अनूपपुर जिले में पटवारी संघ और जिला प्रशासन के बीच गतिरोध बढ़ गया है। पिछले 12 दिनों से कलमबंद हड़ताल पर बैठे पटवारियों के समर्थन में तहसीलाध्यक्ष ने अब सामूहिक इस्तीफा सौंपने का फैसला किया है। यह कदम प्रशासन द्वारा जारी नोटिस और कार्रवाई की चेतावनी के बाद उठाया गया है। सोमवार को जिले की सभी तहसीलों के अध्यक्षों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भय के माहौल में काम करना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन जनता के रुके हुए कामों जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन को सुचारु करने के बजाय प्रशासन हड़ताल तोड़ने के लिए दमनकारी नीतियां अपना रहा है। संघ के अनुसार, नए पटवारियों को सेवा समाप्ति की धमकी दी जा रही है, जबकि संघ पदाधिकारियों को व्यक्तिगत नोटिस भेजकर डराया जा रहा है। पटवारियों ने कहा कि जिला प्रशासन जनहित को अनदेखा कर द्वेषपूर्ण कार्रवाई कर रहा है। पटवारियों ने ज्ञापन में पुष्पराजगढ़ तहसीलदार संजय जाट के निलंबन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संजय जाट ने फार्मर रजिस्ट्री में जिले के औसत (26.59 प्रतिशत से अधिक 35 प्रतिशत प्रगति हासिल की थी, फिर भी उन्हें कम प्रगति का हवाला देकर निलंबित कर दिया गया। पटवारियों का तर्क है कि जब अच्छा काम करने वाले अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मैदानी कर्मचारी किस भरोसे काम करेंगे। पटवारी संघ, जिला इकाई अनूपपुर के चेतन सिंह मरावी ने बताया कि अनूपपुर की कलमबंद हड़ताल का असर अब पूरे प्रदेश में फैल गया है। अनूपपुर जिले की 10 सूत्रीय मांगों के समर्थन में प्रदेश के अन्य जिलों में भी ज्ञापन सौंपे गए हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का त्वरित निराकरण नहीं हुआ, तो 27 फरवरी से पूरे मध्य प्रदेश के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन जांच प्रतिवेदन और गिरदावरी जैसे आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने के बजाय उन्हें धमकाने में लगा है। पटवारियों ने मांग की है कि या तो उनकी मांगें पूरी की जाएं, या उनका सामूहिक इस्तीफा स्वीकार किया जाए।


