विभिन्न कॉलेजों में चल रहे हैं 10 स्नातकोत्तर कोर्स पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर में शिक्षकों के सीट सैंक्शन तो हो गये हैं लेकिन अब तक स्नातकोत्तर विभाग का गठन नहीं हुआ है। अब तक विभाग बने बिना ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही थी। राज्य सरकार के द्वारा इन स्नातकोत्तर विषयों में सीटें भी सैंक्शन कर दी हैं। लेकिन जब तक विभागों का गठन नहीं किया जाता है तब तक यूजीसी के द्वारा ये विभाग मान्य नहीं होंगे। इससे नैक मान्यता में भी मुश्किल आयेगी। इसके अतिरिक्त पीएचडी कराने व अन्य तरह की तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। यूजीसी की 12बी की मान्यता व यूजीसी की नैक की मान्यता, दोनों के लिए ही विश्वविद्यालय के अंतर्गत कम से कम 15 पीजी विभागों का गठन और संचालन होना चाहिए और सीधे विवि के अधीन पीजी की पढ़ाई होनी चाहिए। बताते चलें कि विवि के अंतर्गत चलने वाले 16 पीजी विभागों के अलावा विभिन्न कॉलेजों में करीब 10 विषयों में स्नातकोत्तर चलते हैं। विश्वविद्यालय मुख्यालय व कॉलेज मिलाकर कुल 26 विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई चल रही है। विभागों के गठन के लिए शिक्षकों का किया जाएगा ट्रांसफर
विवि से मिली जानकारी के अनुसार विभागों के गठन के लिए कॉलेजों से वरीय शिक्षकों का ट्रांसफर पीजी पाठ्यक्रमों में किया जाएगा। इसके लिए कॉलेजों को सूचना भेजी गयी है, कि जो शिक्षक पीजी विभागों में पढ़ाना चाहते हैं वे आवेदन कर सकते हैं। वर्तमान में यूजी विभागों के शिक्षक ही पीजी में पढ़ा रहे हैं लेकिन प्रॉपर ट्रांसफर उनका नहीं हुआ है। वे दोनों ही जगहों पर पढ़ा रहे हैं, कॉलेज में भी और पीजी पाठ्यक्रमों में भी। जब शिक्षकों का प्रॉपर ट्रांसफर हो जाएगा तो ही समेकित रूप से पीजी विभागों का गठन हो पायेगा। इसको लेकर तैयारी चल रही है।
प्रो राजीव रंजन, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीपीयू विभिन्न कॉलेजों में चल रहे हैं 10 स्नातकोत्तर कोर्स पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर में शिक्षकों के सीट सैंक्शन तो हो गये हैं लेकिन अब तक स्नातकोत्तर विभाग का गठन नहीं हुआ है। अब तक विभाग बने बिना ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही थी। राज्य सरकार के द्वारा इन स्नातकोत्तर विषयों में सीटें भी सैंक्शन कर दी हैं। लेकिन जब तक विभागों का गठन नहीं किया जाता है तब तक यूजीसी के द्वारा ये विभाग मान्य नहीं होंगे। इससे नैक मान्यता में भी मुश्किल आयेगी। इसके अतिरिक्त पीएचडी कराने व अन्य तरह की तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। यूजीसी की 12बी की मान्यता व यूजीसी की नैक की मान्यता, दोनों के लिए ही विश्वविद्यालय के अंतर्गत कम से कम 15 पीजी विभागों का गठन और संचालन होना चाहिए और सीधे विवि के अधीन पीजी की पढ़ाई होनी चाहिए। बताते चलें कि विवि के अंतर्गत चलने वाले 16 पीजी विभागों के अलावा विभिन्न कॉलेजों में करीब 10 विषयों में स्नातकोत्तर चलते हैं। विश्वविद्यालय मुख्यालय व कॉलेज मिलाकर कुल 26 विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई चल रही है। विभागों के गठन के लिए शिक्षकों का किया जाएगा ट्रांसफर
विवि से मिली जानकारी के अनुसार विभागों के गठन के लिए कॉलेजों से वरीय शिक्षकों का ट्रांसफर पीजी पाठ्यक्रमों में किया जाएगा। इसके लिए कॉलेजों को सूचना भेजी गयी है, कि जो शिक्षक पीजी विभागों में पढ़ाना चाहते हैं वे आवेदन कर सकते हैं। वर्तमान में यूजी विभागों के शिक्षक ही पीजी में पढ़ा रहे हैं लेकिन प्रॉपर ट्रांसफर उनका नहीं हुआ है। वे दोनों ही जगहों पर पढ़ा रहे हैं, कॉलेज में भी और पीजी पाठ्यक्रमों में भी। जब शिक्षकों का प्रॉपर ट्रांसफर हो जाएगा तो ही समेकित रूप से पीजी विभागों का गठन हो पायेगा। इसको लेकर तैयारी चल रही है।
प्रो राजीव रंजन, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीपीयू


