गोंडा जिले के सोनबरसा में शुक्रवार को अपना दल (कमेरावादी) द्वारा मंडलीय समता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल और सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और सोनेलाल पटेल की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. पल्लवी पटेल ने शिक्षा के क्षेत्र में महंगी फीस और किताबों को नियंत्रित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग की। उन्होंने यूजीसी विनियमों को तत्काल लागू करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अस्तित्व देने वाला कमेरा समाज ही है, जो देश के 125 करोड़ लोगों का पेट भरता है। आरोप लगाया कि वर्तमान सरकारें कमेरा समाज के हितों पर डाका डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, जो समाज को सबसे मजबूत बनाती है, उसे धीरे-धीरे छीना जा रहा है, जिससे कमेरा समाज का अस्तित्व खत्म करने का प्रयास हो रहा है। शिक्षित लोगों के अवसर छीने जा रहे हैं, जबकि मंचों से कमेरा समाज को देश का आधार बताया जाता है, लेकिन हिस्सेदारी देने की बात आते ही उनके अधिकारों पर कुठाराघात किया जाता है। लखनऊ में यूजीसी विनियम लागू करने के आंदोलन में कम उपस्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोगों ने खेत में पानी देने, पशुओं को चारा खिलाने या रिश्तेदारी में जाने जैसे कारण बताए। उन्होंने पूछा कि क्या एक दिन खेत में पानी न देने से फसल बर्बाद हो जाती है, या एक दिन चारा न देने से पशु मर जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने नहीं आए। उन्होंने कहा कि यदि लोग लखनऊ जाकर सड़कों पर उतरते और आंदोलन करते, तो जिस सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर यूजीसी विनियम पर रोक लगाई है, वही उसे लागू करने का आदेश भी दे सकता था। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2014 और 2019 में जनता ने भरोसा किया, लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर किन परिस्थितियों में दोबारा सत्ता सौंपी गई। उन्होंने कहा कि अगर अब भी लोग नहीं चेते तो भविष्य में सम्मान बचाना मुश्किल हो जाएगा। संघर्ष सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर होता है और वे यूजीसी विनियम लागू कराने के लिए आंदोलन जारी रखेंगी। महंगी शिक्षा पर क्या बोलीं पल्लवी पटेल
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. पल्लवी पटेल ने कहा कि महंगी शिक्षा और महंगी किताबें केवल उन लोगों के लिए हैं, जो पढ़ पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई जाए, जो सरकारी और निजी संस्थानों दोनों पर लागू हो। फीस वृद्धि पर सीमा तय हो और अभिभावकों को किसी विशेष स्थान से किताब खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। सरकार और पंचायत चुनाव पर भी साधा निशाना
यूजीसी विनियम पर रोक के दौरान सरकारी वकील के विरोध न करने पर उन्होंने कहा कि 75 साल में यह पहली बार है जब इतना कमजोर विनियम बनाया गया, जिसे सरकार का पक्ष रखने वाला भी अदालत में मजबूती से नहीं रख सका। पंचायत चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कमेरा समाज को उसका अधिकार नहीं मिल रहा है, उसकी शिक्षा और अवसर छीने जा रहे हैं और विकास के नाम पर उसकी जमीन तक कब्जाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत चुनाव टाल रही है, क्योंकि गांव और कस्बों में उसके खिलाफ माहौल बन रहा है और उसे हार का डर सता रहा है। गठबंधन और सरकार पर भी टिप्पणी
डीजल, पेट्रोल और गैस सिलेंडर की समस्या पर उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल दावे करती है। जब अपने सहयोगियों का साथ नहीं दे पा रही, तो आम जनता का क्या साथ देगी। गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि देश की राजनीति दो ध्रुवों—एनडीए और इंडिया—के बीच चल रही है। ऐसे में गठबंधन की राजनीति ही वर्तमान स्वरूप है और फिलहाल उनका फोकस जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर है।


