RJD-कांग्रेस के बीच कड़वाहट के पीछे PK तो नहीं:प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस के तेवर बदले, बिहार में क्या होगा नया समीकरण

RJD-कांग्रेस के बीच कड़वाहट के पीछे PK तो नहीं:प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस के तेवर बदले, बिहार में क्या होगा नया समीकरण

सबसे पहले 3 बड़े बयान… विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और RJD के बीच पैदा हुई तल्खी बढ़ रही है। मनरेगा वापसी की मांग को लेकर 8 जनवरी से शुरू हो रहे राज्यव्यापी आंदोलन में भी कांग्रेस RJD को छोड़कर सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। मतलब बिहार में गठबंधन टूट रहा है। खास बात है कि दोनों पार्टियों की रिश्तों में कड़वाहट प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद दिख रही है। क्या कांग्रेस बिहार में एकला चलो की राह पर है। RJD-कांग्रेस के अलग होने के पीछे प्रशांत किशोर हैं। कांग्रेस क्या नया समीकरण बना सकती है। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। 4 पॉइंट में कांग्रेस नेता क्यों RJD से गठबंधन तोड़ना चाहते हैं… 1. बिहार कांग्रेस की राय- गठबंधन से कोई फायदा नहीं बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार को लेकर कांग्रेस लगातार रिव्यू मीटिंग कर रही है। इसमें प्रदेश स्तर के नेताओं ने ग्राउंड से फीडबैक लेकर बताया कि RJD के साथ गठबंधन से कोई फायदा नहीं है। दिल्ली में हुई कांग्रेस की रिव्यू मीटिंग में भी बिहार के नेताओं ने राहुल गांधी के सामने इस बात को दोहराया। आंकड़ों भी बता रहे हैं कि कांग्रेस को RJD के साथ रहने से कोई फायदा नहीं हुआ है। इसे ऐसे समझिए… 8 जनवरी से मनरेगा आंदोलन में कांग्रेस के ‘एकला चलो’ की राह बढ़ने से यह तय हो गया है कि बिहार में महागठबंधन के खत्म होने की केवल औपचारिक घोषणा मात्र बची रह गई है। 2. लालू परिवार के कारण नए वोटर नहीं जुड़ पा रहे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति को बदला। पार्टी दलित और OBC-EBC वोटरों को साधने के लिए अभियान से लेकर मेनिफेस्टो तक जारी किया। बिहार में EBC को लेकर खासा वादा किया गया, लेकिन चुनाव के रिजल्ट बता रहे हैं कि इससे कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हुआ। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि बिहार में लालू यादव सत्ता जाने के 20 साल बाद भी एक फैक्टर हैं। विरोधी इसका फायदा उठाते हैं और सरकार से नाराजगी के बाद भी लोग हमें वोट नहीं देते। नए वोटरों के नहीं जुड़ने का सबसे बड़ा कारण लालू यादव का चेहरा है। 3. पुराने समीकरण पर लौटना चाहती है कांग्रेस 27 नवंबर को दिल्ली में हुई रिव्यू मीटिंग में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने सभी हारे हुए कैंडिडेट से बंद कमरे में मुलाकात की। बैठक में इस बात पर लगभग सहमति बनी कि बिहार में EBC-OBC वर्ग का लोभ छोड़कर पार्टी को अपने पुराने और आधार वोट वर्ग पर ही काम करना चाहिए। इस चुनाव में EBC को साधने की रणनीति से फायदा की जगह नुकसान हुआ है। बैठक में टॉप लीडरशिप ने इस बात के संकेत दिए हैं कि पार्टी अपने पुराने समीकरण मुस्लिम, दलित और भूमिहार, ब्राह्मण पर फोकस करे। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘अगर पार्टी पुराने समीकरण पर लौटना चाहती है तो इसका सीधा मतलब है कि वह लालू यादव से दूरी बढ़ा सकती है। अगर RJD के साथ रहकर पुराने समीकरण पर लौटना चाहेगी तो सफलता मिलना मुश्किल है।’ पुराने समीकरण पर लौटने का मतलब… 4. प्रशांत किशोर भी एक फैक्टर RJD-कांग्रेस के रिश्तों में कड़वाहट तब सामने आ रही है जब नवंबर के आखिरी और दिसबंर के पहले सप्ताह में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर की मुलाकात हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका और प्रशांत किशोर के बीच दिल्ली में बंद कमरे में करीब 2 घंटे बातें हुईं। प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से बिहार और देश में विपक्ष की राजनीति पर बातें हुईं है। सबसे पहले 3 बड़े बयान… विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और RJD के बीच पैदा हुई तल्खी बढ़ रही है। मनरेगा वापसी की मांग को लेकर 8 जनवरी से शुरू हो रहे राज्यव्यापी आंदोलन में भी कांग्रेस RJD को छोड़कर सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। मतलब बिहार में गठबंधन टूट रहा है। खास बात है कि दोनों पार्टियों की रिश्तों में कड़वाहट प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद दिख रही है। क्या कांग्रेस बिहार में एकला चलो की राह पर है। RJD-कांग्रेस के अलग होने के पीछे प्रशांत किशोर हैं। कांग्रेस क्या नया समीकरण बना सकती है। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। 4 पॉइंट में कांग्रेस नेता क्यों RJD से गठबंधन तोड़ना चाहते हैं… 1. बिहार कांग्रेस की राय- गठबंधन से कोई फायदा नहीं बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार को लेकर कांग्रेस लगातार रिव्यू मीटिंग कर रही है। इसमें प्रदेश स्तर के नेताओं ने ग्राउंड से फीडबैक लेकर बताया कि RJD के साथ गठबंधन से कोई फायदा नहीं है। दिल्ली में हुई कांग्रेस की रिव्यू मीटिंग में भी बिहार के नेताओं ने राहुल गांधी के सामने इस बात को दोहराया। आंकड़ों भी बता रहे हैं कि कांग्रेस को RJD के साथ रहने से कोई फायदा नहीं हुआ है। इसे ऐसे समझिए… 8 जनवरी से मनरेगा आंदोलन में कांग्रेस के ‘एकला चलो’ की राह बढ़ने से यह तय हो गया है कि बिहार में महागठबंधन के खत्म होने की केवल औपचारिक घोषणा मात्र बची रह गई है। 2. लालू परिवार के कारण नए वोटर नहीं जुड़ पा रहे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति को बदला। पार्टी दलित और OBC-EBC वोटरों को साधने के लिए अभियान से लेकर मेनिफेस्टो तक जारी किया। बिहार में EBC को लेकर खासा वादा किया गया, लेकिन चुनाव के रिजल्ट बता रहे हैं कि इससे कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हुआ। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि बिहार में लालू यादव सत्ता जाने के 20 साल बाद भी एक फैक्टर हैं। विरोधी इसका फायदा उठाते हैं और सरकार से नाराजगी के बाद भी लोग हमें वोट नहीं देते। नए वोटरों के नहीं जुड़ने का सबसे बड़ा कारण लालू यादव का चेहरा है। 3. पुराने समीकरण पर लौटना चाहती है कांग्रेस 27 नवंबर को दिल्ली में हुई रिव्यू मीटिंग में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने सभी हारे हुए कैंडिडेट से बंद कमरे में मुलाकात की। बैठक में इस बात पर लगभग सहमति बनी कि बिहार में EBC-OBC वर्ग का लोभ छोड़कर पार्टी को अपने पुराने और आधार वोट वर्ग पर ही काम करना चाहिए। इस चुनाव में EBC को साधने की रणनीति से फायदा की जगह नुकसान हुआ है। बैठक में टॉप लीडरशिप ने इस बात के संकेत दिए हैं कि पार्टी अपने पुराने समीकरण मुस्लिम, दलित और भूमिहार, ब्राह्मण पर फोकस करे। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘अगर पार्टी पुराने समीकरण पर लौटना चाहती है तो इसका सीधा मतलब है कि वह लालू यादव से दूरी बढ़ा सकती है। अगर RJD के साथ रहकर पुराने समीकरण पर लौटना चाहेगी तो सफलता मिलना मुश्किल है।’ पुराने समीकरण पर लौटने का मतलब… 4. प्रशांत किशोर भी एक फैक्टर RJD-कांग्रेस के रिश्तों में कड़वाहट तब सामने आ रही है जब नवंबर के आखिरी और दिसबंर के पहले सप्ताह में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर की मुलाकात हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका और प्रशांत किशोर के बीच दिल्ली में बंद कमरे में करीब 2 घंटे बातें हुईं। प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से बिहार और देश में विपक्ष की राजनीति पर बातें हुईं है।  

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