जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां इलाज के लिए आया मरीज भर्ती होने के दूसरे दिन से ही गायब था। सोमवार की रात उसका शव अस्पताल कैंपस से ही बरामद किया गया। गायब होने वाले मरीज का नाम सुनील यादव है। वह बागबेड़ा के बाबाकुटी का रहने वाला था। उसका शव अस्पताल परिसर में लैब की बाउंड्री वॉल के पास कचरे के बीच पड़ा मिला। शव से तेज दुर्गंध आ रही थी। आसपास मक्खियां भिनभिना रही थीं। मृतक के हाथ में कैनुला लगा हुआ था, जिससे स्पष्ट है कि वह इलाज के दौरान ही गायब हुए थे। लोगों के अनुसार शव करीब 6-7 दिन पुराना लग रहा था। परिजनों का आरोप- हत्या कर शव फेंका गया प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरक्षाकर्मियों ने परिजनों को सूचना दी। जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि सुनील यादव की हत्या कर शव को परिसर में फेंक दिया गया है। मौके पर एमजीएम थाना पुलिस और अस्पताल अधीक्षक पहुंचे। थाना प्रभारी ने जांच का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस का कहना है कि परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर मामले की गहन जांच की जाएगी। 9 दिन तक नहीं मिला कोई सुराग मृतक के पुत्र अभय यादव ने बताया कि उनके पिता टेंपो चलाते थे। 13 मार्च को कमजोरी के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। 14 मार्च की रात उनकी मां घर लौट आई थीं। 15 मार्च की सुबह जब वे अस्पताल पहुंचे तो उनके पिता बेड से गायब थे। अटेंडर भी नहीं मिला। काफी खोजबीन के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने पर अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी गई, लेकिन 9 दिनों तक किसी ने ठोस मदद नहीं की। सीसीटीवी फुटेज में वे 14 मार्च की रात मेन गेट तक जाते दिखे, उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। घटना के बाद प्रबंधन सख्त, नए नियम लागू घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन अलर्ट मोड में आ गया है। मरीजों की सुरक्षा को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब जिन मरीजों के साथ परिजन नहीं होंगे, उन्हें नर्स की निगरानी में वॉशरूम ले जाया जाएगा। खिड़कियों में ग्रिल और स्लाइडर दरवाजों में लॉक लगाने का काम शुरू हो गया है। रात 9 बजे के बाद वार्ड से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही वॉशरूम जाने के लिए अटेंडेंट अनिवार्य किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि घटना की आंतरिक जांच भी की जा रही है। जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां इलाज के लिए आया मरीज भर्ती होने के दूसरे दिन से ही गायब था। सोमवार की रात उसका शव अस्पताल कैंपस से ही बरामद किया गया। गायब होने वाले मरीज का नाम सुनील यादव है। वह बागबेड़ा के बाबाकुटी का रहने वाला था। उसका शव अस्पताल परिसर में लैब की बाउंड्री वॉल के पास कचरे के बीच पड़ा मिला। शव से तेज दुर्गंध आ रही थी। आसपास मक्खियां भिनभिना रही थीं। मृतक के हाथ में कैनुला लगा हुआ था, जिससे स्पष्ट है कि वह इलाज के दौरान ही गायब हुए थे। लोगों के अनुसार शव करीब 6-7 दिन पुराना लग रहा था। परिजनों का आरोप- हत्या कर शव फेंका गया प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरक्षाकर्मियों ने परिजनों को सूचना दी। जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि सुनील यादव की हत्या कर शव को परिसर में फेंक दिया गया है। मौके पर एमजीएम थाना पुलिस और अस्पताल अधीक्षक पहुंचे। थाना प्रभारी ने जांच का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस का कहना है कि परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर मामले की गहन जांच की जाएगी। 9 दिन तक नहीं मिला कोई सुराग मृतक के पुत्र अभय यादव ने बताया कि उनके पिता टेंपो चलाते थे। 13 मार्च को कमजोरी के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। 14 मार्च की रात उनकी मां घर लौट आई थीं। 15 मार्च की सुबह जब वे अस्पताल पहुंचे तो उनके पिता बेड से गायब थे। अटेंडर भी नहीं मिला। काफी खोजबीन के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने पर अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी गई, लेकिन 9 दिनों तक किसी ने ठोस मदद नहीं की। सीसीटीवी फुटेज में वे 14 मार्च की रात मेन गेट तक जाते दिखे, उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। घटना के बाद प्रबंधन सख्त, नए नियम लागू घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन अलर्ट मोड में आ गया है। मरीजों की सुरक्षा को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब जिन मरीजों के साथ परिजन नहीं होंगे, उन्हें नर्स की निगरानी में वॉशरूम ले जाया जाएगा। खिड़कियों में ग्रिल और स्लाइडर दरवाजों में लॉक लगाने का काम शुरू हो गया है। रात 9 बजे के बाद वार्ड से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही वॉशरूम जाने के लिए अटेंडेंट अनिवार्य किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि घटना की आंतरिक जांच भी की जा रही है।


