समस्तीपुर में बंद पड़ी चीनी मिल को फिर से चालू करने की मांग को लेकर आज शहर में प्रदर्शन किया गया। जिला विकास मंच के बैनर तले नागरिकों ने मार्च निकाला और चीनी मिल चौक पर एक सभा का आयोजन किया। जिला विकास मंच से जुड़े बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रविवार को शहर के सरकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हुए। उन्होंने “बंद समस्तीपुर के चीनी मिल को चालू करो” के नारे लगाते हुए नागरिक मार्च निकाला। यह मार्च मुख्यालय का भ्रमण करते हुए ओवरब्रिज के रास्ते चीनी मिल चौक पहुंचा, जहां यह एक सभा में परिवर्तित हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक ने की सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की। इस दौरान शंकर साह, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राकेश ठाकुर, उपेंद्र राय, राम विनोद पासवान, पिंकू पासवान, संतोष कुमार निराला, विश्वनाथ सिंह हजारी, शाहीद हुसैन, सुशील कुमार राय, रवि आनंद, जितेंद्र कुमार, जगलाल राय, शंभू राय और मनोज राय सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। मंच के वरीय सदस्य और सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंग्रेजों के जमाने में 1917 में स्थापित समस्तीपुर चीनी मिल सालों से बंद पड़ी है। यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका का साधन थी। उन्होंने बताया कि मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन है, चौतरफा आवागमन के साधन, विद्युत और रेल सुविधा के साथ-साथ सस्ते श्रमिक भी उपलब्ध हैं। सरकार इसे कम खर्च में आसानी से चालू कर सकती है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बंद समस्तीपुर चीनी मिल को चालू कराने के लिए सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, छात्र-नौजवानों, मजदूर-किसानों और व्यवसायियों से संघर्ष तेज करने की अपील की। बता दें कि समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार की ओर से की गई थी। यह मिल शुरू में अच्छी तरह से चल रही थी। लेकिन साल 1995 में इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद से मिल को फिर से चालू करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। समस्तीपुर में बंद पड़ी चीनी मिल को फिर से चालू करने की मांग को लेकर आज शहर में प्रदर्शन किया गया। जिला विकास मंच के बैनर तले नागरिकों ने मार्च निकाला और चीनी मिल चौक पर एक सभा का आयोजन किया। जिला विकास मंच से जुड़े बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रविवार को शहर के सरकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हुए। उन्होंने “बंद समस्तीपुर के चीनी मिल को चालू करो” के नारे लगाते हुए नागरिक मार्च निकाला। यह मार्च मुख्यालय का भ्रमण करते हुए ओवरब्रिज के रास्ते चीनी मिल चौक पहुंचा, जहां यह एक सभा में परिवर्तित हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक ने की सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की। इस दौरान शंकर साह, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राकेश ठाकुर, उपेंद्र राय, राम विनोद पासवान, पिंकू पासवान, संतोष कुमार निराला, विश्वनाथ सिंह हजारी, शाहीद हुसैन, सुशील कुमार राय, रवि आनंद, जितेंद्र कुमार, जगलाल राय, शंभू राय और मनोज राय सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। मंच के वरीय सदस्य और सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंग्रेजों के जमाने में 1917 में स्थापित समस्तीपुर चीनी मिल सालों से बंद पड़ी है। यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका का साधन थी। उन्होंने बताया कि मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन है, चौतरफा आवागमन के साधन, विद्युत और रेल सुविधा के साथ-साथ सस्ते श्रमिक भी उपलब्ध हैं। सरकार इसे कम खर्च में आसानी से चालू कर सकती है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बंद समस्तीपुर चीनी मिल को चालू कराने के लिए सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, छात्र-नौजवानों, मजदूर-किसानों और व्यवसायियों से संघर्ष तेज करने की अपील की। बता दें कि समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार की ओर से की गई थी। यह मिल शुरू में अच्छी तरह से चल रही थी। लेकिन साल 1995 में इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद से मिल को फिर से चालू करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।


