पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में बिजली संकट को देखते हुए एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है। अब अस्पताल अधीक्षक को सीधे डीजल खरीदने का अधिकार मिल गया है। इस फैसले से बिजली ट्रिपिंग या कटौती होने पर जेनरेटर तुरंत चालू हो सकेगा, जिससे इमरजेंसी सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहेंगी। पहले अस्पताल में उच्च क्षमता वाले जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद डीजल खरीद का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं था। ईंधन की आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता के कारण अक्सर देरी होती थी। इससे मरीजों का इलाज और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती थीं। अब नई व्यवस्था के तहत अस्पताल अधीक्षक अपने स्तर पर तत्काल निर्णय लेकर डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे। PMCH में बिजली की मांग कई गुना बढ़ी पीएमसीएच के पुनर्विकास के तहत निर्मित नए हॉस्पिटल टावर में आधुनिक सुविधाओं के कारण बिजली की मांग कई गुना बढ़ गई है। दर्जनों लिफ्ट, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, सेंट्रल एसी, लाइटिंग और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन के लिए जेनरेटर की खपत काफी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल के जेनरेटर प्रति घंटे लगभग 400 लीटर डीजल की खपत करते हैं, जिनकी क्षमता 1.5 से 1.8 मेगावाट है और ये पूरे अस्पताल परिसर को बिजली प्रदान करने में सक्षम हैं। अस्पताल में बिजली ट्रिपिंग की समस्या पिछले कुछ समय से अस्पताल में बिजली ट्रिपिंग की समस्या गंभीर बनी हुई थी। कई बार नई इमारतों की उच्च क्षमता वाली लिफ्टें बीच में रुक जाती थीं, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को असुविधा होती थी। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू जैसे संवेदनशील विभागों में बिजली की थोड़ी देर की बाधा भी मरीजों के इलाज को प्रभावित कर सकती थी। डीजल खरीद के लिए लंबी फाइल प्रक्रिया समाप्त इस नई व्यवस्था से कई लाभ होंगे। अब डीजल खरीद के लिए लंबी फाइल प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही जेनरेटर तुरंत चालू करना संभव होगा, जिससे लिफ्ट, वेंटिलेटर, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आएगी। साथ ही, तकनीकी समस्याओं का समाधान भी स्थानीय स्तर पर तेजी से किया जा सकेगा। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: अधीक्षक अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि, नए इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार मिलना जरूरी था। अब डीजल आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता खत्म होगी।’ उन्होंने कहा कि, ‘डीजल की खपत भले अधिक हो, लेकिन मरीजों की सुरक्षा और इलाज की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है। PMCH में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति की स्थिरता सीधे उनकी सुरक्षा से जुड़ी है।’ इस फैसले से न सिर्फ अस्पताल की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि गंभीर मरीजों के इलाज में आने वाली अनिश्चितताओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में बिजली संकट को देखते हुए एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है। अब अस्पताल अधीक्षक को सीधे डीजल खरीदने का अधिकार मिल गया है। इस फैसले से बिजली ट्रिपिंग या कटौती होने पर जेनरेटर तुरंत चालू हो सकेगा, जिससे इमरजेंसी सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहेंगी। पहले अस्पताल में उच्च क्षमता वाले जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद डीजल खरीद का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं था। ईंधन की आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता के कारण अक्सर देरी होती थी। इससे मरीजों का इलाज और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती थीं। अब नई व्यवस्था के तहत अस्पताल अधीक्षक अपने स्तर पर तत्काल निर्णय लेकर डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे। PMCH में बिजली की मांग कई गुना बढ़ी पीएमसीएच के पुनर्विकास के तहत निर्मित नए हॉस्पिटल टावर में आधुनिक सुविधाओं के कारण बिजली की मांग कई गुना बढ़ गई है। दर्जनों लिफ्ट, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, सेंट्रल एसी, लाइटिंग और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन के लिए जेनरेटर की खपत काफी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल के जेनरेटर प्रति घंटे लगभग 400 लीटर डीजल की खपत करते हैं, जिनकी क्षमता 1.5 से 1.8 मेगावाट है और ये पूरे अस्पताल परिसर को बिजली प्रदान करने में सक्षम हैं। अस्पताल में बिजली ट्रिपिंग की समस्या पिछले कुछ समय से अस्पताल में बिजली ट्रिपिंग की समस्या गंभीर बनी हुई थी। कई बार नई इमारतों की उच्च क्षमता वाली लिफ्टें बीच में रुक जाती थीं, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को असुविधा होती थी। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू जैसे संवेदनशील विभागों में बिजली की थोड़ी देर की बाधा भी मरीजों के इलाज को प्रभावित कर सकती थी। डीजल खरीद के लिए लंबी फाइल प्रक्रिया समाप्त इस नई व्यवस्था से कई लाभ होंगे। अब डीजल खरीद के लिए लंबी फाइल प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही जेनरेटर तुरंत चालू करना संभव होगा, जिससे लिफ्ट, वेंटिलेटर, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आएगी। साथ ही, तकनीकी समस्याओं का समाधान भी स्थानीय स्तर पर तेजी से किया जा सकेगा। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: अधीक्षक अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि, नए इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार मिलना जरूरी था। अब डीजल आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता खत्म होगी।’ उन्होंने कहा कि, ‘डीजल की खपत भले अधिक हो, लेकिन मरीजों की सुरक्षा और इलाज की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है। PMCH में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति की स्थिरता सीधे उनकी सुरक्षा से जुड़ी है।’ इस फैसले से न सिर्फ अस्पताल की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि गंभीर मरीजों के इलाज में आने वाली अनिश्चितताओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।


