रोहतक बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान लोकेंद्र सिंह फौगाट की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इस याचिका के जरिए पूर्व प्रधान ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और अंतरिम राहत की मांग की थी। लेकिन याचिका खारिज होने से लोकेंद्र फौगाट को निराशा हाथ लगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी भी प्रकार का दखल देने से इंकार करते हुए पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट की याचिका खारिज कर दिया। इस याचिका के जरिए फौगाट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पार्टी बनाया था। लेकिन अब याचिका खारिज होने से वह बार का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा का लड़ना चाहते है चुनाव
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के चुनाव में उम्मीदवार के रूप में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। तब हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि लोकेंद्र फौगाट के खिलाफ 2 अनुशासनात्मक कार्यवाही अभी लंबित हैं, इसलिए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। लोकेंद्र फौगाट के चुनाव लड़ने पर लगाया था प्रतिबंद
बार काउंसिल ने 23 मार्च 2024 को लोकेंद्र फौगाट को भविष्य में किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंधित कर दिया था, क्योंकि उन्होंने बार एसोसिएशन (संविधान एवं पंजीकरण) नियम 205 के नियम 6-बी (3) का उल्लंघन किया था। इस आदेश के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसे 27 फरवरी 2025 को खारिज कर दिया गया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
बार एसोसिएशन रोहतक के पूर्व प्रधान ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसमें भविष्य में किसी भी चुनाव में भाग लेने, पुलिस शिकायत दर्ज कराने, अधिवक्ता अधिनियम की धारा 35 के तहत कार्यवाही शुरू करने और कानूनी अभ्यास से रोकने के निर्देशों को चुनौती दी गई थी। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 के आदेश में उन्हें कानूनी अभ्यास से रोकने के निर्देश को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया था, लेकिन चुनाव लड़ने पर कोई राहत नहीं दी।


