PATRIKA PODCAST : ईश्वरीय प्रसाद है संयोग

PATRIKA PODCAST : ईश्वरीय प्रसाद है संयोग

संयोग ही अतिथि है। इसका अर्थ है कि वह आता ही नहीं है, आप भी जाते हैं। आपको मार्ग में संयोग मिल जाता है अथवा गन्तव्य पर नया कोई संयोग बन जाता है। आप इसे किस रूप में स्वीकार करते हैं-इसे कर्मफल मानते हैं या नए किसी कर्म की शुरुआत मानते हैं अथवा व्यर्थ मानकर विस्मृत कर देते हैं-यह आपका निर्णय होगा।

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