NEET स्टूडेंट की मौत में ‘नो कमेंट’…बोलकर सवालों से मुंह फेरने वाली बिहार पुलिस CBI की एंट्री से पहले अपनी गलतियों को क्लीन करने में जुटी है। 31 जनवरी को जैसे ही सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की बिहार पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अचानक तेज हो गई। घटना के बाद हॉस्टल नहीं जाने वाली पुलिस अब लगातार हॉस्टल जा रही है। जांच में लापरवाही करने वाली पुलिस अब DNA की जांच का दायरा भी बढ़ा रही है। घटना के बाद CCTV कलेक्ट करने में लापरवाही करने वाली पुलिस अब छात्रा के 48 घंटे का रूट मैप तैयार कर रही है। पुलिस की जांच टीम के पैरलल जब भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम लगी तो पता चला कि ये घटना के बाद हुई गलतियों को स्टेप बाय स्टेप कवर करने की तेजी है। क्योंकि CBI जांच में पुलिस की खामियां उजागर होने की संभावना है। पुलिस की जांच टीम के पैरलल भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने भी पड़ताल की। जिसमें हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक कई खुलासे हुए। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए CBI की एंट्री से पहले पुलिस के एक्टिव होने की पूरी कहानी…। पुलिस को CBI से डिपार्टमेंटल एक्शन का डर NEET स्टूडेंट की मौत में पुलिस की गतिविधियां सवालों में रही हैं। घटना के बाद से हर स्टेप पर पुलिस की जांच और थ्योरी पर सवाल खड़े हुए। बिहार पुलिस के मुखिया ने शुरुआती जांच में लापरवाही की बात स्वीकार की है, यही वजह है कि SSP का पहला एक्शन दो थानों की पुलिस पर हुआ। NEET स्टूडेंट के परिवार वाले घटना के दिन से लेकर आज तक बिहार पुलिस को सवालों में खड़े करते रहे हैं। पुलिस पर पैसे लेकर मामले को मैनेज करने से लेकर दबाव बनाने तक के आरोप लगे। ऐसे में बिहार पुलिस को डर है कि अगर CBI की जांच में पुलिस का एक भी स्टेप गलत मिला तो रेगुलर डिपार्टमेंटल एक्शन (RDA) हो सकता है। पुलिस विभागीय जांच की सिफारिश से घबराई हुई है, इसलिए CBI की एंट्री से पहले वह हर एंगल पर खुद को दुरुस्त करने की कवायद में जुटी है। NEET स्टूडेंट की मौत मामले में वह कोई गैप नहीं रखना चाहती है, जिससे CBI को मौका मिले। CBI की एंट्री में देरी से पुलिस को बचने का मौका 31 जनवरी को बिहार सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से कोई कंफर्मेशन नहीं मिली है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार के पूर्व DGP अभयानंद से पुलिस से CBI को केस ट्रांसफर होने को लेकर पूरी प्रक्रिया समझी। उन्होंने बताया कि ‘अगर किसी घटना की जांच को लेकर राज्य सरकार केंद्र सरकार से कंसल्ट करती है तो CBI जांच की मांग करते ही हरी झंडी मिल जाती है। अगर किसी मामले में अचानक से राज्य सरकार जांच की मांग करती है तो इसमें समय लगता है। यह समय एक महीने का भी हो सकता है। यह राज्य और केंद्र सरकार के बीच सामंजस्य पर निर्भर करता है कि वह संबंधित घटना में कब से कितना कंसल्ट कर रही है। अगर बिना कंसल्ट के अचानक से CBI जांच की डिमांड कर दी जाती है तो केस हैंडओवर होने में समय लगता है।’ पुलिस और CBI की जांच में अगर कोई गैप मिलता है तो इसपर कार्रवाई को लेकर पूर्व DGP अभयानंद बताते हैं, ‘अगर CBI को शुरुआती जांच में पुलिस की कमी मिली तो वह रेगुलर डिपार्टमेंटल एक्शन (RDA) के लिए लिख सकती है।’ हालांकि, पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि सरकार की अनुशंसा के बाद भी पुलिस की जांच बंद नहीं होती है जबतक CBI उसे टेकओवर नहीं कर लेती है। इस कारण भी पुलिस को CBI को केस लेने तक अपनी गलतियों को कवरिंग का मौका मिल जाता है। यह बात अलग है कि CBI ऐसी ऐजेंसी है, जो पुलिस इन्वेस्टिगेशन में हुई गलतियों को ढूंढ ही लेती है। अब 10 पॉइंट में समझिए पुलिस कैसे मामले को कवर कर रही है भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम ने पुलिस की जांच टीम के पैरलल काम किया। पुलिस की जांच और इस केस में उसके एक्शन पर नजर रखी गई। 10 पॉइंट्स में समझिए मामले में पुलिस की कवरिंग की पूरी प्लानिंग। 1. CBI जांच की सिफारिश के बाद कई बार हॉस्टल गई पुलिस घटना के बाद पुलिस पर सबसे बड़ा आरोप हॉस्टल की जांच को लेकर ही था। पुलिस घटना स्थल यानी हॉस्टल की जांच करने में देरी की है। हॉस्टल से सबूत मिटाने के बाद पुलिस के पहुंचने का आरोप लगा। चित्रगुप्त नगर की थानेदार रोशनी कुमारी भी घटना के बाद हॉस्टल पहुंचने में गंभीर लापरवाही कीं। 31 जनवरी को जैसे ही सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की है, पुलिस फिर हॉस्टल गई। CBI जांच की सिफारिश के बाद से लगातार पुलिस हॉस्टल जांच के नाम पर जा रही है। 2. छात्रा जिस-जिस रूट से गई उसके CCTV कलेक्ट हो रहे घटना के बाद पुलिस पर सबसे बड़ा आरोप CCTV फुटेज को लेकर था। घर वालों से लेकर आम लोगों ने भी पुलिस पर साक्ष्य कलेक्ट करने में लापरवाही का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा किया कि संबंधित थाने का प्राइवेट ड्राइवर कैसे हॉस्टल के CCTV का DVR निकालकर ले गया। अब शहर में जगह-जगह से CCTV फुटेज निकाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी ने भी घटना के बाद हॉस्टल के CCTV फुटेज को कलेक्ट करने में गंभीर लापरवाही की है, लेकिन सरकार ने 31 जनवरी को जैसे ही CBI जांच की सिफारिश की पुलिस CCTV फुटेज को साक्ष्य के तौर पर इकट्ठा करने में जुट गई। कई अलग-अलग लोकेशन से स्टूडेंट की रोड मैपिंग की जा रही है। 3. पुलिस की केस डायरी तेजी से होने लगी अपडेट पुलिस की सुस्त जांच पर स्टूडेंट के परिवार वाले लगातार सवाल खड़े कर रहे थे। पटना पुलिस और SIT दोनों की जांच बहुत एक्शन मोड में नहीं थी। केस की डायरी की रफ्तार भी काफी सुस्त थी। 31 जनवरी को सरकार ने जैसे ही CBI जांच की सिफारिश की पुलिस पूरी तरह से एक्टिव हो गई और डायरी को भी तेजी से अपडेट करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस अफसर अब डेली मॉनिटरिंग कर केस की डायरी को डेली बेस पर अपडेट करा रहे हैं। डायरी में कहीं से कोई चूक नहीं हो इसके लिए केस को बेहतर ढंग से लिखने वाले पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मा दिया गया है। CBI की सिफारिश के बाद SIT पूरी तरह से डायरी पर केंद्रित हो गई है। 4. हॉस्टल से हॉस्पिटल तक जांच तेज हुई जांच के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगा कि वह हॉस्पिटल से जांच पड़ताल नहीं की और डॉक्टर्स को बचा रही थी। CBI की सिफारिश के बाद पुलिस की जांच टीम अब हॉस्पिटल को लेकर भी गंभीर हो गई है। डायरी में हॉस्पिटल का पूरा उल्लेख किया जा रहा है। जांच के दौरान जो पॉइंट्स छूट गए हैं, उसे तेजी से अपडेट किया जा रहा है। पुलिस स्टूडेंट्स के 3 हॉस्पिटल में जाने और वहां इलाज के दौरान एक एक गतिविधि को डायरी में ला रही है। 5. DNA टेस्ट का दायरा बढ़ाया स्टूडेंट की मौत के बाद सैंपल कलेक्ट करने में पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। सैंपल कलेक्शन को लेकर पुलिस 31 जनवरी के बाद फिर तेजी से एक्टिव हो गई है। SIT लगातार नोटिस जारी कर सैंपल कलेक्शन के लिए दबाव बना रही है। 9 फरवरी को पुलिस की जांच टीम ने स्टूडेंट के चाचा सहित 8 लोगों की DNA जांच के लिए नोटिस दिया है। पुलिस का पूरा फोकस अधिक से अधिक लोगों को सैंपल कलेक्ट करने को लेकर है। 6. रिश्तेदारों की तरफ पुलिस का रुख 31 जनवरी को CBI जांच की सिफारिश होते ही पुलिस एक बार फिर जहानाबाद में जांच को लेकर एक्टिव हो गई है। पुलिस का पूरा फोकस अब जांच के दायरे में अधिक से अधिक रिश्तेदारों और स्टूडेंट के संबंधियों को रखने को लेकर है। 31 जनवरी के बाद से पुलिस की जांच टीम 6 बार जहानाबाद गई है। पटना से लेकर जहानाबाद तक पुलिस की जांच तेज हो गई है। 1 फरवरी को ही पुलिस की जांच टीम जहानाबाद पहुंची, इसके बाद से लगातार जांच में जा रही है। 8 फरवरी को पुलिस मृतका के मामा के गांव मखदूमपुर पहुंची। सैंपल भी पुलिस अब अधिक से अधिक रिश्तेदारों और परिवार वालों का कलेक्ट कराने में जुटी है। 7. जांच में पुलिस का सर्विलांस सेल भी शामिल घटना के बाद जांच में पुलिस पर आरोप लगने के बाद भी पुलिस उतनी एक्टिव नहीं हुई, जितनी 31 जनवरी को CBI जांच की सिफारिश के बाद एक्टिव हुई है। पुलिस का सर्विलांस सेल भी अब काफी एक्टिव हो गया है। पुलिस इस घटना में अब टेक्निकल एविडेंस कलेक्ट करने को लेकर भी पूरा जोर लगा रही है। पुलिस की सर्विलांस टीम अब स्टूडेंट का पूरा रोड मैप तैयार करने में जुटी है, घटना से पहले का भी कई बिंदु पर एविडेंस के तौर पर खंगाला जा रहा है और उसे साक्ष्य के रूप में रखा जा रहा है। 8. पटना से जहानाबाद शिफ्ट हुई जांच पुलिस की जांच अब पटना से जहानाबाद की तरफ शिफ्ट हो गई है। जांच टीम पटना से अधिक जहानाबाद की तरफ फोकस कर रही है। 31 जनवरी के बाद से पुलिस लगातार नोटिस लेकर जहानाबाद पहुंच रही है। इसमें सैंपल कलेक्शन से लेकर स्टूडेंट के परिवार और रिश्तेदारों से पूछताछ शामिल है। जहानाबाद पुलिस की भी इसमें मदद ली जा रही है। स्पर्म वाले एंगल पर भी पुलिस की थ्योरी अभी चल रही है। 9. CBI के नाम पर पुलिस ने अपडेट बंद किया 31 जनवरी के बाद से पुलिस अब मीडियो को भी कोई अपडेट देने से यह कहकर मना कर रही है कि मामला CBI काे देखना है, लेकिन वह घटना की जांच में पहले से अधिक एक्टिव है। पुलिस की गतिविधियों से लग रहा है कि वह जांच का दायरा 31 जनवरी के बाद से काफी तेज कर दी है। अब कोई सवाल नहीं खड़े कर रहा है और पुलिस पर दबाव भी नहीं है इसलिए वह अपने मिशन में तेजी से जुटी है। पुलिस का मिशन है कि कहीं से कोई ऐसा गैप नहीं रह जाए जो CBI की जांच में गले की फांस बन जाए। 10. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सवालों से भागी पुलिस 31 जनवरी को CBI की सिफारिश के बाद पुलिस ने अपनी गलतियों को प्लानिंग के साथ काम किया है। पुलिस ने मीडियो के सवालों पर रोक लगाने की प्लान के लिए 4 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्लानिंग के तहत एक-एक कर अफसरों ने अपना पक्ष रखा। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ मौजूद अफसर एक ही घटना पर अलग-अलग तरीके से ब्रीफ दे रहे थे। एक ही कहानी एक ही घटना और एक ही इन्वेस्टिगेशन पर अफसरों के एक-एक कर बोलने के पीछे यही मंशा थी कि अब इन अफसरों से मीडिया इस केस से जुड़ा कोई सवाल नहीं करे। हुआ भी वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफसरों की कहानी सुनने के बाद जब मीडिया ने सवाल किया तो नो कमेंट बोलकर अफसर उठ गए और उसके बाद से ग्राउंड पर पुलिस की जांच टीम काफी एक्टिव हो गई। अब स्टूडेंट की फ्लैश बैक की भी पड़ताल छात्रा की लास्ट एक महीने की गतिविधियों को भी पुलिस अब खंगालने में जुटी है। कंकड़बाग, पटना जू और उसके आसपास के इलाकों से जुड़ा कोई अहम सुराग हो सकता है। इसे लेकर पुलिस ने जू परिसर और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज को खंगालना शुरू किया है। जांच से जुड़े पुलिस वालों का मानना है कि स्टूडेंट के पिछले मूवमेंट, उसके साथ मौजूद लोग, घटना की टाइमलाइन और CCTV फुटेज से कहानी साफ हो सकती है। पुलिस ने खासतौर पर 22 और 23 दिसंबर की तारीखों को जांच के दायरे में लिया है। इन दोनों दिनों के CCTV फुटेज पर ही विशेष फोकस है। पुलिस की जांच से लग रहा है कि इन्हीं दो दिनों में कुछ ऐसी गतिविधियां हुई थीं, जो इस पूरे मामले में कुछ बड़ा क्लू दे सकती हैं। फुटेज को फ्रेम-दर-फ्रेम देखा जा रहा है। NEET स्टूडेंट की मौत में शुरू से ही परिस्थितियां, घटनास्थल, समय और छात्रा की मानसिक स्थिति हर पहलू पर संदेह जताया जा रहा है। परिवार ने साफ तौर पर कहा है कि यह सामान्य मौत नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि इसके पीछे किसी बड़े रैकेट, दबाव या साजिश की भूमिका हो सकती है। CBI की सिफारिश के बाद पुलिस थाने पर दबाव बढ़ा CBI जांच की सिफारिश के बाद से संबंधित थाने पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। मामले को लेकर पुलिस की असहजता बातचीत के दौरान साफ नजर आई। चित्रगुप्त नगर थाना में तैनात अधिकारी आपस में चर्चा करते दिखे। बातचीत के दौरान कई अधिकारी खीजे हुए और तनावग्रस्त दिखाई दिए, जिससे साफ है कि जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई को लेकर भीतर ही भीतर दबाव बना हुआ है। ओडी ASI: सर, कहां से आ रहे हैं? SI: वही लड़की वाला। ASI: क्या हुआ? SI: कुछ नहीं, जांच चल ही रही है। CBI क्या करेगी, जब यही लोग सब करेंगे तो। ASI: इससे अच्छा तो SIT कुछ नहीं करती, हम लोग ही सब कर लेते। NEET स्टूडेंट की मौत में ‘नो कमेंट’…बोलकर सवालों से मुंह फेरने वाली बिहार पुलिस CBI की एंट्री से पहले अपनी गलतियों को क्लीन करने में जुटी है। 31 जनवरी को जैसे ही सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की बिहार पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अचानक तेज हो गई। घटना के बाद हॉस्टल नहीं जाने वाली पुलिस अब लगातार हॉस्टल जा रही है। जांच में लापरवाही करने वाली पुलिस अब DNA की जांच का दायरा भी बढ़ा रही है। घटना के बाद CCTV कलेक्ट करने में लापरवाही करने वाली पुलिस अब छात्रा के 48 घंटे का रूट मैप तैयार कर रही है। पुलिस की जांच टीम के पैरलल जब भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम लगी तो पता चला कि ये घटना के बाद हुई गलतियों को स्टेप बाय स्टेप कवर करने की तेजी है। क्योंकि CBI जांच में पुलिस की खामियां उजागर होने की संभावना है। पुलिस की जांच टीम के पैरलल भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने भी पड़ताल की। जिसमें हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक कई खुलासे हुए। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए CBI की एंट्री से पहले पुलिस के एक्टिव होने की पूरी कहानी…। पुलिस को CBI से डिपार्टमेंटल एक्शन का डर NEET स्टूडेंट की मौत में पुलिस की गतिविधियां सवालों में रही हैं। घटना के बाद से हर स्टेप पर पुलिस की जांच और थ्योरी पर सवाल खड़े हुए। बिहार पुलिस के मुखिया ने शुरुआती जांच में लापरवाही की बात स्वीकार की है, यही वजह है कि SSP का पहला एक्शन दो थानों की पुलिस पर हुआ। NEET स्टूडेंट के परिवार वाले घटना के दिन से लेकर आज तक बिहार पुलिस को सवालों में खड़े करते रहे हैं। पुलिस पर पैसे लेकर मामले को मैनेज करने से लेकर दबाव बनाने तक के आरोप लगे। ऐसे में बिहार पुलिस को डर है कि अगर CBI की जांच में पुलिस का एक भी स्टेप गलत मिला तो रेगुलर डिपार्टमेंटल एक्शन (RDA) हो सकता है। पुलिस विभागीय जांच की सिफारिश से घबराई हुई है, इसलिए CBI की एंट्री से पहले वह हर एंगल पर खुद को दुरुस्त करने की कवायद में जुटी है। NEET स्टूडेंट की मौत मामले में वह कोई गैप नहीं रखना चाहती है, जिससे CBI को मौका मिले। CBI की एंट्री में देरी से पुलिस को बचने का मौका 31 जनवरी को बिहार सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से कोई कंफर्मेशन नहीं मिली है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार के पूर्व DGP अभयानंद से पुलिस से CBI को केस ट्रांसफर होने को लेकर पूरी प्रक्रिया समझी। उन्होंने बताया कि ‘अगर किसी घटना की जांच को लेकर राज्य सरकार केंद्र सरकार से कंसल्ट करती है तो CBI जांच की मांग करते ही हरी झंडी मिल जाती है। अगर किसी मामले में अचानक से राज्य सरकार जांच की मांग करती है तो इसमें समय लगता है। यह समय एक महीने का भी हो सकता है। यह राज्य और केंद्र सरकार के बीच सामंजस्य पर निर्भर करता है कि वह संबंधित घटना में कब से कितना कंसल्ट कर रही है। अगर बिना कंसल्ट के अचानक से CBI जांच की डिमांड कर दी जाती है तो केस हैंडओवर होने में समय लगता है।’ पुलिस और CBI की जांच में अगर कोई गैप मिलता है तो इसपर कार्रवाई को लेकर पूर्व DGP अभयानंद बताते हैं, ‘अगर CBI को शुरुआती जांच में पुलिस की कमी मिली तो वह रेगुलर डिपार्टमेंटल एक्शन (RDA) के लिए लिख सकती है।’ हालांकि, पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि सरकार की अनुशंसा के बाद भी पुलिस की जांच बंद नहीं होती है जबतक CBI उसे टेकओवर नहीं कर लेती है। इस कारण भी पुलिस को CBI को केस लेने तक अपनी गलतियों को कवरिंग का मौका मिल जाता है। यह बात अलग है कि CBI ऐसी ऐजेंसी है, जो पुलिस इन्वेस्टिगेशन में हुई गलतियों को ढूंढ ही लेती है। अब 10 पॉइंट में समझिए पुलिस कैसे मामले को कवर कर रही है भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम ने पुलिस की जांच टीम के पैरलल काम किया। पुलिस की जांच और इस केस में उसके एक्शन पर नजर रखी गई। 10 पॉइंट्स में समझिए मामले में पुलिस की कवरिंग की पूरी प्लानिंग। 1. CBI जांच की सिफारिश के बाद कई बार हॉस्टल गई पुलिस घटना के बाद पुलिस पर सबसे बड़ा आरोप हॉस्टल की जांच को लेकर ही था। पुलिस घटना स्थल यानी हॉस्टल की जांच करने में देरी की है। हॉस्टल से सबूत मिटाने के बाद पुलिस के पहुंचने का आरोप लगा। चित्रगुप्त नगर की थानेदार रोशनी कुमारी भी घटना के बाद हॉस्टल पहुंचने में गंभीर लापरवाही कीं। 31 जनवरी को जैसे ही सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की है, पुलिस फिर हॉस्टल गई। CBI जांच की सिफारिश के बाद से लगातार पुलिस हॉस्टल जांच के नाम पर जा रही है। 2. छात्रा जिस-जिस रूट से गई उसके CCTV कलेक्ट हो रहे घटना के बाद पुलिस पर सबसे बड़ा आरोप CCTV फुटेज को लेकर था। घर वालों से लेकर आम लोगों ने भी पुलिस पर साक्ष्य कलेक्ट करने में लापरवाही का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा किया कि संबंधित थाने का प्राइवेट ड्राइवर कैसे हॉस्टल के CCTV का DVR निकालकर ले गया। अब शहर में जगह-जगह से CCTV फुटेज निकाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी ने भी घटना के बाद हॉस्टल के CCTV फुटेज को कलेक्ट करने में गंभीर लापरवाही की है, लेकिन सरकार ने 31 जनवरी को जैसे ही CBI जांच की सिफारिश की पुलिस CCTV फुटेज को साक्ष्य के तौर पर इकट्ठा करने में जुट गई। कई अलग-अलग लोकेशन से स्टूडेंट की रोड मैपिंग की जा रही है। 3. पुलिस की केस डायरी तेजी से होने लगी अपडेट पुलिस की सुस्त जांच पर स्टूडेंट के परिवार वाले लगातार सवाल खड़े कर रहे थे। पटना पुलिस और SIT दोनों की जांच बहुत एक्शन मोड में नहीं थी। केस की डायरी की रफ्तार भी काफी सुस्त थी। 31 जनवरी को सरकार ने जैसे ही CBI जांच की सिफारिश की पुलिस पूरी तरह से एक्टिव हो गई और डायरी को भी तेजी से अपडेट करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस अफसर अब डेली मॉनिटरिंग कर केस की डायरी को डेली बेस पर अपडेट करा रहे हैं। डायरी में कहीं से कोई चूक नहीं हो इसके लिए केस को बेहतर ढंग से लिखने वाले पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मा दिया गया है। CBI की सिफारिश के बाद SIT पूरी तरह से डायरी पर केंद्रित हो गई है। 4. हॉस्टल से हॉस्पिटल तक जांच तेज हुई जांच के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगा कि वह हॉस्पिटल से जांच पड़ताल नहीं की और डॉक्टर्स को बचा रही थी। CBI की सिफारिश के बाद पुलिस की जांच टीम अब हॉस्पिटल को लेकर भी गंभीर हो गई है। डायरी में हॉस्पिटल का पूरा उल्लेख किया जा रहा है। जांच के दौरान जो पॉइंट्स छूट गए हैं, उसे तेजी से अपडेट किया जा रहा है। पुलिस स्टूडेंट्स के 3 हॉस्पिटल में जाने और वहां इलाज के दौरान एक एक गतिविधि को डायरी में ला रही है। 5. DNA टेस्ट का दायरा बढ़ाया स्टूडेंट की मौत के बाद सैंपल कलेक्ट करने में पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। सैंपल कलेक्शन को लेकर पुलिस 31 जनवरी के बाद फिर तेजी से एक्टिव हो गई है। SIT लगातार नोटिस जारी कर सैंपल कलेक्शन के लिए दबाव बना रही है। 9 फरवरी को पुलिस की जांच टीम ने स्टूडेंट के चाचा सहित 8 लोगों की DNA जांच के लिए नोटिस दिया है। पुलिस का पूरा फोकस अधिक से अधिक लोगों को सैंपल कलेक्ट करने को लेकर है। 6. रिश्तेदारों की तरफ पुलिस का रुख 31 जनवरी को CBI जांच की सिफारिश होते ही पुलिस एक बार फिर जहानाबाद में जांच को लेकर एक्टिव हो गई है। पुलिस का पूरा फोकस अब जांच के दायरे में अधिक से अधिक रिश्तेदारों और स्टूडेंट के संबंधियों को रखने को लेकर है। 31 जनवरी के बाद से पुलिस की जांच टीम 6 बार जहानाबाद गई है। पटना से लेकर जहानाबाद तक पुलिस की जांच तेज हो गई है। 1 फरवरी को ही पुलिस की जांच टीम जहानाबाद पहुंची, इसके बाद से लगातार जांच में जा रही है। 8 फरवरी को पुलिस मृतका के मामा के गांव मखदूमपुर पहुंची। सैंपल भी पुलिस अब अधिक से अधिक रिश्तेदारों और परिवार वालों का कलेक्ट कराने में जुटी है। 7. जांच में पुलिस का सर्विलांस सेल भी शामिल घटना के बाद जांच में पुलिस पर आरोप लगने के बाद भी पुलिस उतनी एक्टिव नहीं हुई, जितनी 31 जनवरी को CBI जांच की सिफारिश के बाद एक्टिव हुई है। पुलिस का सर्विलांस सेल भी अब काफी एक्टिव हो गया है। पुलिस इस घटना में अब टेक्निकल एविडेंस कलेक्ट करने को लेकर भी पूरा जोर लगा रही है। पुलिस की सर्विलांस टीम अब स्टूडेंट का पूरा रोड मैप तैयार करने में जुटी है, घटना से पहले का भी कई बिंदु पर एविडेंस के तौर पर खंगाला जा रहा है और उसे साक्ष्य के रूप में रखा जा रहा है। 8. पटना से जहानाबाद शिफ्ट हुई जांच पुलिस की जांच अब पटना से जहानाबाद की तरफ शिफ्ट हो गई है। जांच टीम पटना से अधिक जहानाबाद की तरफ फोकस कर रही है। 31 जनवरी के बाद से पुलिस लगातार नोटिस लेकर जहानाबाद पहुंच रही है। इसमें सैंपल कलेक्शन से लेकर स्टूडेंट के परिवार और रिश्तेदारों से पूछताछ शामिल है। जहानाबाद पुलिस की भी इसमें मदद ली जा रही है। स्पर्म वाले एंगल पर भी पुलिस की थ्योरी अभी चल रही है। 9. CBI के नाम पर पुलिस ने अपडेट बंद किया 31 जनवरी के बाद से पुलिस अब मीडियो को भी कोई अपडेट देने से यह कहकर मना कर रही है कि मामला CBI काे देखना है, लेकिन वह घटना की जांच में पहले से अधिक एक्टिव है। पुलिस की गतिविधियों से लग रहा है कि वह जांच का दायरा 31 जनवरी के बाद से काफी तेज कर दी है। अब कोई सवाल नहीं खड़े कर रहा है और पुलिस पर दबाव भी नहीं है इसलिए वह अपने मिशन में तेजी से जुटी है। पुलिस का मिशन है कि कहीं से कोई ऐसा गैप नहीं रह जाए जो CBI की जांच में गले की फांस बन जाए। 10. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सवालों से भागी पुलिस 31 जनवरी को CBI की सिफारिश के बाद पुलिस ने अपनी गलतियों को प्लानिंग के साथ काम किया है। पुलिस ने मीडियो के सवालों पर रोक लगाने की प्लान के लिए 4 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्लानिंग के तहत एक-एक कर अफसरों ने अपना पक्ष रखा। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ मौजूद अफसर एक ही घटना पर अलग-अलग तरीके से ब्रीफ दे रहे थे। एक ही कहानी एक ही घटना और एक ही इन्वेस्टिगेशन पर अफसरों के एक-एक कर बोलने के पीछे यही मंशा थी कि अब इन अफसरों से मीडिया इस केस से जुड़ा कोई सवाल नहीं करे। हुआ भी वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफसरों की कहानी सुनने के बाद जब मीडिया ने सवाल किया तो नो कमेंट बोलकर अफसर उठ गए और उसके बाद से ग्राउंड पर पुलिस की जांच टीम काफी एक्टिव हो गई। अब स्टूडेंट की फ्लैश बैक की भी पड़ताल छात्रा की लास्ट एक महीने की गतिविधियों को भी पुलिस अब खंगालने में जुटी है। कंकड़बाग, पटना जू और उसके आसपास के इलाकों से जुड़ा कोई अहम सुराग हो सकता है। इसे लेकर पुलिस ने जू परिसर और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज को खंगालना शुरू किया है। जांच से जुड़े पुलिस वालों का मानना है कि स्टूडेंट के पिछले मूवमेंट, उसके साथ मौजूद लोग, घटना की टाइमलाइन और CCTV फुटेज से कहानी साफ हो सकती है। पुलिस ने खासतौर पर 22 और 23 दिसंबर की तारीखों को जांच के दायरे में लिया है। इन दोनों दिनों के CCTV फुटेज पर ही विशेष फोकस है। पुलिस की जांच से लग रहा है कि इन्हीं दो दिनों में कुछ ऐसी गतिविधियां हुई थीं, जो इस पूरे मामले में कुछ बड़ा क्लू दे सकती हैं। फुटेज को फ्रेम-दर-फ्रेम देखा जा रहा है। NEET स्टूडेंट की मौत में शुरू से ही परिस्थितियां, घटनास्थल, समय और छात्रा की मानसिक स्थिति हर पहलू पर संदेह जताया जा रहा है। परिवार ने साफ तौर पर कहा है कि यह सामान्य मौत नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि इसके पीछे किसी बड़े रैकेट, दबाव या साजिश की भूमिका हो सकती है। CBI की सिफारिश के बाद पुलिस थाने पर दबाव बढ़ा CBI जांच की सिफारिश के बाद से संबंधित थाने पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। मामले को लेकर पुलिस की असहजता बातचीत के दौरान साफ नजर आई। चित्रगुप्त नगर थाना में तैनात अधिकारी आपस में चर्चा करते दिखे। बातचीत के दौरान कई अधिकारी खीजे हुए और तनावग्रस्त दिखाई दिए, जिससे साफ है कि जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई को लेकर भीतर ही भीतर दबाव बना हुआ है। ओडी ASI: सर, कहां से आ रहे हैं? SI: वही लड़की वाला। ASI: क्या हुआ? SI: कुछ नहीं, जांच चल ही रही है। CBI क्या करेगी, जब यही लोग सब करेंगे तो। ASI: इससे अच्छा तो SIT कुछ नहीं करती, हम लोग ही सब कर लेते।


