खामोशी में गूंजता खेल के प्रति जज्बा, श्रवण बाधित खिलाड़ी दिखा रहे दमखम

खामोशी में गूंजता खेल के प्रति जज्बा, श्रवण बाधित खिलाड़ी दिखा रहे दमखम

दिनेश कुमार शर्मा

अजमेर (Ajmer news) . ये सुन नहीं सकते, लेकिन इनका जज्बा हर आवाज से कहीं ज्यादा बुलंद है। श्रवण बाधित खिलाड़ी मैदान पर चौके-छक्कों की झड़ी लगा रहे हैं और विरोधियों के विकेट चटकाकर प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। खेल के प्रति इनका जुनून और समर्पण काबिले तारीफ है, लेकिन संसाधनों और प्रोत्साहन के अभाव में इनकी प्रतिभा सीमित दायरे में सिमटी है। यदि समुचित सरकारी सहयोग और उचित मंच मिले, तो यह खिलाड़ी देश के लिए पदकों की झड़ी लगा सकते हैं।

विभिन्न जिलों से आए करीब 75 खिलाड़ी

अजमेर में गत दिनों तीसरा सेंट्रल जोन बधिर क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया। पांच दिवसीय इस प्रतियोगिता में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार की टीम ने हिस्सा लिया। विभिन्न जिलों से आए करीब 75 खिलाड़ी, कोच, मैनेजर, अंपायर और इंटरप्रेटर सहित लगभग 100 लोग इसमें शामिल हुए। इन्हें फव्वारा सर्कल स्थित बड़ाधड़ा की नसियां में ठहराया गया।

तीन लाख रुपए से अधिक पहुंच गया कुल खर्च

सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय की ओर से खेल मैदान नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया है। आयोजन समिति ने बेट-बॉल, ट्रेक सूट, मेडल, ट्रॉफी, स्मृति चिह्न और 5 दिन तक चाय-नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई है। परिवहन, ठहराव, भोजन और खेल सामग्री सहित कुल खर्च तीन लाख रुपए से अधिक पहुंच गया है।

प्रायोजक कंपनियों और भामाशाहों का सहयोग

इसमें करीब 50 हजार रुपए भोजन, 40 हजार ठहरने, 25 हजार खेल किट और 75 हजार रुपए पुरस्कार राशि पर खर्च किए गए हैं। विजेता टीम को 35 हजार और उपविजेता को 25 हजार नकद पुरस्कार के साथ ट्रॉफी दी जाएगी, जबकि बेस्ट बॉलर और बेस्ट बैट्समैन को दो-दो हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे। समिति ने यह व्यवस्थाएं प्रायोजक कंपनियों और भामाशाहों के सहयोग से संभाली हैं।

राजस्थान ने ​खिताबी जीत हासिल की

प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला राजस्थान व मध्य प्रदेश की टीम के बीच खेला गया। इसमें राजस्थान ने ​खिताबी जीत हासिल की। इससे पूर्व सेमीफाइनल में राजस्थान ने बिहार और मध्य प्रदेश ने उत्तर प्रदेश की टीम को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।

इनका कहना है…

संस्था के दो धड़े हो गए हैं। दोनों में सहमति बने तो सरकार से सहायता मिल सकती है। खेल मंत्रालय को आवेदन किया, लेकिन बीसीसीआई से सम्पर्क करने को कहा गया है।

– बलराज मुनोत, अध्यक्ष, ऑल इंडिया क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ द डेफ

श्रवण बाधित (सुनने में अक्षम) लोगों को मंच मिले तो वे भी देश के लिए मेडल ला सकते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल समेत अन्य खेल प्रतियोगिताओं के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए।

– सूरज कुमार तेजी, अध्यक्ष, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ द डेफ

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