पापा ने कहा था- चलो मम्मी के पास चलते हैं:5 बच्चों समेत खुद पत्नी की साड़ी से लगाई फांसी, 4 की मौत, 2 बेटे बचे

पापा ने कहा था- चलो मम्मी के पास चलते हैं:5 बच्चों समेत खुद पत्नी की साड़ी से लगाई फांसी, 4 की मौत, 2 बेटे बचे

‘हमने दिन में खाना नहीं खाया। जिद की तो पापा अंडा ले आए। सभी एक साथ बैठकर खा रहे थे तभी पापा ने पूछा तुम लोगों को मम्मी कि याद नहीं आती? चलो मम्मी के पास चलते हैं। सभी एक साथ मर जाते हैं।’ 7 साल के शिवम ने यह बात अपनी बुआ को बताई। इसने अपनी आंखों से अपने पापा और 3 बहनों को मरते देखा है। किसी तरह छोटे भाई चंदन को बचा सका। घटना मुजफ्फरपुर के सकरा थाना के नवलपुर मिश्रोलिया गांव की है। सोमवार अहले सुबह यहां अमरनाथ राम नाम के व्यक्ति ने अपने 5 बच्चों के साथ फांसी लगाई। 3 बेटी के साथ वह मर गया। उसके 2 बेटे जिंदा बच गए। एक पिता क्यों अपने बच्चों के साथ जान देने को विवश हुआ। उसके दो बेटों की जान कैसे बची? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… जिंदा बच्चों को लगा सदमा, डर इतना कि बोल नहीं रहे घटना के बाद हम (भास्कर रिपोर्टर) नवलपुर मिश्रोलिया गांव पहुंचे। यहां पूरा सन्नाटा था। सभी लोग इसी बात कि चर्चा कर रहे थे कि आज तक इलाके में ऐसी घटना नहीं घटी। अगर उसे पैसे की तंगी थी तो कहता, हमलोग मदद करते। सबसे पहले हम मृतक अमरनाथ राम के दरवाजे पर पहुंचे। घर पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी थे। गांव के लोग भी जुटे थे। भीड़ के बीच में 2 बच्चे (शिवम और अभिराज उर्फ चंदन) बैठे थे। अपने सामने पिता और बहनों की मौत देखने वाले दोनों बच्चों को गहरा सदमा लगा है। इतना अधिक डर गए हैं कि बोल नहीं रहे। जिस कमरे में सभी फंदे से झूले, उस तरफ मुंह करते ही रोना शुरू कर देते थे। अमरनाथ ने पत्नी की साड़ी से फंदा बनाया था। उसने 3 बेटियों की गर्दन टाइट बांधी ताकि बच नहीं सकें। डर था कि जिंदा बच गईं तो कौन देखभाल करेगा। 2 बेटों की गर्दन हल्की बांधी। दोनों बच गए। हमने बात करने की कोशिश की तो कांपने लगे बच्चे हमने दोनों बच्चों से बात करने कि कोशिश की। पूछा घटना कैसे घटी, लेकिन वे कुछ बोल न सके। डर से थर-थर कांपने लगे। कुछ देर बार जिला प्रशासन के अधिकारी दोनों को अंबेडकर आवास ले गए। परिवार में किसी के नहीं बचने और नाबालिग होने के चलते बच्चों को अंबेडकर आवास ले जाया गया। दूसरे कमरे में कंबल में छिपे थे जिंदा बचे बच्चे घर के बाहर मृतक अमरनाथ की बहन रेखा देवी बिलख-बिलख कर रो रही थीं। हमने उनसे घटना को लेकर बात की। रेखा देवी ने बताया, ‘सोमवार सुबह 5.00 बजे मेरे छोटे भाई शिवनाथ राम ने फोन किया। कहा कि अमरनाथ अपने बच्चों के साथ फांसी लगाकर मर गया है। उसके साथ उसकी तीनों बेटियां मर गईं हैं। इतना सुनते ही मेरे होश उड़ गए, मैं रोने-चिल्लाने लगी। भागे-भागे यहां पहुंची।’ उन्होंने कहा, ‘दरवाजे पर आई तो पुलिस और लोगों की भीड़ थी। घर के अंदर कमरे में गई तो देखा कि भाई साड़ी के फंदे से लटका है। उसके साथ उसकी तीन बेटियां भी लटकी थी। मेरे सामने सभी को फंदे से उतारा गया। जिंदा बचे दोनों बच्चे दूसरे कमरे में कंबल में छिपे थे। मैं उनसे मिली तो दोनों कांप रहे थे।’ पापा ने कहा था- चलो मम्मी के पास चलते हैं रेखा देवी ने कहा, ‘शिवम ने बताया कि दिन में खाना नहीं खाया था। रात में पापा आए तो जिद की कि अंडा खाना है। पापा अंडा लेकर आए। अंडा और चावल बना। हम सभी एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे। खाते समय पापा ने कहा तुम लोगों को मम्मी कि याद नहीं आती। चलो मम्मी के पास चलते हैं। सभी एक साथ मर जाते हैं। उसके बाद डर से किसी ने कुछ नहीं बोला।’ ‘मां से माफी मांगकर पापा ने हम सबको ट्रंक से कूदने को कहा’
रेखा देवी ने कहा, ‘शिवम ने बताया, सोमवार सुबह करीब चार बजे पापा शौच के लिए गए। लौटने के बाद सभी भाई-बहनों को जगाया। ट्रंक खोलकर मां की साड़ी निकाली। पापा ने हम पांचों के गले में साड़ी से फंदा डाला। ट्रंक पर चढ़ने को कहा। छत से फंदा लटकाया।’
’मां की तस्वीर की ओर देख प्रणाम किया। हम सब से भी प्रणाम कराया। मां से माफी मांगी। फिर कहा- ट्रंक से कूद जाओ। तीनों बहनें पापा के साथ झटके से कूद गईं।’ कैसे बची शिवम और अभिराज की जान? रेखा देवी ने बताया, ‘घर के अंदर 2 कमरे हैं। एक कमरे में सभी सोते थे, दूसरा कमरा छोटे भाई का है। वह खाली रहता था। छोटा भाई बाहर कमाता है। सभी छोटे भाई के कमरे में लटके मिले।’ जैसा कि शिवम ने रेखा देवी को बताया, अमरनाथ एक-एक कर सभी को उस कमरे से बुलाकर लाया और फंदे से लटका दिया। बाद में खुद भी लटक गया। शिवम और उसका छोटा भाई अभिराज लटका तो दोनों के पैर से नीचे बक्सा आ गया। इससे शिवम बच गया। उसने अपने गले में डाले गए फंदे को खोला। इसके बाद छोटे भाई को भी बचा लिया। दोनों घर के बाहर आकार चिल्लाए कि पापा ने फांसी लगा ली है, सबको लटका दिया है। हाथ टूटने के बाद नहीं मिल रहा था काम रेखा देवी ने बताया कि अमरनाथ को पैसे की तंगी थी। मजदूरी करता था। काम के दौरान छत से गिरने के चलते उसका बायां हाथ टूट गया था। इसके बाद से उससे भारी काम नहीं होते थे। काम नहीं मिलता था। रेखा देवी ने कहा, ‘भाभी (अमरनाथ की पत्नी) जिंदा थी तो काम कर कुछ कमा लेती थी। इससे परिवार चलता था। उसे अपेंडिक्स की शिकायत थी। 10 महीना पहले गंभीर रूप से बीमार हुई तो पैसे की तंगी के चलते इलाज नहीं हो सका। वह मर गई। इसके बाद अमरनाथ की परेशानी बढ़ गई थी। वह बच्चों के लिए खाना तक नहीं जुटा पाता था। कई-कई दिन घर में चूल्हा नहीं जलता था।’ हमने अमरनाथ के मौसेरे भाई सुरेश राम से बात की। उन्होंने बताया, ‘पत्नी कि मौत के बाद अमरनाथ बहुत परेशान था। वह सही से काम भी नहीं कर पाता था। इसके चलते उसे मजदूरी का काम नहीं मिलता था। पैसे कि परेशानी थी। बच्चों को पालने में भी दिक्कत होती थी। हालांकि उसने कभी नहीं बताया कि परेशान है। मैंने कई बार कहा कि अपने बच्चों को हमारे पास भेज दो। वे यहीं रहेंगे, पढ़ेंगे, लेकिन वह अपने बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं था।’ अमरनाथ को थी नशे की लत, कमाता तो शराब पी जाता पड़ोसी सत्यनारायण ठाकुर ने बताया, ‘अमरनाथ हमेशा परेशान रहता था। पत्नी एक कबाड़ के दुकान में काम करती थी। वही घर चलाती थी। उसकी मौत के बाद अमरनाथ की हालत और खराब हो गई। कई बार कहता था कि पत्नी नहीं है, बच्चियां बड़ी हो रही हैं। इसको कैसे पालूंगा। कहीं काम भी नहीं मिलता।’ पड़ोसी कृष्णा कुमार ने बताया, ‘अमरनाथ ठीक आदमी था, लेकिन हालात के आगे मजबूर हो गया। पत्नी की मौत के बाद डिप्रेशन में चला गया था। उसकी पत्नी कमाती थी तो घर चलता था। यह भी मजदूरी करता था। पत्नी गंभीर रूप से बीमार पड़ी तो इलाज के भी पैसे नहीं थे। अपनी परेशानी किसी से नहीं बताता था। इसके बच्चे खुद्दार थे। दूसरे लोग खाना देते तो नहीं लेते थे।’ पड़ोसी बिरन राम ने कहा, ‘मैं ऑटो चलाता हूं। सुबह चार बजे उठा था। हल्ला हुआ तो पहुंचा। उसने बच्चों के गले में फंदा लगा दिया था। कम जगह में कूदने के चक्कर में दो बच्चे चौकी पर कूदे। 7 साल के उसके बड़े लड़के ने अपने गले में लगे फंदे को खोल दिया और छोटे भाई के फंदे को भी खोला। अमरनाथ ठीक से काम भी नहीं करता था। सुबह चौक पर चला जाता था। कभी काम किया, कभी नहीं किया। उसे नशे की भी लत थी।’ 10 साल से सरकारी आवास के लिए कार्यालय का चक्कर काट रहा था अमरनाथ राम की शादी 14 साल पहले हुई थी। परिवार बढ़ने पर रहने की जगह कम पड़ने लगी। उसके पिता को मिले इंदिरा आवास से दो कमरे बने थे। आर्थिक तंगी के कारण कमरे में दरवाजा नहीं लग सका। छत एसबेस्टस की थी। उसी में पूरा परिवार रहता था। परिजनों के अनुसार, अमरनाथ पिछले 10 साल से मुखिया और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काट रहा था। लेकिन उसे सरकारी आवास नहीं मिला। बेटियों के बड़े होने पर परेशानी और बढ़ गई थी। अधिकारियों ने बताया कि छह माह पहले पीएम आवास योजना के तहत सर्वे हुआ था। इसमें अमरनाथ राम का नाम शामिल था। —————- इसे भी पढ़िए… ‘सोना कहां है,बताओ…वरना बेटियों को उठा लेंगे’:जमुई में ज्वेलर्स परिवार को बंधक बनाकर 66 लाख की डकैती; 2 घंटे की दहशत की कहानी ‘3 लुटेरे रविवार रात 12 बजे घर में घुसे। हमलोगों से कहने लगे सब कोई अपना-अपना मुंह ढंक लो नहीं तो गोली मार देंगे। इसके बाद मम्मी से कहने लगे, कहां-कहां सोना रखा है जल्दी बता दो। अगर नहीं बताई तो फिर बेटियों को उठाकर ले जाएंगे।’ 2 घंटे बंधक बनाकर 66 लाख लूट लिए। पूरी खबर पढ़ें। ‘हमने दिन में खाना नहीं खाया। जिद की तो पापा अंडा ले आए। सभी एक साथ बैठकर खा रहे थे तभी पापा ने पूछा तुम लोगों को मम्मी कि याद नहीं आती? चलो मम्मी के पास चलते हैं। सभी एक साथ मर जाते हैं।’ 7 साल के शिवम ने यह बात अपनी बुआ को बताई। इसने अपनी आंखों से अपने पापा और 3 बहनों को मरते देखा है। किसी तरह छोटे भाई चंदन को बचा सका। घटना मुजफ्फरपुर के सकरा थाना के नवलपुर मिश्रोलिया गांव की है। सोमवार अहले सुबह यहां अमरनाथ राम नाम के व्यक्ति ने अपने 5 बच्चों के साथ फांसी लगाई। 3 बेटी के साथ वह मर गया। उसके 2 बेटे जिंदा बच गए। एक पिता क्यों अपने बच्चों के साथ जान देने को विवश हुआ। उसके दो बेटों की जान कैसे बची? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… जिंदा बच्चों को लगा सदमा, डर इतना कि बोल नहीं रहे घटना के बाद हम (भास्कर रिपोर्टर) नवलपुर मिश्रोलिया गांव पहुंचे। यहां पूरा सन्नाटा था। सभी लोग इसी बात कि चर्चा कर रहे थे कि आज तक इलाके में ऐसी घटना नहीं घटी। अगर उसे पैसे की तंगी थी तो कहता, हमलोग मदद करते। सबसे पहले हम मृतक अमरनाथ राम के दरवाजे पर पहुंचे। घर पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी थे। गांव के लोग भी जुटे थे। भीड़ के बीच में 2 बच्चे (शिवम और अभिराज उर्फ चंदन) बैठे थे। अपने सामने पिता और बहनों की मौत देखने वाले दोनों बच्चों को गहरा सदमा लगा है। इतना अधिक डर गए हैं कि बोल नहीं रहे। जिस कमरे में सभी फंदे से झूले, उस तरफ मुंह करते ही रोना शुरू कर देते थे। अमरनाथ ने पत्नी की साड़ी से फंदा बनाया था। उसने 3 बेटियों की गर्दन टाइट बांधी ताकि बच नहीं सकें। डर था कि जिंदा बच गईं तो कौन देखभाल करेगा। 2 बेटों की गर्दन हल्की बांधी। दोनों बच गए। हमने बात करने की कोशिश की तो कांपने लगे बच्चे हमने दोनों बच्चों से बात करने कि कोशिश की। पूछा घटना कैसे घटी, लेकिन वे कुछ बोल न सके। डर से थर-थर कांपने लगे। कुछ देर बार जिला प्रशासन के अधिकारी दोनों को अंबेडकर आवास ले गए। परिवार में किसी के नहीं बचने और नाबालिग होने के चलते बच्चों को अंबेडकर आवास ले जाया गया। दूसरे कमरे में कंबल में छिपे थे जिंदा बचे बच्चे घर के बाहर मृतक अमरनाथ की बहन रेखा देवी बिलख-बिलख कर रो रही थीं। हमने उनसे घटना को लेकर बात की। रेखा देवी ने बताया, ‘सोमवार सुबह 5.00 बजे मेरे छोटे भाई शिवनाथ राम ने फोन किया। कहा कि अमरनाथ अपने बच्चों के साथ फांसी लगाकर मर गया है। उसके साथ उसकी तीनों बेटियां मर गईं हैं। इतना सुनते ही मेरे होश उड़ गए, मैं रोने-चिल्लाने लगी। भागे-भागे यहां पहुंची।’ उन्होंने कहा, ‘दरवाजे पर आई तो पुलिस और लोगों की भीड़ थी। घर के अंदर कमरे में गई तो देखा कि भाई साड़ी के फंदे से लटका है। उसके साथ उसकी तीन बेटियां भी लटकी थी। मेरे सामने सभी को फंदे से उतारा गया। जिंदा बचे दोनों बच्चे दूसरे कमरे में कंबल में छिपे थे। मैं उनसे मिली तो दोनों कांप रहे थे।’ पापा ने कहा था- चलो मम्मी के पास चलते हैं रेखा देवी ने कहा, ‘शिवम ने बताया कि दिन में खाना नहीं खाया था। रात में पापा आए तो जिद की कि अंडा खाना है। पापा अंडा लेकर आए। अंडा और चावल बना। हम सभी एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे। खाते समय पापा ने कहा तुम लोगों को मम्मी कि याद नहीं आती। चलो मम्मी के पास चलते हैं। सभी एक साथ मर जाते हैं। उसके बाद डर से किसी ने कुछ नहीं बोला।’ ‘मां से माफी मांगकर पापा ने हम सबको ट्रंक से कूदने को कहा’
रेखा देवी ने कहा, ‘शिवम ने बताया, सोमवार सुबह करीब चार बजे पापा शौच के लिए गए। लौटने के बाद सभी भाई-बहनों को जगाया। ट्रंक खोलकर मां की साड़ी निकाली। पापा ने हम पांचों के गले में साड़ी से फंदा डाला। ट्रंक पर चढ़ने को कहा। छत से फंदा लटकाया।’
’मां की तस्वीर की ओर देख प्रणाम किया। हम सब से भी प्रणाम कराया। मां से माफी मांगी। फिर कहा- ट्रंक से कूद जाओ। तीनों बहनें पापा के साथ झटके से कूद गईं।’ कैसे बची शिवम और अभिराज की जान? रेखा देवी ने बताया, ‘घर के अंदर 2 कमरे हैं। एक कमरे में सभी सोते थे, दूसरा कमरा छोटे भाई का है। वह खाली रहता था। छोटा भाई बाहर कमाता है। सभी छोटे भाई के कमरे में लटके मिले।’ जैसा कि शिवम ने रेखा देवी को बताया, अमरनाथ एक-एक कर सभी को उस कमरे से बुलाकर लाया और फंदे से लटका दिया। बाद में खुद भी लटक गया। शिवम और उसका छोटा भाई अभिराज लटका तो दोनों के पैर से नीचे बक्सा आ गया। इससे शिवम बच गया। उसने अपने गले में डाले गए फंदे को खोला। इसके बाद छोटे भाई को भी बचा लिया। दोनों घर के बाहर आकार चिल्लाए कि पापा ने फांसी लगा ली है, सबको लटका दिया है। हाथ टूटने के बाद नहीं मिल रहा था काम रेखा देवी ने बताया कि अमरनाथ को पैसे की तंगी थी। मजदूरी करता था। काम के दौरान छत से गिरने के चलते उसका बायां हाथ टूट गया था। इसके बाद से उससे भारी काम नहीं होते थे। काम नहीं मिलता था। रेखा देवी ने कहा, ‘भाभी (अमरनाथ की पत्नी) जिंदा थी तो काम कर कुछ कमा लेती थी। इससे परिवार चलता था। उसे अपेंडिक्स की शिकायत थी। 10 महीना पहले गंभीर रूप से बीमार हुई तो पैसे की तंगी के चलते इलाज नहीं हो सका। वह मर गई। इसके बाद अमरनाथ की परेशानी बढ़ गई थी। वह बच्चों के लिए खाना तक नहीं जुटा पाता था। कई-कई दिन घर में चूल्हा नहीं जलता था।’ हमने अमरनाथ के मौसेरे भाई सुरेश राम से बात की। उन्होंने बताया, ‘पत्नी कि मौत के बाद अमरनाथ बहुत परेशान था। वह सही से काम भी नहीं कर पाता था। इसके चलते उसे मजदूरी का काम नहीं मिलता था। पैसे कि परेशानी थी। बच्चों को पालने में भी दिक्कत होती थी। हालांकि उसने कभी नहीं बताया कि परेशान है। मैंने कई बार कहा कि अपने बच्चों को हमारे पास भेज दो। वे यहीं रहेंगे, पढ़ेंगे, लेकिन वह अपने बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं था।’ अमरनाथ को थी नशे की लत, कमाता तो शराब पी जाता पड़ोसी सत्यनारायण ठाकुर ने बताया, ‘अमरनाथ हमेशा परेशान रहता था। पत्नी एक कबाड़ के दुकान में काम करती थी। वही घर चलाती थी। उसकी मौत के बाद अमरनाथ की हालत और खराब हो गई। कई बार कहता था कि पत्नी नहीं है, बच्चियां बड़ी हो रही हैं। इसको कैसे पालूंगा। कहीं काम भी नहीं मिलता।’ पड़ोसी कृष्णा कुमार ने बताया, ‘अमरनाथ ठीक आदमी था, लेकिन हालात के आगे मजबूर हो गया। पत्नी की मौत के बाद डिप्रेशन में चला गया था। उसकी पत्नी कमाती थी तो घर चलता था। यह भी मजदूरी करता था। पत्नी गंभीर रूप से बीमार पड़ी तो इलाज के भी पैसे नहीं थे। अपनी परेशानी किसी से नहीं बताता था। इसके बच्चे खुद्दार थे। दूसरे लोग खाना देते तो नहीं लेते थे।’ पड़ोसी बिरन राम ने कहा, ‘मैं ऑटो चलाता हूं। सुबह चार बजे उठा था। हल्ला हुआ तो पहुंचा। उसने बच्चों के गले में फंदा लगा दिया था। कम जगह में कूदने के चक्कर में दो बच्चे चौकी पर कूदे। 7 साल के उसके बड़े लड़के ने अपने गले में लगे फंदे को खोल दिया और छोटे भाई के फंदे को भी खोला। अमरनाथ ठीक से काम भी नहीं करता था। सुबह चौक पर चला जाता था। कभी काम किया, कभी नहीं किया। उसे नशे की भी लत थी।’ 10 साल से सरकारी आवास के लिए कार्यालय का चक्कर काट रहा था अमरनाथ राम की शादी 14 साल पहले हुई थी। परिवार बढ़ने पर रहने की जगह कम पड़ने लगी। उसके पिता को मिले इंदिरा आवास से दो कमरे बने थे। आर्थिक तंगी के कारण कमरे में दरवाजा नहीं लग सका। छत एसबेस्टस की थी। उसी में पूरा परिवार रहता था। परिजनों के अनुसार, अमरनाथ पिछले 10 साल से मुखिया और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काट रहा था। लेकिन उसे सरकारी आवास नहीं मिला। बेटियों के बड़े होने पर परेशानी और बढ़ गई थी। अधिकारियों ने बताया कि छह माह पहले पीएम आवास योजना के तहत सर्वे हुआ था। इसमें अमरनाथ राम का नाम शामिल था। —————- इसे भी पढ़िए… ‘सोना कहां है,बताओ…वरना बेटियों को उठा लेंगे’:जमुई में ज्वेलर्स परिवार को बंधक बनाकर 66 लाख की डकैती; 2 घंटे की दहशत की कहानी ‘3 लुटेरे रविवार रात 12 बजे घर में घुसे। हमलोगों से कहने लगे सब कोई अपना-अपना मुंह ढंक लो नहीं तो गोली मार देंगे। इसके बाद मम्मी से कहने लगे, कहां-कहां सोना रखा है जल्दी बता दो। अगर नहीं बताई तो फिर बेटियों को उठाकर ले जाएंगे।’ 2 घंटे बंधक बनाकर 66 लाख लूट लिए। पूरी खबर पढ़ें।  

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