फिजिकल हेल्थ- पुरुषों में भी होता हॉर्मोनल इंबैलेंस:12 संकेतों को न करें इग्नोर, ये 9 मेडिकल टेस्ट जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर

फिजिकल हेल्थ- पुरुषों में भी होता हॉर्मोनल इंबैलेंस:12 संकेतों को न करें इग्नोर, ये 9 मेडिकल टेस्ट जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर

महिलाओं में पीरियड्स या मेनोपॉज के दौरान मूड स्विंग्स, थकान और उदासी होना कॉमन है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि पुरुषों को भी ये समस्याएं होती हैं। इन सबके लिए हमारे हॉर्मोन्स जिम्मेदार होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पुरुषों में ये बदलाव अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। हॉर्मोन्स शरीर के हर जरूरी फंक्शन को कंट्रोल करते हैं। इसलिए इनका संतुलित रहना जरूरी है। इसका असर फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज पुरुषों के ‘हॉर्मोनल इंबैलेंस’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. साकेत कांत, सीनियर कंसल्टेंट, एंडोक्रोनोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- हॉर्मोनल इंबैलेंस क्या होता है? जवाब- हॉर्मोनल इंबैलेंस यानी ऐसी कंडीशन, जब शरीर में हॉर्मोन्स का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा हो जाता है। हॉर्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण फंक्शंस के लिए जरूरी हैं। ये मेटाबॉलिज्म, मूड, नींद, फर्टिलिटी और ग्रोथ को कंट्रोल करते हैं। असंतुलन होने पर थकान, वजन में बदलाव, मुंहासे या मूड स्विंग्स जैसे लक्षण दिख सकते हैं। आमतौर पर ये बदलाव खराब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, थायरॉइड प्रॉब्लम्स या उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देते हैं। सवाल- पीरियड्स और मेनोपॉज की वजह से महिलाओं के शरीर में अक्सर हॉर्मोनल इंबैलेंस होता है। लेकिन क्या महिलाओं की तरह पुरुषों में भी हॉर्मोनल इंबैलेंस हो सकता है? जवाब- हां, लेकिन दोनों के कारण और लक्षण अलग हो सकते हैं। पुरुषों में मुख्य हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन होता है, जो उम्र बढ़ने, तनाव, खराब लाइफस्टाइल, मोटापा या कुछ बीमारियों के कारण कम हो सकता है। इससे थकान, मसल लॉस, लो सेक्स ड्राइव, मूड स्विंग्स और नींद की समस्या जैसे लक्षण दिख सकते हैं। सवाल- पुरुषों के शरीर में कौन से डॉमिनेटिंग हॉर्मोन्स होते हैं, जिनका इंबैलेंस हो सकता है? जवाब- पुरुषों के शरीर में मुख्य डॉमिनेटिंग हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन होता है, जो मसल्स और हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। यह सेक्स ड्राइव और स्पर्म प्रोडक्शन को भी कंट्रोल करता है। इसके अलावा- ‘इंसुलिन हॉर्मोन’- ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। ‘थायरॉइड हॉर्मोन’- मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है। ‘कोर्टिसोल हॉर्मोन’- स्ट्रेस को प्रोसेस करता है। ‘ग्रोथ हॉर्मोन्स’- शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इन हॉर्मोन्स के असंतुलित होने पर थकान, वेट फ्लक्चुएशन, मूड स्विंग, कमजोरी, नींद की कमी और सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर जांच से इन्हें संतुलित रखा जा सकता है। सवाल- पुरुषों में किन संकेतों से पता चलता है कि शरीर में हॉर्मोनल इंबैलेंस है? जवाब- पुरुषों में हॉर्मोनल इंबैलेंस के कारण अक्सर थकान, मूड स्विंग्स जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर किसी को लगातार थकान रहती है तो क्या यह हॉर्मोन्स में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है? जवाब- हां, लगातार थकान रहना हॉर्मोन्स में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं होता। टेस्टोस्टेरोन, थायरॉइड और कोर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) हमारी एनर्जी, मेटाबॉलिज्म और नींद को कंट्रोल करते हैं। इनके असंतुलित होने पर थकान महसूस हो सकती है। हालांकि, एनीमिया, नींद की कमी, तनाव या खराब डाइट भी इसकी वजह हो सकते हैं। इसलिए अगर थकान लंबे समय तक बनी रहे और साथ में अन्य लक्षण भी दिखें, तो ब्लड टेस्ट कराकर सही कारण जानना जरूरी है। सवाल- मूड स्विंग और गुस्से का हॉर्मोनल इंबैलेंस से क्या संबंध है? जवाब- मूड स्विंग और गुस्सा भी हॉर्मोनल इंबैलेंस से जुड़ा हो सकता है, क्योंकि हॉर्मोन्स ब्रेन के केमिकल सिग्नल और इमोशन्स को कंट्रोल करते हैं। टेस्टोस्टेरोन, कोर्टिसोल और थायरॉइड हॉर्मोन में गड़बड़ी होने पर चिड़चिड़ापन, गुस्सा या बेचैनी बढ़ सकती है। खासकर कोर्टिसोल लंबे समय तक हाई रहने पर मूड अस्थिर हो जाता है। इसके अलावा नींद की कमी और तनाव भी हॉर्मोन को प्रभावित करते हैं, जिससे यह समस्या बढ़ती है। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार दिखें तो लाइफस्टाइल सुधारने और जरूरत पड़ने पर जांच कराना जरूरी है। सवाल- क्या उम्र के साथ टेस्टेस्टेरोन कम होना सामान्य है? इस हॉर्मोन की कमी से शरीर में क्या संकेत दिखते हैं? किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? जवाब- हां, उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे कम होना एक सामान्य बायोलॉजिकल प्रोसेस है। इसे ‘एंड्रोपॉज’ कहते हैं। आमतौर पर 30-40 वर्ष के बाद इसका कम होना नॉर्मल है। इसकी कमी से कुछ संकेत दिखते हैं। जैसेेकि- लंबे समय तक कमी रहने पर हड्डियां कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस), मेटाबॉलिज्म धीमा होना और हार्ट हेल्थ पर असर पड़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। सही लाइफस्टाइल और समय पर जांच से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। सवाल- वेस्ट फैट (कमर की चर्बी) और मसल लॉस का हॉर्मेनल इंबैलेंस से क्या संबंध है? जवाब- इनके बीच गहरा संबंध है। टेस्टोस्टेरोन मसल्स बनाने और फैट कंट्रोल में मदद करता है, जबकि इंसुलिन और कोर्टिसोल फैट स्टोरेज को प्रभावित करते हैं। टेस्टोस्टेरोन कम होने पर मसल्स घटने लगते हैं और फैट (खासकर पेट के आसपास) बढ़ने लगता है। वहीं हाई कोर्टिसोल और इंसुलिन रेजिस्टेंस भी वेस्ट फैट बढ़ाते हैं। यह स्थिति मेटाबॉलिज्म को स्लो कर देती है, जिससे वजन घटाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए संतुलित डाइट, एक्सरसाइज और स्ट्रेस कंट्रोल करने से हॉर्मोन्ल बैलेंस बना रहता है। सवाल- क्या स्ट्रेस के कारण भी हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ सकता है? जवाब- हां, स्ट्रेस के कारण हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ सकता है। तनाव की स्थिति में शरीर कोर्टिसोल ज्यादा मात्रा में बनाने लगता है। लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल रहने से टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड हॉर्मोन का संतुलन प्रभावित हो सकता है। सवाल- हॉर्मोन टेस्ट कब करवाना चाहिए? इसके लिए कौन से ब्लड टेस्ट जरूरी होते हैं? जवाब- इस तरह के संकेत दिखने पर हॉर्मोन्स टेस्ट करवाने चाहिए- आमतौर पर ब्लड टेस्ट में थायरॉइड प्रोफाइल (TSH, T3, T4), टेस्टोस्टेरोन, कोर्टिसोल और इंसुलिन की जांच की जाती है। डॉक्टर लक्षण और जरूरत के हिसाब से ये टेस्ट करवा सकते हैं- सवाल- किन लक्षणों में हॉर्मोन थेरेपी जरूरी होती है? जवाब- हॉर्मोन थेरेपी कब जरूरी हो सकती है- सवाल- क्या हॉर्मोन इंबैलेंस का हमारी लाइफस्टाइल से भी कोई संबंध है? जवाब- हां, हॉर्मोन इंबैलेंस का लाइफस्टाइल से सीधा संबंध है- सवाल- शरीर में हॉर्मोन बैलेंस बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या सुधार करने चाहिए? जवाब- हॉर्मोनल बैलेंस बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ सुधार करना जरूरी है। ………………
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