाला को दान कर दिया। कमरा बुकिंग के समय जमा किए गए चार हजार रुपए भी इस दान में शामिल किए गए। मृतक नागा प्रसाद के चाचा जीएन ब्रुसुब्बा राजू, चचेरी बहन सम्याकथवा जैन डी और पड़ोसी रोहित बीवी शनिवार को पटना के गुलाबी घाट पर हुए अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। पारिवारिक कलह और पुरानी हत्या का मामला डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने परिजनों को बताया कि जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। पारिवारिक कलह, आपसी तालमेल की कमी, अतीत में घटित एक पारिवारिक हत्याकांड, न्यायालय में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया, मानसिक असंतुलन और बेरोजगारी जैसे कारणों ने इस परिवार को दुखद कदम की ओर धकेला। मृतक जीआर नागा प्रसाद बेंगलुरु में अपनी मां और दो बहनों के साथ रहते थे। परिवार करीब 20 साल पहले ही गुब्बी गांव से बेंगलुरु शिफ्ट हो चुका था। गुब्बी थानाध्यक्ष ने पुष्टि करते हुए कहा कि हत्या का मामला भी बेंगलुरु से ही जुड़ा हुआ है। संपत्ति दान की प्रक्रिया जारी परिजनों ने मृतकों के कपड़ों को नष्ट करने की स्वीकृति भी पुलिस को दे दी है। गांव में मृतकों के परिवार की करीब चार एकड़ जमीन है, जिसमें से एक प्लॉट पहले ही बिक चुका है। शेष भूमि को भी दिगंबर जैन धर्मशाला को दान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिजनों ने शव बरामदगी के समय की गई वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग की है, जिसे जांच प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराने का आश्वासन पुलिस ने दिया है। प्रशासन और धर्मशाला की ओर से बेंगलुरु से आने-जाने के खर्च की पेशकश को परिजनों ने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार हालांकि पुलिस ने मामले को आत्महत्या करार दे दिया है, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद भी मामले की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आने की संभावना है। राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला में चार पर्यटकों की मौत मामले में जांच के लिए पुलिस टीम कर्नाटक नहीं जाएगी। पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव को मुख्य कारण बताते हुए पुलिस ने जांच दल को कर्नाटक भेजने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रविवार को राजगीर पहुंचे मृतकों के परिजनों ने एक अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए घटनास्थल से बरामद एक लाख 18 हजार रुपए कैश और आभूषणों को धर्मशाला को दान कर दिया। कमरा बुकिंग के समय जमा किए गए चार हजार रुपए भी इस दान में शामिल किए गए। मृतक नागा प्रसाद के चाचा जीएन ब्रुसुब्बा राजू, चचेरी बहन सम्याकथवा जैन डी और पड़ोसी रोहित बीवी शनिवार को पटना के गुलाबी घाट पर हुए अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। पारिवारिक कलह और पुरानी हत्या का मामला डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने परिजनों को बताया कि जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। पारिवारिक कलह, आपसी तालमेल की कमी, अतीत में घटित एक पारिवारिक हत्याकांड, न्यायालय में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया, मानसिक असंतुलन और बेरोजगारी जैसे कारणों ने इस परिवार को दुखद कदम की ओर धकेला। मृतक जीआर नागा प्रसाद बेंगलुरु में अपनी मां और दो बहनों के साथ रहते थे। परिवार करीब 20 साल पहले ही गुब्बी गांव से बेंगलुरु शिफ्ट हो चुका था। गुब्बी थानाध्यक्ष ने पुष्टि करते हुए कहा कि हत्या का मामला भी बेंगलुरु से ही जुड़ा हुआ है। संपत्ति दान की प्रक्रिया जारी परिजनों ने मृतकों के कपड़ों को नष्ट करने की स्वीकृति भी पुलिस को दे दी है। गांव में मृतकों के परिवार की करीब चार एकड़ जमीन है, जिसमें से एक प्लॉट पहले ही बिक चुका है। शेष भूमि को भी दिगंबर जैन धर्मशाला को दान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिजनों ने शव बरामदगी के समय की गई वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग की है, जिसे जांच प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराने का आश्वासन पुलिस ने दिया है। प्रशासन और धर्मशाला की ओर से बेंगलुरु से आने-जाने के खर्च की पेशकश को परिजनों ने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार हालांकि पुलिस ने मामले को आत्महत्या करार दे दिया है, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद भी मामले की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आने की संभावना है।  

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