गयाजी में धूमधाम से निकाली गई पार्श्वनाथ की रथयात्रा:जैन धर्म के 23वें तीर्थकर हैं; 1928 में शुरू की गई थी परंपरा, 5 दिनों तक होंगे अनुष्ठान

गयाजी में धूमधाम से निकाली गई पार्श्वनाथ की रथयात्रा:जैन धर्म के 23वें तीर्थकर हैं; 1928 में शुरू की गई थी परंपरा, 5 दिनों तक होंगे अनुष्ठान

माघ शुक्ल नवमी के अवसर पर मंगलवार को गया शहर एक बार फिर जैन आस्था के रंग में रंगा दिखा। बहुआर चौराहा स्थित प्राचीन जैन मंदिर से जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर 1008 भगवान पार्श्वनाथ की वार्षिक शोभायात्रा पूरे गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और राजशाही ठाठ के साथ निकाली गई। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए जैन समाज के साथ-साथ शहरवासियों की भी भीड़ जुटी। शोभायात्रा बहुआर चौराहा से शुरू होकर नादरागंज, कोयरीबारी, पीरमंसूर मोड़, जीबी रोड, कोतवाली चौक, धामी टोला, वजीर अली रोड, गोल पत्थर, केपी रोड, ला रोड और बजाज रोड होते हुए रमना स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भक्ति भाव से जयकारे लगाते आगे बढ़ते रहे। “जय बोलो त्रिशला नंदन की”, “जय बोलो महावीर की” और “जियो और जीने दो” के नारे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। जैन समाज के पूर्वजों ने शुरू की थी परंपरा शोभायात्रा में शामिल जैन समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं। रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आरती उतारी और पुष्प वर्षा की। रमना स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर भगवान का जैन परंपरा के अनुसार पवित्र जल से महामस्तकाभिषेक किया गया। इसके बाद विशेष आराधना और विनती की गई। जैन समाज के मीडिया प्रभारी मुन्ना सरकार और सह मीडिया प्रभारी अर्पित पाटनी ने बताया कि गया में भगवान पार्श्वनाथ की यह वार्षिक शोभायात्रा वर्ष 1928 से निरंतर निकाली जा रही है। यह परंपरा जैन समाज के पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी, जो पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है। उनके अनुसार, इस वर्ष की शोभायात्रा भी भव्यता और आस्था के लिहाज से विशेष रही। रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में 5 दिनों तक होंगे अनुष्ठान रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में अगले पांच दिनों तक प्रतिदिन महामस्तकाभिषेक, शांति धारा का पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे। जैन धर्म में माघ शुक्ल नवमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि आत्म शुद्धि, संयम, उपवास और अहिंसा की साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, शनिवार को दिगंबर जैन मंदिर से रथयात्रा पुनः विभिन्न मार्गों से होते हुए बहुआर चौराहा जैन मंदिर पहुंचेगी। इसके साथ ही वार्षिक शोभायात्रा का समापन होगा। माघ शुक्ल नवमी के अवसर पर मंगलवार को गया शहर एक बार फिर जैन आस्था के रंग में रंगा दिखा। बहुआर चौराहा स्थित प्राचीन जैन मंदिर से जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर 1008 भगवान पार्श्वनाथ की वार्षिक शोभायात्रा पूरे गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और राजशाही ठाठ के साथ निकाली गई। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए जैन समाज के साथ-साथ शहरवासियों की भी भीड़ जुटी। शोभायात्रा बहुआर चौराहा से शुरू होकर नादरागंज, कोयरीबारी, पीरमंसूर मोड़, जीबी रोड, कोतवाली चौक, धामी टोला, वजीर अली रोड, गोल पत्थर, केपी रोड, ला रोड और बजाज रोड होते हुए रमना स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भक्ति भाव से जयकारे लगाते आगे बढ़ते रहे। “जय बोलो त्रिशला नंदन की”, “जय बोलो महावीर की” और “जियो और जीने दो” के नारे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। जैन समाज के पूर्वजों ने शुरू की थी परंपरा शोभायात्रा में शामिल जैन समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं। रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आरती उतारी और पुष्प वर्षा की। रमना स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर भगवान का जैन परंपरा के अनुसार पवित्र जल से महामस्तकाभिषेक किया गया। इसके बाद विशेष आराधना और विनती की गई। जैन समाज के मीडिया प्रभारी मुन्ना सरकार और सह मीडिया प्रभारी अर्पित पाटनी ने बताया कि गया में भगवान पार्श्वनाथ की यह वार्षिक शोभायात्रा वर्ष 1928 से निरंतर निकाली जा रही है। यह परंपरा जैन समाज के पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी, जो पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है। उनके अनुसार, इस वर्ष की शोभायात्रा भी भव्यता और आस्था के लिहाज से विशेष रही। रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में 5 दिनों तक होंगे अनुष्ठान रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में अगले पांच दिनों तक प्रतिदिन महामस्तकाभिषेक, शांति धारा का पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे। जैन धर्म में माघ शुक्ल नवमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि आत्म शुद्धि, संयम, उपवास और अहिंसा की साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, शनिवार को दिगंबर जैन मंदिर से रथयात्रा पुनः विभिन्न मार्गों से होते हुए बहुआर चौराहा जैन मंदिर पहुंचेगी। इसके साथ ही वार्षिक शोभायात्रा का समापन होगा।  

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