पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने जेल से बाहर आने के बाद दावा किया कि पटना, दिल्ली और उनके संसदीय क्षेत्र पूर्णिया के कुछ बड़े नेता मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। जिसके बाद जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक पीसी में पप्पू यादव को ‘राजनीति का कायर’ कहते हुए बोला कि अगर उन्हें अपनी हत्या की साजिश की इतनी जानकारी है, तो वे उन नेताओं के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहे हैं? अगर 3 बड़े नेता आपकी जान के पीछे पड़े हैं, तो उनके नाम बताइए। डर क्यों रहे हैं? सिर्फ हवा में आरोप लगाना राजनीतिक नौटंकी है। कहा कि जो व्यक्ति खुद को इतना निडर बताता था कि ‘लॉरेंस बिश्नोई’ की धमकियों से भी नहीं डरता, वह आज कुछ नेताओं का नाम लेने में क्यों कांप रहा है? यह उनकी कायरता और दोहरे चरित्र को उजागर करता है। वे सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं। जेल-जमानत पर ‘नाटक’ का आरोप नीरज कुमार ने पप्पू यादव के जेल जाने और बाहर आने के तरीके पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने इसे ‘बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा नाटक’ बताया है। कहा कि जब भी पप्पू यादव को जेल जाना होता है, वे अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं। कमर-पेट में असहनीय दर्द की शिकायत करते हैं, स्ट्रेचर पर लेट जाते हैं और रोने लगते हैं। जैसे ही अदालत से जमानत मिलती है और वे जेल से बाहर निकलते हैं, उनका सारा दर्द गायब हो जाता है। वे व्हीलचेयर छोड़कर सीधे विमान पकड़ने निकल पड़ते हैं।
जिस पर हत्या-रंगदारी के मुकदमे हों, उन्हें सवाल उठाने का अधिकार नहीं जदयू नेता ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति पर डकैती, हत्या, अपहरण, रंगदारी, धोखाधड़ी और दंगे जैसे गंभीर मामलों में दर्जनों मुकदमे दर्ज हों, उसे दूसरों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं। रूपेश हत्याकांड जैसे मामलों में पप्पू यादव इतने समय तक चुप क्यों रहे? क्या वे पर्दे के पीछे किसी तरह की सौदेबाजी कर रहे थे? पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने जेल से बाहर आने के बाद दावा किया कि पटना, दिल्ली और उनके संसदीय क्षेत्र पूर्णिया के कुछ बड़े नेता मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। जिसके बाद जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक पीसी में पप्पू यादव को ‘राजनीति का कायर’ कहते हुए बोला कि अगर उन्हें अपनी हत्या की साजिश की इतनी जानकारी है, तो वे उन नेताओं के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहे हैं? अगर 3 बड़े नेता आपकी जान के पीछे पड़े हैं, तो उनके नाम बताइए। डर क्यों रहे हैं? सिर्फ हवा में आरोप लगाना राजनीतिक नौटंकी है। कहा कि जो व्यक्ति खुद को इतना निडर बताता था कि ‘लॉरेंस बिश्नोई’ की धमकियों से भी नहीं डरता, वह आज कुछ नेताओं का नाम लेने में क्यों कांप रहा है? यह उनकी कायरता और दोहरे चरित्र को उजागर करता है। वे सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं। जेल-जमानत पर ‘नाटक’ का आरोप नीरज कुमार ने पप्पू यादव के जेल जाने और बाहर आने के तरीके पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने इसे ‘बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा नाटक’ बताया है। कहा कि जब भी पप्पू यादव को जेल जाना होता है, वे अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं। कमर-पेट में असहनीय दर्द की शिकायत करते हैं, स्ट्रेचर पर लेट जाते हैं और रोने लगते हैं। जैसे ही अदालत से जमानत मिलती है और वे जेल से बाहर निकलते हैं, उनका सारा दर्द गायब हो जाता है। वे व्हीलचेयर छोड़कर सीधे विमान पकड़ने निकल पड़ते हैं।
जिस पर हत्या-रंगदारी के मुकदमे हों, उन्हें सवाल उठाने का अधिकार नहीं जदयू नेता ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति पर डकैती, हत्या, अपहरण, रंगदारी, धोखाधड़ी और दंगे जैसे गंभीर मामलों में दर्जनों मुकदमे दर्ज हों, उसे दूसरों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं। रूपेश हत्याकांड जैसे मामलों में पप्पू यादव इतने समय तक चुप क्यों रहे? क्या वे पर्दे के पीछे किसी तरह की सौदेबाजी कर रहे थे?


