मुस्लिम बाहुल इलाके में नहीं चला ओवैसी का सिक्का, ISLAM पार्टी बनाएगी अपना मेयर; जानें कैसे पलट गई बाजी

मुस्लिम बाहुल इलाके में नहीं चला ओवैसी का सिक्का, ISLAM पार्टी बनाएगी अपना मेयर; जानें कैसे पलट गई बाजी

Malegaon Mayor Election: मुंबई में मेयर कौन होगा, सभी की इस पर निगाहें टिकी हुई हैं। लेकिन मालेगांव नगर निगम में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी का सिक्का नहीं चला है। मालेगांव में 78 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन इस बार नगर निगम का सियासी गेम पूरी तरह बदल गया है। दरअसल, यहां के लोगों ने महायुति और महाविकास अघाड़ी से अलग राह चुनी है। 

मालेगांव में बन रहा ISLAM का मेयर

बता दें कि मालेगांव नगर निगम में इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM) पार्टी ने 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। अब यहां पर मेयर भी ISLAM पार्टी का होगा। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मुख्य विपक्षी होगी। 

कांग्रेस को नहीं मिला मुसलमानों का साथ

मालेगांव में आजादी के बाद से अब तक चुनावों में मालेगांव में मुसलमान कांग्रेस को वोट देते आए हैं। लेकिन इस बार स्थानीय निकाय चुनाव में मुसलमानों का मिजाज बदला हुआ नजर आया और कांग्रेस की जगह ISLAM पार्टी को वोट दिए। बता दें कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी यहां पर मुस्लिमों ने कांग्रेस को वोट दिया था। 

क्या है मालेगांव का समीकरण?

मुस्लिम बाहुल मालेगांव नगर पालिका में 84 सीटें हैं, जिसमें से इस्लाम ने 35 सीटों पर कब्जा जमाया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 21 सीटें जीती हैं। समाजवादी पार्टी ने 5, शिवसेना ने 18, कांग्रेस ने 3 और बीजेपी को महज दो सीटें मिली हैं। यहां पर इस्लाम और सपा मिलकर अपना मेयर बना रही हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। 

2024 में बनी थी इस्लाम पार्टी

ISLAM पार्टी का पूरा नाम है- इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM)। यह पार्टी 2024 में बनाई गई थी। इसका गठन पूर्व विधायक शेख आसिफ ने किया था ताकि वह महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विकल्प पेश कर सकें। हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपनी छाप नहीं छोड़ पाई थी। 

ISLAM पार्टी क्यों बनाई गई?

शेख आसिफ ने यह पार्टी इसलिए बनाई क्योंकि वह कांग्रेस और फिर एनसीपी के साथ अपने अनुभवों के बाद खुश नहीं थे। उनका कहना था कि अब एक ऐसा मंच होना चाहिए जो धर्मनिरपेक्ष रूप से सबकी बात करे और विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के हितों को भी आवाज़ दे।

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