कैमूर में PMAY घोटाला;आवास सहायक का रिश्वत लेते वीडियो वायरल:मदुरना पंचायत में जियो टैगिंग के लिए 1000 रुपए लेने का आरोप

कैमूर में PMAY घोटाला;आवास सहायक का रिश्वत लेते वीडियो वायरल:मदुरना पंचायत में जियो टैगिंग के लिए 1000 रुपए लेने का आरोप

कैमूर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। चैनपुर प्रखंड की मदुरना पंचायत में आवास सहायक शेखर पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें जियो टैगिंग के लिए 1000 रुपए की रिश्वत लेते हुए देखा जा रहा है। यह घटना शाहपुर गांव के हरिचरण सिंह से पैसे लेते समय रिकॉर्ड की गई। पीड़ित हरिचरण सिंह ने बताया कि योजना में नाम जोड़ने के लिए उनसे पहले 2000 रुपए लिए गए थे। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उनका नाम सूची में नहीं आया। बाद में पैसे देने के बाद ही उनका नाम अंतिम सूची में शामिल किया गया। अब जियो टैगिंग के नाम पर उनसे फिर 1000 रुपए की मांग की गई, जो उन्हें देने पड़े। रिश्वत दिए बिना नहीं होता है कोई काम मदुरना पंचायत के एक अन्य ग्रामीण कमलेश कुमार ने आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए न तो किसी का नाम योजना में जुड़ता है और न ही जियो टैगिंग हो पाती है। उन्होंने बताया कि विधवा लाभार्थियों को भी इस भ्रष्टाचार से नहीं बख्शा जा रहा है। पंचायत मुखिया सुभाष सिंह ने इस मामले पर कहा कि उन्होंने ग्रामीणों को शिकायत दर्ज कराने और ऐसे मामलों के वीडियो बनाने की सलाह दी थी। उन्होंने मांग की कि यदि वीडियो सही पाया जाता है, तो दोषी आवास सहायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह घटना डिप्टी सीएम विजय सिन्हा द्वारा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त तेवर दिखाने के बावजूद सामने आई है। वायरल वीडियो के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ग्रामीण यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस बार दोषी को सजा मिलेगी या मामला पहले की तरह दब जाएगा। कैमूर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। चैनपुर प्रखंड की मदुरना पंचायत में आवास सहायक शेखर पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें जियो टैगिंग के लिए 1000 रुपए की रिश्वत लेते हुए देखा जा रहा है। यह घटना शाहपुर गांव के हरिचरण सिंह से पैसे लेते समय रिकॉर्ड की गई। पीड़ित हरिचरण सिंह ने बताया कि योजना में नाम जोड़ने के लिए उनसे पहले 2000 रुपए लिए गए थे। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उनका नाम सूची में नहीं आया। बाद में पैसे देने के बाद ही उनका नाम अंतिम सूची में शामिल किया गया। अब जियो टैगिंग के नाम पर उनसे फिर 1000 रुपए की मांग की गई, जो उन्हें देने पड़े। रिश्वत दिए बिना नहीं होता है कोई काम मदुरना पंचायत के एक अन्य ग्रामीण कमलेश कुमार ने आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए न तो किसी का नाम योजना में जुड़ता है और न ही जियो टैगिंग हो पाती है। उन्होंने बताया कि विधवा लाभार्थियों को भी इस भ्रष्टाचार से नहीं बख्शा जा रहा है। पंचायत मुखिया सुभाष सिंह ने इस मामले पर कहा कि उन्होंने ग्रामीणों को शिकायत दर्ज कराने और ऐसे मामलों के वीडियो बनाने की सलाह दी थी। उन्होंने मांग की कि यदि वीडियो सही पाया जाता है, तो दोषी आवास सहायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह घटना डिप्टी सीएम विजय सिन्हा द्वारा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त तेवर दिखाने के बावजूद सामने आई है। वायरल वीडियो के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ग्रामीण यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस बार दोषी को सजा मिलेगी या मामला पहले की तरह दब जाएगा।  

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