जमीन मापी के लंबित आवेदन 31 जनवरी तक निपटाए जाएंगे:1 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होगी, सीएम नीतीश ने ‘X’ पर दी जानकारी

जमीन मापी के लंबित आवेदन 31 जनवरी तक निपटाए जाएंगे:1 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होगी, सीएम नीतीश ने ‘X’ पर दी जानकारी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में भूमि मापी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि नई सरकार के गठन के बाद ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ कार्यक्रमों को लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है। इन सात निश्चयों में 7वां निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान (Ease of Living)’ है, जिसके तहत आम नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली परेशानियों को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि जमीन मापी के लिए आवेदन देने के बाद प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग जाता है। इससे लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और कई बार भूमि विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भूमि मापी व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्णय लिए हैं। घोषित फैसलों के अनुसार, 31 जनवरी तक जमीन मापी से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर कर दिया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत अविवादित जमीन की मापी शुल्क जमा होने के अधिकतम 7 कार्य दिवस के भीतर पूरी की जाएगी। वहीं, विवादित जमीन की मापी अधिकतम 11 कार्य दिवस में की जाएगी। आवेदकों को समय पर जानकारी मिलेगी इसके अलावा, अविवादित और विवादित दोनों प्रकार की जमीन की मापी पूरी होने के बाद अमीन की ओर से तैयार मापी प्रतिवेदन को आवेदन की तिथि के 14वें दिन अनिवार्य रूप से निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आवेदकों को समय पर जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में जमीन मापी करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया की गहन निगरानी भी की जाएगी ताकि किसी स्तर पर लापरवाही न हो। भूमि विवादों में कमी से जीवन आसान होगा नीतीश कुमार ने विश्वास जताया कि भूमि मापी प्रक्रिया को सरल बनाने की यह पहल राज्य के नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी और भूमि विवादों में कमी लाने के साथ-साथ लोगों का जीवन और भी आसान बनेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि यदि इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कोई विशिष्ट सुझाव हों, तो वे 25 जनवरी 2026 तक निर्धारित माध्यमों से अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकते हैं। वहीं, प्रवक्ता जदयू प्रवक्ता किशोर कुणाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज शानदार निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में भूमि मापी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि नई सरकार के गठन के बाद ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ कार्यक्रमों को लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है। इन सात निश्चयों में 7वां निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान (Ease of Living)’ है, जिसके तहत आम नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली परेशानियों को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि जमीन मापी के लिए आवेदन देने के बाद प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग जाता है। इससे लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और कई बार भूमि विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भूमि मापी व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्णय लिए हैं। घोषित फैसलों के अनुसार, 31 जनवरी तक जमीन मापी से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर कर दिया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत अविवादित जमीन की मापी शुल्क जमा होने के अधिकतम 7 कार्य दिवस के भीतर पूरी की जाएगी। वहीं, विवादित जमीन की मापी अधिकतम 11 कार्य दिवस में की जाएगी। आवेदकों को समय पर जानकारी मिलेगी इसके अलावा, अविवादित और विवादित दोनों प्रकार की जमीन की मापी पूरी होने के बाद अमीन की ओर से तैयार मापी प्रतिवेदन को आवेदन की तिथि के 14वें दिन अनिवार्य रूप से निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आवेदकों को समय पर जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में जमीन मापी करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया की गहन निगरानी भी की जाएगी ताकि किसी स्तर पर लापरवाही न हो। भूमि विवादों में कमी से जीवन आसान होगा नीतीश कुमार ने विश्वास जताया कि भूमि मापी प्रक्रिया को सरल बनाने की यह पहल राज्य के नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी और भूमि विवादों में कमी लाने के साथ-साथ लोगों का जीवन और भी आसान बनेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि यदि इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कोई विशिष्ट सुझाव हों, तो वे 25 जनवरी 2026 तक निर्धारित माध्यमों से अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकते हैं। वहीं, प्रवक्ता जदयू प्रवक्ता किशोर कुणाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज शानदार निर्णय लिया है।  

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