सिद्धार्थनगर में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, अपराधियों पर नियंत्रण रखने और रमजान व ईद-उल-फितर के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए पुलिस अलर्ट है। इसी क्रम में 16 मार्च सोमवार शाम को पुलिस लाइन सभागार में एक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. अभिषेक महाजन ने गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था और जनशिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोष्ठी की शुरुआत सैनिक सम्मेलन से हुई। इसके उपरांत एसएसपी ने विभिन्न बिंदुओं पर समीक्षा की। उन्होंने त्योहारों के दौरान पुलिस की तैयारियों, संवेदनशील इलाकों की निगरानी, अपराधियों पर कार्रवाई, लंबित विवेचनाओं के निस्तारण, महिला सुरक्षा, संपत्ति संबंधी अपराध, साइबर अपराध और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी जैसे मामलों पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया। एसएसपी ने जोर दिया कि रमजान और ईद-उल-फितर के दौरान जिले में शांति व सौहार्द बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एसएसपी ने शहर और ग्रामीण इलाकों में पैदल गश्त बढ़ाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजार, मुख्य चौराहों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील गांवों में पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। इससे आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने थाना प्रभारियों को गश्त को केवल औपचारिकता न बनाकर उसे परिणामोन्मुख रखने का निर्देश दिया। बैठक में ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की भी समीक्षा की गई। एसएसपी ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, वहां उनकी क्रियाशीलता हर हाल में बनी रहनी चाहिए। खराब पड़े कैमरों को तत्काल ठीक कराया जाए और आवश्यकतानुसार नए कैमरे लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर पहल की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी निगरानी अपराध नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है और सीसीटीवी फुटेज कई मामलों में पुलिस के लिए निर्णायक साक्ष्य साबित हो रही है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को भी गोष्ठी में प्रमुखता से उठाया गया। एसएसपी ने कहा कि साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, लिंक भेजकर ठगी, बैंक खाते से अवैध निकासी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसे मामलों को रोकने के लिए थाना स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिसकर्मी गांव, कस्बों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाएं, ताकि लोग ठगों के जाल में फंसने से बच सकें। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी भी आम जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया।
गोष्ठी में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित अभियोगों की भी गहन समीक्षा हुई। एसएसपी ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि अभियुक्तों को सजा दिलाई जा सके और पीड़ित पक्ष को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल मुकदमा दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि साक्ष्यों के मजबूत संकलन, विवेचना की गुणवत्ता और न्यायालय में प्रभावी समन्वय के जरिए दोषियों को दंडित कराना भी उतना ही जरूरी है।
संपत्ति संबंधी अपराध और महिला उत्पीड़न के मामलों को लेकर भी एसएसपी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चोरी, लूट, जमीन-जायदाद विवाद, मारपीट, दहेज उत्पीड़न, छेड़खानी और महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराधों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की जाए। ऐसे मामलों में पीड़ितों के साथ व्यवहार भी पुलिस की जवाबदेही का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला संबंधी अपराधों की जांच में देरी या लापरवाही कतई स्वीकार नहीं होगी।
बैठक में गुमशुदा और लापता बच्चों की बरामदगी को भी गंभीरता से लिया गया। एसएसपी ने लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि जिन बच्चों की बरामदगी अभी शेष है, उनके मामलों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरण केवल अभिलेखीय कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि हर स्तर पर फील्ड इंटेलिजेंस, तकनीकी सहायता और अन्य जनपदों से समन्वय के जरिए बच्चों को सुरक्षित बरामद करने के प्रयास तेज किए जाएं।
लंबित मुकदमों के निस्तारण पर भी बैठक में विशेष जोर रहा। एसएसपी ने कहा कि विवेचनाओं का निस्तारण केवल संख्या पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि साक्ष्य, तथ्य और गुण-दोष के आधार पर गुणवत्ता के साथ किया जाए। अधूरी जांच, कमजोर साक्ष्य और ढिलाई के कारण कई मामलों में अभियोजन प्रभावित होता है, इसलिए विवेचक हर मुकदमे में ठोस तैयारी के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने लंबित विवेचनाओं की नियमित समीक्षा करने और समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अभियुक्तों के विरुद्ध वैधानिक और निरोधात्मक कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। एसएसपी ने गुंडा अधिनियम और गैंगस्टर अधिनियम के तहत चल रही कार्रवाई का ब्योरा लिया और निर्देश दिया कि संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वाले तत्वों और समाज में भय का माहौल बनाने वाले अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ कानूनी रूप से प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई भी की जानी चाहिए, ताकि वे दोबारा अपराध करने का साहस न जुटा सकें।
बीपीओ द्वारा अंकित कराई गई बीट सूचनाओं की समीक्षा करते हुए एसएसपी ने कहा कि बीट पुलिसिंग को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाया जाए। हर बीट अधिकारी अपने क्षेत्र की गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों, सामाजिक तनाव, छोटे-बड़े विवादों और संभावित अपराध की सूचनाओं पर सतत नजर रखे। उन्होंने कहा कि मजबूत बीट व्यवस्था ही किसी भी बड़ी वारदात को होने से पहले रोकने का आधार बनती है।
गोष्ठी में आईजीआरएस और सीसीटीएनएस के संबंध में मुख्यालय से जारी रैंकिंग पर भी चर्चा हुई। एसएसपी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आईजीआरएस प्रकरणों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और तथ्यपरक निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिक जवाब देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। इसी तरह सीसीटीएनएस में अभिलेखों के अद्यतन, डाटा की शुद्धता और कार्य की गुणवत्ता पर भी उन्होंने विशेष ध्यान देने को कहा।
एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक बिंदु पर गंभीरता, जवाबदेही और निरंतर निगरानी के साथ काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहारों, जनशिकायतों, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, लंबित विवेचनाओं और अभियुक्तों पर कार्रवाई जैसे विषय पुलिस की प्राथमिकता में रहने चाहिए। जिले में शांति-व्यवस्था बनाए रखना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है।


