पटना हॉस्टल कांड: पीड़िता ने मां को बताई थी उस काली रात की पूरी कहानी, हॉस्टल में कैसे हुए थी दरिंदगी

पटना हॉस्टल कांड: पीड़िता ने मां को बताई थी उस काली रात की पूरी कहानी, हॉस्टल में कैसे हुए थी दरिंदगी

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा के साथ गैंग रेप मामले में पीड़िता की मां ने बड़ा खुलासा किया है। पीड़िता की मां ने पत्रकारों और पुलिस के सामने कहा कि उनकी बेटी ने मरने से पहले हॉस्टल में हुई दरिंदगी की कहानी शेयर किया था। उन्होंने कहा कि छह जनवरी को पूरे दिन पूरे दिन बेहोश थी। लेकिन रात में बेटी को होश आया था। उन्होंने कहा कि तब मैं अस्पताल में ही थी।

तोरा साथ कोई गलत करलउ हे का..?

सात जनवरी को भी मेरी बेटी होश में थी। मैंने उससे अपनी भाषा (मगही) में ही पूछा था खइबहीं…कुछ मंगवा दिव..का होलउ हे बेटी, तोरा साथ कोई गलत करलउ हे का..? यह सुनकर कर छात्रा ने पहले सिर हिलाया और फिर रोने लगी। आंखों में आंसू गिरता देख पीड़ता की मां ने कहा कि हमने अपनी बेटी से फिर पूछने का प्रयास किया। उसके बयान को हम लोग अपने मोबाइल में रिकार्ड करना चाहते थे। लेकिन अस्पताल प्रशासन हम सभी को मेरी बेटी के पास से हटा दिया। जबकि मिलने का वक्त बचा हुआ था।

अस्पताल के लोगों ने मिलने नहीं दिया

पीड़ता की मां और मामा ने कहा कि पीड़िता सात और आठ जनवरी की देर रात तक होश में थी। आठ जनवरी की देर रात वह कोमा में गई। पीड़िता की मां ने कहा कि हम लोग जब भी इस बीच अपनी बेटी से मिलने का प्रयास किया डॉक्टर हम लोगों को नहीं मिलने दे रहे थे। गर्ल्स हॉस्टल की एक संचालिका इस बीच बार-बार हम लोगों को पैसा लेकर पूरे मामले को रफा दफा करने का दबाव बना रही थी। हमने इसकी शिकायत भी नौ जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में की थी। लेकिन, पुलिस ने पीड़िता का फर्द बयान भी दर्ज किया था। पिता ने अपने बेटी के साथ दुष्कर्म की भी आशंका व्यक्त किया था। लेकिन, पुलिस ने इसकी जांच करने के बदले पूरे मामले को रफा दफा ही करने में लगी रही।

बच्ची के साथ गलत हुआ है आप लोग क्यों नहीं कुछ…

पीड़िता की मां ने कहा कि प्रभात मेमोरियल अस्पताल में काम करने वाली नर्स और जूनियर डॉक्टर ने कहा हम लोगों से कहा था कि बच्ची के साथ कुछ गलत हुआ है। सीनियर डॉक्टर ने आप लोगों को कुछ नहीं बताया क्या? मेरी मानिए आप लोग तत्काल अपनी बच्ची को लेकर यहां से किसी और अस्पताल में ले जाएं। वरण बहुत बुरा हो जायेगा। नर्स और जूनियर डॉक्टर की बात सुनने के बाद हम लोग बहुत प्रयास किए अपनी बच्ची को आठ जनवरी को किसी और अस्पताल में ले जाने का। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने डिस्चार्ज नहीं किया। रात में बच्ची के कोमा में जाने पर अस्पताल ने आनन फानन में डिस्चार्ज किया और परिवार के लोग कंकड़बाग के एक बड़े अस्पताल में ले गए। जहां पर बच्ची ने 12 जनवरी को दम तोड़ दिया।

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