शेखपुरा में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर सदर अस्पताल में कुष्ठ उन्मूलन शपथ समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (ACMO) डॉ. अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसमें सदर अस्पताल के चिकित्सक, कर्मचारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, जीविका के प्रखंड स्तरीय अधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी और जीएनएम कॉलेज की छात्राओं सहित कई लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए ACMO डॉ. सिंह ने बताया कि गांधीजी अस्पृश्यता को सामाजिक बुराई मानते थे और इसका उन्मूलन राष्ट्र निर्माण का आधार बताते थे। उन्होंने कहा कि यह शपथ लोगों को समानता, अहिंसा और भेदभाव त्याग की प्रतिबद्धता दिलाती है, जो संविधान के अनुच्छेद 17 से संबंधित है। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और रोगियों से भेदभाव रोकने पर जोर देना है। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने कुष्ठ को लेकर फैली भ्रांतियों के संबंध में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संदेश से सभी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी का जीवन कुष्ठ रोगियों की सेवा में व्यतीत हुआ था। इस अवसर पर सभी को शपथ दिलाई गई कि वे अपने आसपास के कुष्ठ प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाने वाली मुफ्त दवा के लिए प्रेरित करेंगे। शपथ के दौरान कुष्ठ रोगियों के प्रति किसी प्रकार का भेदभाव न अपनाने का संकल्प लिया गया। यह जानकारी भी दी गई कि कुष्ठ छुआछूत की बीमारी नहीं है और इसके विषाणु छूने से एक-दूसरे में नहीं फैलते हैं। सभी से कुष्ठ रोगियों के प्रति सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और उन्हें समाज का ही अंग मानने का आह्वान किया गया। यह भी बताया गया कि कुष्ठ लाइलाज बीमारी नहीं है, इसका इलाज संभव है और सभी को इसका इलाज कराना चाहिए। सरकार द्वारा कुष्ठ रोगियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास के लिए चलाई जा रही सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया। शेखपुरा में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर सदर अस्पताल में कुष्ठ उन्मूलन शपथ समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (ACMO) डॉ. अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसमें सदर अस्पताल के चिकित्सक, कर्मचारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, जीविका के प्रखंड स्तरीय अधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी और जीएनएम कॉलेज की छात्राओं सहित कई लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए ACMO डॉ. सिंह ने बताया कि गांधीजी अस्पृश्यता को सामाजिक बुराई मानते थे और इसका उन्मूलन राष्ट्र निर्माण का आधार बताते थे। उन्होंने कहा कि यह शपथ लोगों को समानता, अहिंसा और भेदभाव त्याग की प्रतिबद्धता दिलाती है, जो संविधान के अनुच्छेद 17 से संबंधित है। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और रोगियों से भेदभाव रोकने पर जोर देना है। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने कुष्ठ को लेकर फैली भ्रांतियों के संबंध में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संदेश से सभी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी का जीवन कुष्ठ रोगियों की सेवा में व्यतीत हुआ था। इस अवसर पर सभी को शपथ दिलाई गई कि वे अपने आसपास के कुष्ठ प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाने वाली मुफ्त दवा के लिए प्रेरित करेंगे। शपथ के दौरान कुष्ठ रोगियों के प्रति किसी प्रकार का भेदभाव न अपनाने का संकल्प लिया गया। यह जानकारी भी दी गई कि कुष्ठ छुआछूत की बीमारी नहीं है और इसके विषाणु छूने से एक-दूसरे में नहीं फैलते हैं। सभी से कुष्ठ रोगियों के प्रति सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और उन्हें समाज का ही अंग मानने का आह्वान किया गया। यह भी बताया गया कि कुष्ठ लाइलाज बीमारी नहीं है, इसका इलाज संभव है और सभी को इसका इलाज कराना चाहिए। सरकार द्वारा कुष्ठ रोगियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास के लिए चलाई जा रही सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।


