Afghanistan Ban Pakistan Medicines अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पड़ोसी पाकिस्तान से आयातित दवाओं पर सख्त फैसला लिया है। 9 फरवरी 2026 के बाद पाकिस्तान से आयात की गई कोई भी दवा अफगानिस्तान में नहीं बेची जा सकेगी और न ही कस्टम्स के माध्यम से प्रोसेस की जाएगी। काबुल के पझवोक न्यूज ने वित्त मंत्रालय (एमओएफ) के हवाले से बताया कि इस फैसले के लागू होने में सिर्फ 19 दिन बचे हैं। व्यापारियों से अपील की गई है कि वे इस अवधि में सभी पेंडिंग कमर्शियल लेनदेन पूरा कर लें।
तालीबान ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका
यह घोषणा 13 नवंबर 2025 के फैसले का हिस्सा है, जब एमओएफ ने उप-प्रधानमंत्री (आर्थिक मामलों) मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के निर्देश पर तीन महीने की समयसीमा तय की थी। बरादर ने पाकिस्तानी दवाओं को ‘निम्न गुणवत्ता वाली’ बताते हुए व्यापारियों से वैकल्पिक मार्गों (भारत, ईरान, मध्य एशिया) की तलाश करने का आह्वान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद ने बार-बार व्यापार मार्ग बंद कर कमर्शियल मामलों का राजनीतिकरण किया, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ।
सीमा तनाव और व्यापार प्रभाव
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध डूरंड लाइन विवाद के कारण लगातार बिगड़ रहे हैं। 2,600 किमी लंबी सीमा पर कई झड़पें हुईं, जिसमें 11 अक्टूबर 2025 को भीषण गोलीबारी शामिल है। तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे मध्यस्थों की कोशिशें नाकाम रहीं। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की असहयोगी रवैया के कारण तुर्की में बातचीत विफल हुई। पाकिस्तान ने तुर्कहम और चमन जैसे प्रमुख क्रॉसिंग बंद कर दिए, जिससे अफगान बाजारों में दवाओं की कीमतें आसमान छू गईं।
अब भारत से खरीदेगा दवा
अफगानिस्तान अपनी 70% से अधिक दवाएं पाकिस्तान से आयात करता था, क्योंकि कराची और ग्वादर बंदरगाहों तक पहुंच आसान थी। अब यह बंदी दवा संकट पैदा कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी दवाएं ज्यादातर नकली या असरहीन हैं। अफगानिस्तान अब भारत से आयात बढ़ा रहा है, जहां दवाएं सस्ती और बेहतर बताई जा रही हैं। भारतीय कंपनियों ने अफगानिस्तान के साथ बड़े अनुबंध किए हैं।
पाकिस्तानी फार्मा उद्योग को करोड़ों का नुकसान
यह कदम अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को और गहरा करेगा। अफगानिस्तान लैंडलॉक्ड होने के कारण पाकिस्तान पर निर्भर था, लेकिन अब स्वतंत्र व्यापार नीति अपनाकर वैकल्पिक रूट तलाश रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तानी फार्मा उद्योग को करोड़ों का नुकसान होगा, जबकि अफगान नागरिकों को दवाओं की कमी का सामना करना पड़ सकता है।


