केंद्र और राज्य सरकार का बजट आने वाला है। इस पर भागलपुर के सबौर इलाके के किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं। ये क्षेत्र कृषि पर पूरी तरह निर्भर है। किसानों का कहना है कि अगर इस बार बजट में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा। सबौर प्रखंड के अधिकांश किसान सब्जी, धान, गेहूं और मौसमी फसलों की खेती करते हैं, लेकिन सिंचाई और बाजार की उचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मेहनत के अनुरूप फायदा नहीं मिल पा रहा है। किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा सिंचाई व्यवस्था को लेकर है। सबौर क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में खेत बारिश के भरोसे हैं। बगल से गंगा नदी के एक धार जरूर गुजरती है, लेकिन वह भी सूख जाती है। सिंचाई करने से लागत बढ़ जाती किसान धनंजय मंडल बताते हैं कि मोटर और डीजल पंप के सहारे सिंचाई करने से लागत काफी बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में किसान सरकार से स्थायी और सस्ती सिंचाई व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। दूसरी बड़ी समस्या बाजार से जुड़ी हुई है। किसान कौशल मंडल ने बताया कि सब्जियों और अन्य फसलों के लिए स्थानीय स्तर पर कोई सशक्त और स्थायी बाजार नहीं है, जहां वे अपनी उपज को उचित दाम पर बेच सकें। मंडी तक फसल ले जाने में परिवहन खर्च बढ़ जाता है और बिचौलियों की मनमानी के कारण किसानों को सही मूल्य नहीं मिल पाता। कई बार सब्जियों के दाम इतने गिर जाते हैं कि फसल खेत में ही बर्बाद करनी पड़ती है। MSP की गारंटी की मांग कर रहे किसान इसके साथ ही किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग भी जोर शोर से उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार MSP की घोषणा तो करती है, लेकिन उसकी कानूनी गारंटी नहीं होने के कारण व्यापारी उस दर पर खरीद नहीं करते। अगर MSP की गारंटी कानून के तहत दी जाए, तो किसानों को फसल का न्यूनतम सुरक्षित मूल्य मिल सकेगा और वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे। सबौर के किसानों को उम्मीद है कि इस बार बजट में सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण कृषि बाजारों के विकास और MSP गारंटी जैसे अहम मुद्दों पर ठोस प्रावधान किए जाएंगे। किसानों सुनील ने बताया कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देती है, तो न सिर्फ खेती मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार का बजट आने वाला है। इस पर भागलपुर के सबौर इलाके के किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं। ये क्षेत्र कृषि पर पूरी तरह निर्भर है। किसानों का कहना है कि अगर इस बार बजट में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा। सबौर प्रखंड के अधिकांश किसान सब्जी, धान, गेहूं और मौसमी फसलों की खेती करते हैं, लेकिन सिंचाई और बाजार की उचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मेहनत के अनुरूप फायदा नहीं मिल पा रहा है। किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा सिंचाई व्यवस्था को लेकर है। सबौर क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में खेत बारिश के भरोसे हैं। बगल से गंगा नदी के एक धार जरूर गुजरती है, लेकिन वह भी सूख जाती है। सिंचाई करने से लागत बढ़ जाती किसान धनंजय मंडल बताते हैं कि मोटर और डीजल पंप के सहारे सिंचाई करने से लागत काफी बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में किसान सरकार से स्थायी और सस्ती सिंचाई व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। दूसरी बड़ी समस्या बाजार से जुड़ी हुई है। किसान कौशल मंडल ने बताया कि सब्जियों और अन्य फसलों के लिए स्थानीय स्तर पर कोई सशक्त और स्थायी बाजार नहीं है, जहां वे अपनी उपज को उचित दाम पर बेच सकें। मंडी तक फसल ले जाने में परिवहन खर्च बढ़ जाता है और बिचौलियों की मनमानी के कारण किसानों को सही मूल्य नहीं मिल पाता। कई बार सब्जियों के दाम इतने गिर जाते हैं कि फसल खेत में ही बर्बाद करनी पड़ती है। MSP की गारंटी की मांग कर रहे किसान इसके साथ ही किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग भी जोर शोर से उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार MSP की घोषणा तो करती है, लेकिन उसकी कानूनी गारंटी नहीं होने के कारण व्यापारी उस दर पर खरीद नहीं करते। अगर MSP की गारंटी कानून के तहत दी जाए, तो किसानों को फसल का न्यूनतम सुरक्षित मूल्य मिल सकेगा और वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे। सबौर के किसानों को उम्मीद है कि इस बार बजट में सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण कृषि बाजारों के विकास और MSP गारंटी जैसे अहम मुद्दों पर ठोस प्रावधान किए जाएंगे। किसानों सुनील ने बताया कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देती है, तो न सिर्फ खेती मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।


