पेरेंटिंग- हम जल्द ही मम्मी-पापा बनने वाले हैं:खुशी तो है, लेकिन थोड़ा डर भी है, अच्छा पेरेंट बनने के लिए सबसे जरूरी क्या है?

पेरेंटिंग- हम जल्द ही मम्मी-पापा बनने वाले हैं:खुशी तो है, लेकिन थोड़ा डर भी है, अच्छा पेरेंट बनने के लिए सबसे जरूरी क्या है?

सवाल- मैं अहमदाबाद से हूं। मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं। जल्द ही हम पेरेंट बनने वाले हैं। जाहिर है, इस कारण हमारी एंग्जाइटी भी थोड़ी बढ़ी हुई है। हम पेरेंटिंग पर तमाम किताबें पढ़ रहे हैं, पॉडकास्ट सुन रहे हैं। हालांकि ये सब पढ़ना-सुनना और कनफ्यूज कर रहा है। क्या आप हमें कुछ बेसिक टिप्स दे सकते हैं कि हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सबसे पहले आप दोनों को इस नई यात्रा के लिए बहुत बधाई। पढ़कर खुशी हुई कि आप इस नई जिम्मेदारी से पहले खुद को तैयार कर रहे हैं। अवेयरनेस ही अच्छी पेरेंटिंग की पहली सीढ़ी है। सबसे पहले तो ये समझिए कि जब बच्चा दुनिया में आता है तो उसे सुख-सुविधाओं वाले पेरेंट्स से ज्यादा हैप्पी पेरेंट्स की जरूरत होती है। माता-पिता का खुश रहना ही बच्चे के लिए सबसे खूबसूरत तोहफा है। वियतनामी बौद्ध भिक्षु और मशहूर राइटर तिक न्यात हन्ह ने अपनी किताब ‘फिडिलिटी: हाउ टू क्रिएट लविंग रिलेशनशिप दैट लास्ट्स’ में इस बारे में लिखा है- पेरेंटिंग की जिम्मेदारी किताबें पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना अच्छी बात है, क्योंकि ये हमें दिशा देते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि पेरेंटिंग की असली नींव किसी ट्रेंड या तकनीक पर नहीं, बल्कि घर के माहौल पर टिकी होती है। बच्चा सबसे पहले अपने आसपास के वातावरण से ही सीखता है। अच्छी पेरेंटिंग कोई हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग करना या सुपर मॉम-डैड होना नहीं है। पेरेंट होने की जो एकदम बेसिक जिम्मेदारी है, वो है बच्चे को अनकंडीशनल प्यार और सिक्योरिटी देना। जरूरी बेसिक जिम्मेदारियां नीचे ग्राफिक्स में देखिए- अगर ये बुनियादी जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार हैं, तो आप हैप्पी पेरेंट्स बनेंगे। बच्चे के आने से पहले खुद को कैसे तैयार करें? अक्सर हम बच्चे के आने की तैयारी कपड़ों, खिलौनों और कमरे की सजावट से करते हैं। लेकिन भावनात्मक तैयारी को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पेरेंटिंग की असली शुरुआत बच्चे के जन्म से पहले हमारी सोच, हमारे रिश्ते और हमारे धैर्य से हो जाती है। ऐसे में नए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे खुद को मानसिक रूप से तैयार करें। यह समझें कि पेरेंटिंग कोई परफॉर्मेंस नहीं है, बल्कि यह सीखने की निरंतर प्रक्रिया है। आप जितने मजबूत और संतुलित होंगे, बच्चे को उतना ही सुरक्षित और खुशहाल माहौल दे पाएंगे। इस तैयारी को आसान बनाने के लिए यह छोटी-सी चेकलिस्ट मददगार हो सकती है- आइए, इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं। इमोशनली तैयार रहें पेरेंटिंग सिर्फ फिजिकल नहीं, इमोशनल जिम्मेदारी भी है। बच्चे के आने के बाद आपकी नींद, रूटीन और प्राथमिकताएं बदलती हैं। अगर आप मानसिक रूप से तैयार रहेंगे तो बदलाव को स्वीकार करना आसान होगा और बच्चे को ज्यादा स्थिर माहौल दे पाएंगे। अपने रिश्ते में मधुरता रखें बच्चे बड़े होते हुए पेरेंट्स के रिश्ते को देखते और महसूस करते हैं। अगर घर में आपसी सम्मान और प्यार है तो वही उनके व्यवहार में भी झलकता है। पार्टनर के साथ स्वस्थ और संतुलित रिश्ता बनाए रखना पेरेंटिंग का अहम हिस्सा है। सुनने की आदत डालें अक्सर पेरेंट्स बच्चों को समझाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं, उन्हें सुनने पर कम। लेकिन एक अच्छा पेरेंट वही है, जो बच्चे की बातों, भावनाओं और छोटे-छोटे एक्सप्रेशंस को ध्यान से समझे। इससे बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी बात मायने रखती है। इसलिए अभी से सुनने की आदत डालें। धैर्य का अभ्यास करें बच्चे तुरंत नहीं सीखते, वे धीरे-धीरे समझते हैं। एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं। ऐसे में गुस्सा करने की बजाय धैर्य रखना जरूरी है। आपका शांत-सरल व्यवहार ही बच्चे को सही मार्गदर्शन देता है। गलतियां स्वीकारना सीखें कोई भी पेरेंट परफेक्ट नहीं होता। अगर गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें। इससे बच्चा भी अपनी गलतियों को स्वीकारना सीखता है और रिश्ते में भरोसा बढ़ता है। पेरेंटिंग को ‘प्रोजेक्ट’ न समझें पेरेंटिंग कोई टास्क या प्रोजेक्ट नहीं है, जिसे परफेक्ट तरीके से पूरा करना है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें सीखना, समझना और बदलना शामिल है। खुद पर परफेक्शन का दबाव डालने से आप और बच्चा दोनों तनाव में आ सकते हैं। परिवार के लिए समय निकालें क्वालिटी टाइम बच्चे की इमोशनल ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। दिन में कुछ समय निकालकर बच्चे के साथ जरूर बताएं। यही क्वालिटी टाइम माता-पिता और बच्चे की बॉन्डिंग को मजबूत बनाता है। स्क्रीन टाइम कम करें ज्यादा स्क्रीन टाइम न सिर्फ बच्चों, बल्कि पेरेंट्स के व्यवहार को भी प्रभावित करता है। अगर आप खुद स्क्रीन में व्यस्त रहेंगे तो बच्चे के साथ कनेक्शन कम होगा। इसलिए टेक्नोलॉजी का संतुलित उपयोग करें। जरूरत पर काउंसलर की मदद लें अगर कभी लगे कि आप स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हैं तो काउंसलर की मदद लेने में न हिचकिचाएं। समय पर सही मार्गदर्शन लेना ही समझदारी है। बच्चे के लिए ‘सेफ स्पेस’ बनें पेरेंटिंग सिर्फ जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे को भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जब आप बच्चे को अनकंडीशनल लव देते हैं तो बच्चा सेफ महसूस करता है। बच्चे को ऐसा महसूस होना चाहिए कि- पेरेंट्स बनने के बाद न करें ये गलतियां बच्चे के जन्म के बाद जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। नई जिम्मेदारियां, नई चिंताएं और कई बार अनजाने डर भी पेरेंट्स के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अनजाने में कई गलतियां हो जाती हैं, जिनका असर बच्चे की पर्सनैलिटी और इमोशनल ग्रोथ पर पड़ सकता है। याद रखें, बच्चा पेरेंट्स के माध्यम से दुनिया को समझता है। इसलिए जरूरी है कि हम उसे सहज प्यार दें। संतुलित और सजग पेरेंटिंग के लिए जरूरी है कि ये गलतियां न करें- अंत में यही कहूंगी कि पेरेंटिंग की बुनियाद किसी तकनीक या ट्रेंड में नहीं, बल्कि आपके घर के माहौल पर निर्भर है। इस जर्नी में जिद, गुस्सा और तनाव जैसे कई चैलेंजेस आएंगे। याद रखें, ये यात्रा आसान नहीं होगी। इसमें ढेरों सैक्रीफाइस होंगे, लेकिन इसमें खुशी और संतोष भी उतना ही होगा। पेरेंटिंग एक यात्रा है, प्रोजेक्ट नहीं। इसमें सीखना, गिरना, संभलना और फिर आगे बढ़ना सबकुछ शामिल है। ……………………… पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे समझाएं 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

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