चेन्नई. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने डीएमके सरकार पर आरोप लगाया कि तमिलनाडु में केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाएं लागू करने में सरकार विफल रही है। सोमवार को राज्य पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए गोयल ने कहा कि केंद्र द्वारा पर्याप्त वित्तीय सहायता दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने धन का समुचित उपयोग नहीं किया और योजनाओं के लाभ पात्र नागरिकों तक नहीं पहुंच पाए।
गोयल ने आवास योजना का उदाहरण देते हुए बताया कि तमिलनाडु के लिए केंद्र की योजनाओं के तहत 9 लाख से अधिक मकान स्वीकृत किए गए, लेकिन राज्य सरकार ने लगभग 3 लाख परिवारों के लाभार्थी विवरण अब तक नहीं भेजे हैं। उन्होंने सवाल किया, “ये गरीब परिवार हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाओं वाले मकान मिल सकते थे। मैं पूछना चाहता हूं कि राज्य सरकार को इन परिवारों से क्या समस्या है?”इसके अलावा जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के तहत जारी धन का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। गोयल ने आरोप लगाया कि स्टालिन सरकार द्वारा ठेके देने में भारी भ्रष्टाचार हुआ है।
उन्होंने कहा, “इस मिशन में ठेकों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। जांच में देखा जा रहा है कि किन-किन मंत्रियों की संलिप्तता है और क्या मुख्यमंत्री सीधे उस भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार हैं। मैं तमिलनाडु की जनता को आश्वस्त करता हूं कि हम पिछले पांच वर्षों के भ्रष्टाचार के लिए इन मंत्रियों और मुख्यमंत्री को जवाबदेह बनाएंगे।”कर वितरण के संबंध में गोयल ने कहा कि तमिलनाडु को करों के वितरण में दोगुना लाभ मिला है, जबकि अनुदान राशि भी काफी बढ़ी है।
उनके अनुसार, 2004 से 2014 के बीच तमिलनाडु को औसतन 57,000 करोड़ रुपये अनुदान मिला, जबकि वर्तमान शासन में यह राशि बढ़कर लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये हो गई है।गोयल ने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र के साथ सहयोग कर कल्याणकारी योजनाओं और अधोसंरचना विकास का लाभ जनता तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने डीएमके सरकार पर अन्य केंद्रीय पहलों के क्रियान्वयन में देरी का भी आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी प्रभावित हो रही है।



