Iran-Israel War : ईरान-इजरायल युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के तीन हफ्तों में दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों पर हुए हमले के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। आज यानि 23 मार्च को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं, अब यह युद्ध सिर्फ आर्थिक, सैन्य मोर्चे पर सीमित नहीं रहा है। यह गंभीर पर्यावरणीय आपदा की ओर बढ़ रहा है।
एनर्जी सेक्टर पर बढ़े हमले
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब गैस और एनर्जी सेक्टर पर हमले किए जाने लगे हैं। पिछले हफ्ते इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान की IRGC ने कतर के रास लैफान LNG कॉम्प्लेक्स सहित खाड़ी देशों में एनर्जी सेक्टर पर मिसाइलें दागीं। पार्स गैस फील्ड और रास लैफान LNG कॉम्प्लेक्स पर हुए हमलों से दुनिया पूरी तरह हिल गई। क्योंकि ये दोनों जगहें दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम हैं।
रास लैफान LNG प्लांट की वैश्विक अहमियत
कतर की राजधानी दोहा से 80 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित रास लैफान दुनिया का सबसे बड़ा LNG उत्पादन केंद्र है। यह वैश्विक LNG सप्लाई का करीब 20% हिस्सा तैयार करता है और एशिया-यूरोप के बाजारों को संतुलित रखता है। युद्ध शुरू होते ही मार्च की शुरुआत में ही कतर ने उत्पादन रोक दिया था। बुधवार के ईरानी हमले में प्लांट को भारी नुकसान हुआ।
सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी की राचेल जिएम्बा ने इस हमले को लेकर कहा कि पहले से उत्पादन रुका होने से वैश्विक सप्लाई पर उतना असर नहीं हुआ, लेकिन इससे क्षेत्रीय बिजली संकट बढ़ेगा और कच्चे तेल की कीमत में इजाफा होगा। वहीं, एक अन्य विश्लेषक ने कहा कि LNG कॉम्प्लेक्स की पूरी क्षमता लौटने में महीनों लग सकते हैं। वहीं, ईरानी हमले के चलते LNG पर निर्भर जापान, तुर्की और भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ग्लोबल साउथ के कमजोर देशों में मांग घटेगी, जिससे आर्थिक संकट गहराएगा। इस हमले के बाद कतर ने ईरानी कार्रवाई की कड़ी निंदा की, ईरानी सैन्य-राजनयिकों को पर्सोना नॉन ग्राटा करार देते हुए देश से निकाल दिया।
वहीं, ईरान ने पिछले हफ्ते सऊदी अरब के रियाद पर भी हमले किए। इन हमलों को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। वहीं, सऊदी के गैस प्लांट पर हुए ड्रोन हमले के बाद वहां काम रोक दिया गया। वहीं, UAE के अबू धाबी में हबशान गैस प्लांट और बाब ऑयल फील्ड पर भी हमले हुए।
ईरान के लिए क्या है साउथ पार्स गैस फील्ड की अहमियत
पार्स गैस फील्ड ईरान-कतर के बीच बंटा 9700 वर्ग किमी का दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। ईरान के पास एक-तिहाई हिस्सा (साउथ पार्स) है, जो देश की 80% घरेलू गैस जरूरत पूरी करता है। बिजली और घरेलू उपयोग के लिए अहम है। यहां से इराक को निर्यात भी होता है। इस पर हमले से इराक की बिजली प्रभावित हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर कम हुआ है, लेकिन ईरान की अर्थव्यवस्था को झटका लगा है।
ट्रंप की नई धमकी और सबसे खतरनाक मोड़
रविवार को ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान 48 घंटे में हॉर्मुज पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को हिट एंड ऑब्लिटरेट कर देगा। ईरान ने भी इसका जवाब दिया। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा कि हम युद्ध के मैदान में जवाब देंगे। वह अमेरिकी धमकियों से नहीं डरते हैं। IRGC ने चेताया कि अगर उसने एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया तो वह भी अमेरिका-इजराइल से जुड़ी ऊर्जा, आईटी सुविधाओं और डेसालिनेशन प्लांट्स पर हमला करेगा। ईरान ने इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर पर मिसाइल हमला कर नतांज पर हुए हमले का जवाब दिया।
अमेरिका ने ईरान को उसके ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से पहले 48 घंटे की समय सीमा दी है, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि अगर यह दांव विफल रहता है, तो ट्रंप प्रशासन ज़मीनी हमले की तैयारी कर रहा है – संभवतः खर्ग द्वीप पर स्थित साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर कब्ज़ा करने और ज़बरदस्ती हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने के लिए। ऐसे में ट्रंप की नई धमकी ने युद्ध को सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है।


