31 साल पुराने मामले में पटना सिविल कोर्ट ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया है। देर रात उन्हें पटना के बेऊर जेल में लाया गया। वहां एंट्री होने के बाद इलाज के लिए उन्हें PMCH लाया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट का पहला सवाल था- कहां हैं? पप्पू यादव, सामने लाइए.. इसपर सांसद के वकील ने जवाब दिया- हुजूर तबीयत खराब है, अस्पताल से ला रहे हैं। कोर्ट में पप्पू यादव के वकील ने उनके बचाव मे तर्क दिया कि पप्पू यादव को जमानत दे दी जाए। वहीं, विरोधी पक्ष के वकील सांसद को जेल भेजने की अपील कर रहे थे। तमाम दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पप्पू यादव को ज्यूडिशियल कस्टडी में बेउर भेजने का फैसला लिया। पप्पू यादव ने किस मकान पर कब्जा किया था? कोर्ट में उन्हें कैसे ले जाया गया? कितनी तारीख से पप्पू यादव कोर्ट नहीं पहुंचे थे और अदालत में क्या तर्क वितर्क हुए पढ़िए… कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान मौजूद रहे पप्पू यादव के वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया कि विरोधी पक्ष पप्पू यादव की रिमांड की अर्जी लगा रहा था। जबकि ऐसे मामलों में रिमांड की मांग अमूमन नहीं की जाती है। अब जानिए कोर्ट में क्या-क्या हुआ सबसे पहले विरोधी पक्ष (सरकारी वकील) ने जज के सामने मामले को पेश किया। कोर्ट ने पूछा: कहां हैं पप्पू यादव सामने लाइए पप्पू यादव के वकील: हुजूर बाहर एंबुलेंस में हैं। स्लाइन चढ़ रहा है। कोर्ट: कैसी भी स्थिति हो, यहां सामने लाइए वकील: जी हुजूर… इसके बाद पप्पू यादव को अंदर लाया गया। कोर्ट: ठीक है, देख लिया। वकील: हुजूर आज ही सरेंडर करने वाले थे। इसी बीच पुलिस को कहीं से भनक लग गई और रात में ये लोग पकड़ लिया। कोर्ट: तो पहले सरेंडर क्यों नहीं किया था? वकील: सर, सांसद हैं, कहां जायेंगे पप्पू जी। बेल यहीं से दे दी जाए। तबीयत ठीक नहीं है। सरकारी वकील: हुजूर पूरी तरह से फिट हैं। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर आए हैं। इनको जेल भेजा जाए। इन्हें रिमांड पर लेंगे। पप्पू यादव के वकील: हुजूर स्थिति ठीक नहीं है। कुछ भी हो सकता है। मेडिकल ऑब्जर्वेशन में हॉस्पिटल में रखा जाए। सरकारी वकील: नहीं… नहीं कोर्ट: मेडिकल पेपर लाइए। पप्पू यादव के वकील ने इसके बाद पप्पू यादव के मेडिकल पेपर को कोर्ट के सामने रखा। इस पर कोर्ट ने विचार करते हुए ज्यूडिशल कस्टडी में भेजने का आदेश दे दिया। अब वो विवाद पढ़िए, जिसमें पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई पप्पू यादव 1994 में पहली बार सांसद बनने के बाद पटना आए थे। उस समय उनकी तूती बोल रही थी। सांसद ने गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर स्थित पुनाइचक इलाके में समर्थकों के जरिए एक फ्लैट किराए पर लिया गया था। पप्पू यादव ने यह कहकर फ्लैट लिया था कि वह अपने परिवार के साथ वहां रहेंगे, लेकिन बाद में उसी फ्लैट में उन्होंने अपना दफ्तर खोल लिया। दफ्तर में लगातार लोगों के आने-जाने से मकान मालिक मनोज बिहारी लाल को परेशानी होने लगी। हालात ऐसे बन गए थे कि मकान मालिक ने पप्पू यादव से घर खाली करने का आग्रह किया, लेकिन पप्पू यादव के प्रभाव के चलते उनकी बात नहीं मानी गई। समर्थकों ने भी फ्लैट खाली करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मकान मालिक ने गर्दनीबाग थाने में केस दर्ज कराया। 18 अक्टूबर 1995 को यह मामला कोर्ट में आया। तब से यह केस लंबित है। इस मामले में पप्पू यादव ने नियमित जमानत ले रखी थी। कोरोना काल से पहले तक पप्पू यादव तारीखों पर कोर्ट में पेश होते रहे, लेकिन उनके वकील के मुताबिक 8 जनवरी 2020 से 22 अगस्त 2024 के बीच केस का रिकॉर्ड मिस-प्लेस हो गया, जिसके कारण पैरवी नहीं हो सकी। इस दौरान करीब 40 से अधिक तारीखें पड़ीं, लेकिन पप्पू यादव की ओर से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। 40 से अधिक तारीख पर नहीं पहुंचे इन 4 सालों में हर महीने औसतन 1 तारीख के हिसाब से करीब 40 से अधिक सुनवाई की तारीखों पर पप्पू यादव कोर्ट में पेश नहीं हुए। बाद में यह मामला ACJM-9 की अदालत से ट्रांसफर होकर MP-MLA मामलों की विशेष अदालत ACJM-1 में हो गया। उस समय मामले में गवाही चल रही थी, लेकिन इसके बावजूद पप्पू यादव कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।लगातार अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने 29 जुलाई 2025 को उनकी जमानत बॉन्ड रद्द करने को लेकर समन जारी किया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2025 को नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी करने के लिए समन किया गया। इसके बावजूद पप्पू यादव के कोर्ट में पेश नहीं होने पर 16 अक्टूबर 2025 को अदालत ने उनके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी कर दिया। कानून और पुलिस की नजर में फरार रहे पप्पू 16 अक्टूबर 2025 से 6 फरवरी 2026 तक यानी 4 महीने से अधिक समय से पप्पू यादव पटना पुलिस और कानून की नजर में फरार थे। हालांकि पप्पू यादव लाइव भी रहे, पटना और जहनाबाद में सार्वजनिक तौर पर प्रोटेस्ट भी किया। सदन की कार्यवाही में भी रहे। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… पप्पू यादव को बेल मिलेगी या जेल में मनेगी होली:आधी रात को गिरफ्तार करने क्यों पहुंची पटना पुलिस, गिरफ्तारी के पीछे कौन है आधी रात 40-50 पुलिसकर्मियों की टीम पटना के मंदिरी मोहल्ले के उस घर में पहुंची जहां पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव रहते हैं। 31 साल पुराने एक धोखाधड़ी केस गिरफ्तार किया। कानूनन दिखने वाली इस गिरफ्तारी की टाइमिंग ऐसी है कि राजनीति खत्म नहीं हो रही। ठीक उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब पप्पू पटना की NEET छात्रा रेप-मर्डर केस में सबसे तेज आवाज थे। संसद में सवाल, पटना की सड़कों पर मार्च, मंत्री के बेटे पर आरोप। पूरी खबर पढ़ें… 31 साल पुराने मामले में पटना सिविल कोर्ट ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया है। देर रात उन्हें पटना के बेऊर जेल में लाया गया। वहां एंट्री होने के बाद इलाज के लिए उन्हें PMCH लाया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट का पहला सवाल था- कहां हैं? पप्पू यादव, सामने लाइए.. इसपर सांसद के वकील ने जवाब दिया- हुजूर तबीयत खराब है, अस्पताल से ला रहे हैं। कोर्ट में पप्पू यादव के वकील ने उनके बचाव मे तर्क दिया कि पप्पू यादव को जमानत दे दी जाए। वहीं, विरोधी पक्ष के वकील सांसद को जेल भेजने की अपील कर रहे थे। तमाम दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पप्पू यादव को ज्यूडिशियल कस्टडी में बेउर भेजने का फैसला लिया। पप्पू यादव ने किस मकान पर कब्जा किया था? कोर्ट में उन्हें कैसे ले जाया गया? कितनी तारीख से पप्पू यादव कोर्ट नहीं पहुंचे थे और अदालत में क्या तर्क वितर्क हुए पढ़िए… कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान मौजूद रहे पप्पू यादव के वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया कि विरोधी पक्ष पप्पू यादव की रिमांड की अर्जी लगा रहा था। जबकि ऐसे मामलों में रिमांड की मांग अमूमन नहीं की जाती है। अब जानिए कोर्ट में क्या-क्या हुआ सबसे पहले विरोधी पक्ष (सरकारी वकील) ने जज के सामने मामले को पेश किया। कोर्ट ने पूछा: कहां हैं पप्पू यादव सामने लाइए पप्पू यादव के वकील: हुजूर बाहर एंबुलेंस में हैं। स्लाइन चढ़ रहा है। कोर्ट: कैसी भी स्थिति हो, यहां सामने लाइए वकील: जी हुजूर… इसके बाद पप्पू यादव को अंदर लाया गया। कोर्ट: ठीक है, देख लिया। वकील: हुजूर आज ही सरेंडर करने वाले थे। इसी बीच पुलिस को कहीं से भनक लग गई और रात में ये लोग पकड़ लिया। कोर्ट: तो पहले सरेंडर क्यों नहीं किया था? वकील: सर, सांसद हैं, कहां जायेंगे पप्पू जी। बेल यहीं से दे दी जाए। तबीयत ठीक नहीं है। सरकारी वकील: हुजूर पूरी तरह से फिट हैं। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर आए हैं। इनको जेल भेजा जाए। इन्हें रिमांड पर लेंगे। पप्पू यादव के वकील: हुजूर स्थिति ठीक नहीं है। कुछ भी हो सकता है। मेडिकल ऑब्जर्वेशन में हॉस्पिटल में रखा जाए। सरकारी वकील: नहीं… नहीं कोर्ट: मेडिकल पेपर लाइए। पप्पू यादव के वकील ने इसके बाद पप्पू यादव के मेडिकल पेपर को कोर्ट के सामने रखा। इस पर कोर्ट ने विचार करते हुए ज्यूडिशल कस्टडी में भेजने का आदेश दे दिया। अब वो विवाद पढ़िए, जिसमें पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई पप्पू यादव 1994 में पहली बार सांसद बनने के बाद पटना आए थे। उस समय उनकी तूती बोल रही थी। सांसद ने गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर स्थित पुनाइचक इलाके में समर्थकों के जरिए एक फ्लैट किराए पर लिया गया था। पप्पू यादव ने यह कहकर फ्लैट लिया था कि वह अपने परिवार के साथ वहां रहेंगे, लेकिन बाद में उसी फ्लैट में उन्होंने अपना दफ्तर खोल लिया। दफ्तर में लगातार लोगों के आने-जाने से मकान मालिक मनोज बिहारी लाल को परेशानी होने लगी। हालात ऐसे बन गए थे कि मकान मालिक ने पप्पू यादव से घर खाली करने का आग्रह किया, लेकिन पप्पू यादव के प्रभाव के चलते उनकी बात नहीं मानी गई। समर्थकों ने भी फ्लैट खाली करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मकान मालिक ने गर्दनीबाग थाने में केस दर्ज कराया। 18 अक्टूबर 1995 को यह मामला कोर्ट में आया। तब से यह केस लंबित है। इस मामले में पप्पू यादव ने नियमित जमानत ले रखी थी। कोरोना काल से पहले तक पप्पू यादव तारीखों पर कोर्ट में पेश होते रहे, लेकिन उनके वकील के मुताबिक 8 जनवरी 2020 से 22 अगस्त 2024 के बीच केस का रिकॉर्ड मिस-प्लेस हो गया, जिसके कारण पैरवी नहीं हो सकी। इस दौरान करीब 40 से अधिक तारीखें पड़ीं, लेकिन पप्पू यादव की ओर से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। 40 से अधिक तारीख पर नहीं पहुंचे इन 4 सालों में हर महीने औसतन 1 तारीख के हिसाब से करीब 40 से अधिक सुनवाई की तारीखों पर पप्पू यादव कोर्ट में पेश नहीं हुए। बाद में यह मामला ACJM-9 की अदालत से ट्रांसफर होकर MP-MLA मामलों की विशेष अदालत ACJM-1 में हो गया। उस समय मामले में गवाही चल रही थी, लेकिन इसके बावजूद पप्पू यादव कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।लगातार अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने 29 जुलाई 2025 को उनकी जमानत बॉन्ड रद्द करने को लेकर समन जारी किया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2025 को नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी करने के लिए समन किया गया। इसके बावजूद पप्पू यादव के कोर्ट में पेश नहीं होने पर 16 अक्टूबर 2025 को अदालत ने उनके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी कर दिया। कानून और पुलिस की नजर में फरार रहे पप्पू 16 अक्टूबर 2025 से 6 फरवरी 2026 तक यानी 4 महीने से अधिक समय से पप्पू यादव पटना पुलिस और कानून की नजर में फरार थे। हालांकि पप्पू यादव लाइव भी रहे, पटना और जहनाबाद में सार्वजनिक तौर पर प्रोटेस्ट भी किया। सदन की कार्यवाही में भी रहे। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… पप्पू यादव को बेल मिलेगी या जेल में मनेगी होली:आधी रात को गिरफ्तार करने क्यों पहुंची पटना पुलिस, गिरफ्तारी के पीछे कौन है आधी रात 40-50 पुलिसकर्मियों की टीम पटना के मंदिरी मोहल्ले के उस घर में पहुंची जहां पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव रहते हैं। 31 साल पुराने एक धोखाधड़ी केस गिरफ्तार किया। कानूनन दिखने वाली इस गिरफ्तारी की टाइमिंग ऐसी है कि राजनीति खत्म नहीं हो रही। ठीक उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब पप्पू पटना की NEET छात्रा रेप-मर्डर केस में सबसे तेज आवाज थे। संसद में सवाल, पटना की सड़कों पर मार्च, मंत्री के बेटे पर आरोप। पूरी खबर पढ़ें…


