पीएमसीएच का टाटा वार्ड एक-दो दिनों में खाली करा दिया जाएगा। यहां के बेड, उपकरण और फर्नीचर को जिला अस्पतालों और पीएचसी में भेजा जा रहा है। सोमवार से इसे तोड़ा जाएगा। इसकी जगह आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस बहुमंजिली इमारत बनेगी। टाटा वार्ड का टूटना उस मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत पीएमसीएच को 5462 बेड वाला विश्वस्तरीय अस्पताल बनाया जा रहा है। पीएमसीएच में वर्ष 1960 बैच के छात्र रहे बिहार रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विनय बहादुर सिंह बताते हैं-टाटा वार्ड का निर्माण 1940-50 के दशक में टाटा समूह के सहयोग से कराया गया था। यह वार्ड मुख्य रूप से महिला मरीजों के इलाज के लिए समर्पित था। अपने समय में बेहतर बेड क्षमता (करीब 100–150 बेड) के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस माना जाता था। पुराने संसाधनों से मजबूत होंगे ग्रामीण अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि टाटा वार्ड को पुनर्विकास परियोजना के तहत हटाया जा रहा है। टाटा वार्ड का ऐतिहासिक महत्व रहा है। यह संस्थान की पहचान का अहम हिस्सा रहा है। इस वार्ड के सभी उपयोगी उपकरणों, बेड और फर्नीचर को सुरक्षित निकालकर राज्य के जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जा रहा है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। इस वार्ड को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं। पीएमसीएच का टाटा वार्ड एक-दो दिनों में खाली करा दिया जाएगा। यहां के बेड, उपकरण और फर्नीचर को जिला अस्पतालों और पीएचसी में भेजा जा रहा है। सोमवार से इसे तोड़ा जाएगा। इसकी जगह आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस बहुमंजिली इमारत बनेगी। टाटा वार्ड का टूटना उस मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत पीएमसीएच को 5462 बेड वाला विश्वस्तरीय अस्पताल बनाया जा रहा है। पीएमसीएच में वर्ष 1960 बैच के छात्र रहे बिहार रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विनय बहादुर सिंह बताते हैं-टाटा वार्ड का निर्माण 1940-50 के दशक में टाटा समूह के सहयोग से कराया गया था। यह वार्ड मुख्य रूप से महिला मरीजों के इलाज के लिए समर्पित था। अपने समय में बेहतर बेड क्षमता (करीब 100–150 बेड) के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस माना जाता था। पुराने संसाधनों से मजबूत होंगे ग्रामीण अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि टाटा वार्ड को पुनर्विकास परियोजना के तहत हटाया जा रहा है। टाटा वार्ड का ऐतिहासिक महत्व रहा है। यह संस्थान की पहचान का अहम हिस्सा रहा है। इस वार्ड के सभी उपयोगी उपकरणों, बेड और फर्नीचर को सुरक्षित निकालकर राज्य के जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जा रहा है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। इस वार्ड को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं।


