मध्यप्रदेश के दमोह जिले में रहने वाले युवक-युवती ने विवाह करने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए सुरक्षा मांगी है। जिले के हटा निवासी स्वयं अग्रवाल और आर्या मिश्रा की और से दायर याचिका में कहा कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने आपसी सहमति से हिंदू रीति-रिवाज से प्रेम विवाह किया है। जाति को आगे करते हुए विवाह के बाद युवती के परिजन इसका विरोध कर रहे हैं और दोनों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिका का निराकरण किया और दमोह एसपी को निर्देश दिए हैं कि नवदंपती की जान और आजादी की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। याचिका में हाईकोर्ट के समक्ष बताया गया कि युवती आर्या मिश्रा के परिवार वाले स्वंय अग्रवाल और उसके परिवार को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। युवक की हटा में किराना दुकान है, जहां पर आग लगाने की धमकी दी गई है। मामले पर युवक स्वयं और उसके पिता ने 7 जनवरी को पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी। वहीं युवती ने भी अपने शिकायत आवेदन में मायके पक्ष से जान का खतरा बताते हुए पुलिस अधीक्षक को जानकारी दी थी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। शासकीय अधिवक्ता दोनों के बालिग होने और उनकी मर्जी से विवाह किए जाने के तथ्य का खंडन नहीं कर सके। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता पति-पत्नी बालिग हैं और उन्होंने 29 दिसंबर 2025 को विवाह किया है। पत्नी के परिजन याचिकाकर्ता के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं और जान से मारने की धमकियां दी गई हैं। जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट ने दमोह पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करें और याचिकाकर्ता दंपत्ति की जान व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल डेनियल ने पैरवी की।


