राजस्थान में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले मुफ्त प्रवेश को लेकर इस वर्ष नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा विभाग ने आवेदन प्रक्रिया में पैन कार्ड की कॉपी अनिवार्य दस्तावेजों में शामिल कर दी है। साथ ही आय प्रमाण-पत्र में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर प्रवेश निरस्त करने, दोगुनी फीस वसूलने और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी जारी की गई है।
विभाग का तर्क है कि यह व्यवस्था फर्जी आवेदनों पर रोक लगाने के लिए लागू की गई है। सूत्रों के अनुसार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में पैन कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज बनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। आरटीई प्रवेश सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू हो चुकी थी और 4 मार्च अंतिम तिथि रखी गई थी। अब चयन के लिए 6 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब राशन कार्ड, आधार कार्ड, आय प्रमाण-पत्र और निवास प्रमाण-पत्र के साथ पैन कार्ड की कॉपी भी मांगी जा रही है। आय प्रमाण-पत्र ई-मित्र से जारी मानक प्रारूप में होना आवश्यक है तथा वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपए से कम तय की गई है।
गरीब अभिभावकों के पास पैन कार्ड नहीं होता
राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश बिश्नोई खारा ने इस प्रावधान का विरोध करते हुए कहा कि यह गरीब परिवारों के लिए बाधा बन सकता है। अधिकांश गरीब अभिभावकों के पास पैन कार्ड नहीं होता, ऐसे में हजारों बच्चे प्रवेश से वंचित रह सकते हैं। उनका कहना है कि यदि फर्जी आय प्रमाण-पत्र की शिकायतें हैं तो समाधान पारदर्शी जांच व्यवस्था से किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आरटीई प्रवेश के लिए पैन कार्ड अनिवार्य नहीं है। ऐसे में राजस्थान का यह प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए नई समस्या बन सकता है।


