‘हमारी बेटी 8वीं मंजिल से फेंकी गई, हत्यारा कौन?’:मां बोली- हमने बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया, होली का हमारी जिंदगी में कोई रंग नहीं

‘हमारी बेटी 8वीं मंजिल से फेंकी गई, हत्यारा कौन?’:मां बोली- हमने बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया, होली का हमारी जिंदगी में कोई रंग नहीं

‘मेरी बेटी बड़े उत्साह से होली का त्योहार मनाती थी। परिवार के लोग इकट्ठा होकर होली खेलते थे। वह तो चली गई। अब हमारी जिंदगी में होली का कोई रंग नहीं बचा। हमारी तो दुनिया उजड़ गई। मोदी-नीतीश कहते हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। क्या इस दिन के लिए बेटी को बचाएं और पढ़ाएं कि कोई उसे मार दे। बड़े नेता की बेटी होती तो पुलिस अब तक सबूत खोज लेती। गरीब की बेटी को इंसाफ नहीं मिलता।’ इतना कहते-कहते उस मां की आंखें बरस पड़ती हैं, जिसने 12 फरवरी 2026 को अपनी होनहार बेटी खो दी। पटना के फुलवारी शरीफ में कोचिंग में पढ़ने गई 12वीं की छात्रा की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई थी। वह कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग के छत से गिरी या फेंकी गई, पुलिस इसकी जांच कर रही है। होली से पहले हम पीड़ित परिवार के पास पहुंचे। उनका दर्द जाना। मृतक छात्रा के परिवार के लोग किस हाल में जी रहे हैं? मां क्या गुहार लगा रही हैं? पुलिस की जांच पर क्या कहती हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। खौफ में परिवार, घर का कोई बच्चा पढ़ने नहीं जाता 12 फरवरी 2026 को छात्रा की मौत हुई थी। घटना के 19 दिन बाद भी पुलिस कोई ठोस सबूत नहीं खोज पाई है। होली के दिन हम छात्रा के परिजनों से मिलने उसके घर गए। घर में मातम पसरा था। छात्रा की मां हमें देखते ही इंसाफ की गुहार लगाने लगी। कहा, ‘मेरी बेटी नर्स बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी। इंटर (साइंस) में एडमिशन लिया था। नर्सिंग की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई को लेकर इतनी गंभीर थी कि सुबह चार बजे उठकर घर का काम निपटाती थी। सबके लिए चाय बनाती, खाना तैयार करती और फिर पढ़ने जाती थी।’ ‘इतने दिन हो गए, अब तक एक भी सबूत नहीं मिला’ छात्रा की मांं ने कहा, ‘उसको गए हुए इतने दिन हो गए। अब तक पुलिस वालों को एक भी सबूत नहीं मिला है। हत्यारों ने जिस तरह मेरी बेटी को गिराकर मारा है, उसी तरह उसको भी गिराकर मार दिया जाए। मैं नहीं चाहती कि ऐसी घटना दोबारा किसी बेटी के साथ हो।’ उन्होंने कहा, ‘मेरी बेटी उस दिन भी बहुत हंसते-मुस्कुराते कंधे पर बैग टांग कर घर से पढ़ने गई थी। उसे देखकर बहुत गर्व होता था। उसके जाने के 10 मिनट बाद ही मुझे यह खबर मिली। मेरी दुनिया उजड़ गई। वह उस दिन भी सभी के लिए खाना बनाकर, चाय पिलाकर पढ़ने गई थी।’ अब दूसरी बेटियों को पढ़ने नहीं भेजूंगी उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी बेटी तो अब लौटकर नहीं आएगी। कोई मुझे उसे वापस लाकर नहीं दे सकता। जिसने भी मेरी बेटी के साथ यह घटना की, उसे बीच चौराहा पर खड़ा कर गोली मारनी चाहिए, तभी मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा। तभी मुझे संतुष्टि मिलेगी कि मेरी बेटी को इंसाफ मिला। मेरे घर में और भी बेटियां हैं। अब मैं अपनी दूसरी बेटियों को कभी पढ़ने के लिए नहीं भेज पाऊंगी। मेरी बेटियां अब घर में बैठेंगी।’ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ… लेकिन किसके लिए? छात्रा की मां ने कहा, ‘मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) और नीतीश (सीएम नीतीश कुमार) कहते हैं कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। मैंने तीन बेटी को बचाया, लेकिन जब अपनी बेटी को पढ़ने भेजा तो ऐसी घटना हो गई। क्या इसी दिन के लिए लोग बेटी को बचाएंगे, बेटी को पढ़ाएंगे। मां-बाप दिन-रात उसके वियोग में रोते रहें। हम दिल पर पत्थर रखकर जी रहे हैं। मेरी बेटी नर्स बनना चाहती थी। उसका सपना अधूरा रह गया। मैट्रिक की परीक्षा के बाद इंटर में उसका नाम लिखवाया था। पढ़ाई में कमजोर होती तो घर से बाहर पढ़ने नहीं भेजती।’ गरीब की बेटी को इंसाफ भी नहीं मिलता मां ने भरे गले से कहा, ‘गरीब के बच्चे को इंसाफ नहीं मिलता है। बड़े लोगों और नेताओं के बच्चे ही पढ़ाई कर सकते हैं। उनके आगे पीछे बॉडीगार्ड रहते हैं। हम गरीब बॉडीगार्ड कहां से लगाएंगे। हम गरीब मजदूरी करते हैं, तब अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी को पढ़ाई की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। वह पढ़ाई के लिए इतनी सीरियस थी कि कभी किसी की शादी में भी नहीं जाती थी। सिर्फ पढ़ाई के पीछे भागती थी।’ हमलोग धूमधाम से होली मनाते थे, बेटी की मौत ने सारी खुशियां छीन लीं उन्होंने कहा, ‘आज होली है। मेरी बेटी इस दुनिया में नहीं है। हमारे घर की सारी खुशियां छीन गई हैं। पहले परिवार के सभी लोग इकट्ठा होकर बहुत धूमधाम से होली मनाते थे। मुझे तो लगता है कि यह त्यौहार सिर्फ नेता और विधायक लोग ही मना सकते हैं, जिनकी बेटी के साथ ऐसा कुछ न हो।’ ‘गरीब की बेटी है, इसलिए अब तक इंसाफ नहीं मिला। किसी बड़े नेता की बेटी होती तो इंसाफ मिल गया होता। पुलिस तुरंत सबूत भी खोज लेती। गरीब की बेटी है इसलिए फेंकी हुई है। अब गरीब की बेटी डर से पढ़ने नहीं जाएगी।’ हमारा घर उजड़ गया, अब क्या होली मनाएंगे होली का जिक्र आते ही दादी की आंखें भर आईं। आंखों से बहते आंसू पोछते हुए कहा, ‘हमारा तो घर उजड़ गया। हम अब क्या होली या कोई पर त्यौहार मनाएंगे। हर साल वह होली खूब धूमधाम से मनाती थी। पुआ और ठेकुआ खूब प्यार से खाती थी।’ एक बेटी के साथ जो ऐसा हुआ, अब दूसरी को कैसे पढ़ने भेजें? छात्रा की चाची गुड़िया देवी ने भर्राई आवाज में कहा, ‘वह मेरी भी बेटी थी। जब एक बेटी के साथ ऐसा हो जाए तो हम दूसरी बच्चियों को कैसे पढ़ने स्कूल भेज दें?’ उन्होंने बताया कि घटना के बाद से पूरे इलाके के लोग डरे हुए हैं। बहुत सी लड़कियों की पढ़ाई बंद हो गई है। अगल-बगल वाले भी डरे हुए हैं। वे भी अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेज रहे हैं। लोग आए, आश्वासन मिला… पर इंसाफ अब तक नहीं चाची ने कहा, ‘घटना के बाद कई लोग आए, सांत्वना दी, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला है। इतने लोग आए, बातें हुईं, लेकिन मेरी बच्ची को इंसाफ नहीं मिला।’ उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, ‘आप आई हैं तो ऐसा कीजिए कि आपके आने से मेरी बच्ची को इंसाफ मिल जाए, ताकि आगे से कोई मां-बाप डर के कारण अपनी बेटी की पढ़ाई न रोकें।’ ‘मेरी बेटी बड़े उत्साह से होली का त्योहार मनाती थी। परिवार के लोग इकट्ठा होकर होली खेलते थे। वह तो चली गई। अब हमारी जिंदगी में होली का कोई रंग नहीं बचा। हमारी तो दुनिया उजड़ गई। मोदी-नीतीश कहते हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। क्या इस दिन के लिए बेटी को बचाएं और पढ़ाएं कि कोई उसे मार दे। बड़े नेता की बेटी होती तो पुलिस अब तक सबूत खोज लेती। गरीब की बेटी को इंसाफ नहीं मिलता।’ इतना कहते-कहते उस मां की आंखें बरस पड़ती हैं, जिसने 12 फरवरी 2026 को अपनी होनहार बेटी खो दी। पटना के फुलवारी शरीफ में कोचिंग में पढ़ने गई 12वीं की छात्रा की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई थी। वह कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग के छत से गिरी या फेंकी गई, पुलिस इसकी जांच कर रही है। होली से पहले हम पीड़ित परिवार के पास पहुंचे। उनका दर्द जाना। मृतक छात्रा के परिवार के लोग किस हाल में जी रहे हैं? मां क्या गुहार लगा रही हैं? पुलिस की जांच पर क्या कहती हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। खौफ में परिवार, घर का कोई बच्चा पढ़ने नहीं जाता 12 फरवरी 2026 को छात्रा की मौत हुई थी। घटना के 19 दिन बाद भी पुलिस कोई ठोस सबूत नहीं खोज पाई है। होली के दिन हम छात्रा के परिजनों से मिलने उसके घर गए। घर में मातम पसरा था। छात्रा की मां हमें देखते ही इंसाफ की गुहार लगाने लगी। कहा, ‘मेरी बेटी नर्स बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी। इंटर (साइंस) में एडमिशन लिया था। नर्सिंग की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई को लेकर इतनी गंभीर थी कि सुबह चार बजे उठकर घर का काम निपटाती थी। सबके लिए चाय बनाती, खाना तैयार करती और फिर पढ़ने जाती थी।’ ‘इतने दिन हो गए, अब तक एक भी सबूत नहीं मिला’ छात्रा की मांं ने कहा, ‘उसको गए हुए इतने दिन हो गए। अब तक पुलिस वालों को एक भी सबूत नहीं मिला है। हत्यारों ने जिस तरह मेरी बेटी को गिराकर मारा है, उसी तरह उसको भी गिराकर मार दिया जाए। मैं नहीं चाहती कि ऐसी घटना दोबारा किसी बेटी के साथ हो।’ उन्होंने कहा, ‘मेरी बेटी उस दिन भी बहुत हंसते-मुस्कुराते कंधे पर बैग टांग कर घर से पढ़ने गई थी। उसे देखकर बहुत गर्व होता था। उसके जाने के 10 मिनट बाद ही मुझे यह खबर मिली। मेरी दुनिया उजड़ गई। वह उस दिन भी सभी के लिए खाना बनाकर, चाय पिलाकर पढ़ने गई थी।’ अब दूसरी बेटियों को पढ़ने नहीं भेजूंगी उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी बेटी तो अब लौटकर नहीं आएगी। कोई मुझे उसे वापस लाकर नहीं दे सकता। जिसने भी मेरी बेटी के साथ यह घटना की, उसे बीच चौराहा पर खड़ा कर गोली मारनी चाहिए, तभी मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा। तभी मुझे संतुष्टि मिलेगी कि मेरी बेटी को इंसाफ मिला। मेरे घर में और भी बेटियां हैं। अब मैं अपनी दूसरी बेटियों को कभी पढ़ने के लिए नहीं भेज पाऊंगी। मेरी बेटियां अब घर में बैठेंगी।’ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ… लेकिन किसके लिए? छात्रा की मां ने कहा, ‘मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) और नीतीश (सीएम नीतीश कुमार) कहते हैं कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। मैंने तीन बेटी को बचाया, लेकिन जब अपनी बेटी को पढ़ने भेजा तो ऐसी घटना हो गई। क्या इसी दिन के लिए लोग बेटी को बचाएंगे, बेटी को पढ़ाएंगे। मां-बाप दिन-रात उसके वियोग में रोते रहें। हम दिल पर पत्थर रखकर जी रहे हैं। मेरी बेटी नर्स बनना चाहती थी। उसका सपना अधूरा रह गया। मैट्रिक की परीक्षा के बाद इंटर में उसका नाम लिखवाया था। पढ़ाई में कमजोर होती तो घर से बाहर पढ़ने नहीं भेजती।’ गरीब की बेटी को इंसाफ भी नहीं मिलता मां ने भरे गले से कहा, ‘गरीब के बच्चे को इंसाफ नहीं मिलता है। बड़े लोगों और नेताओं के बच्चे ही पढ़ाई कर सकते हैं। उनके आगे पीछे बॉडीगार्ड रहते हैं। हम गरीब बॉडीगार्ड कहां से लगाएंगे। हम गरीब मजदूरी करते हैं, तब अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी को पढ़ाई की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। वह पढ़ाई के लिए इतनी सीरियस थी कि कभी किसी की शादी में भी नहीं जाती थी। सिर्फ पढ़ाई के पीछे भागती थी।’ हमलोग धूमधाम से होली मनाते थे, बेटी की मौत ने सारी खुशियां छीन लीं उन्होंने कहा, ‘आज होली है। मेरी बेटी इस दुनिया में नहीं है। हमारे घर की सारी खुशियां छीन गई हैं। पहले परिवार के सभी लोग इकट्ठा होकर बहुत धूमधाम से होली मनाते थे। मुझे तो लगता है कि यह त्यौहार सिर्फ नेता और विधायक लोग ही मना सकते हैं, जिनकी बेटी के साथ ऐसा कुछ न हो।’ ‘गरीब की बेटी है, इसलिए अब तक इंसाफ नहीं मिला। किसी बड़े नेता की बेटी होती तो इंसाफ मिल गया होता। पुलिस तुरंत सबूत भी खोज लेती। गरीब की बेटी है इसलिए फेंकी हुई है। अब गरीब की बेटी डर से पढ़ने नहीं जाएगी।’ हमारा घर उजड़ गया, अब क्या होली मनाएंगे होली का जिक्र आते ही दादी की आंखें भर आईं। आंखों से बहते आंसू पोछते हुए कहा, ‘हमारा तो घर उजड़ गया। हम अब क्या होली या कोई पर त्यौहार मनाएंगे। हर साल वह होली खूब धूमधाम से मनाती थी। पुआ और ठेकुआ खूब प्यार से खाती थी।’ एक बेटी के साथ जो ऐसा हुआ, अब दूसरी को कैसे पढ़ने भेजें? छात्रा की चाची गुड़िया देवी ने भर्राई आवाज में कहा, ‘वह मेरी भी बेटी थी। जब एक बेटी के साथ ऐसा हो जाए तो हम दूसरी बच्चियों को कैसे पढ़ने स्कूल भेज दें?’ उन्होंने बताया कि घटना के बाद से पूरे इलाके के लोग डरे हुए हैं। बहुत सी लड़कियों की पढ़ाई बंद हो गई है। अगल-बगल वाले भी डरे हुए हैं। वे भी अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेज रहे हैं। लोग आए, आश्वासन मिला… पर इंसाफ अब तक नहीं चाची ने कहा, ‘घटना के बाद कई लोग आए, सांत्वना दी, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला है। इतने लोग आए, बातें हुईं, लेकिन मेरी बच्ची को इंसाफ नहीं मिला।’ उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, ‘आप आई हैं तो ऐसा कीजिए कि आपके आने से मेरी बच्ची को इंसाफ मिल जाए, ताकि आगे से कोई मां-बाप डर के कारण अपनी बेटी की पढ़ाई न रोकें।’  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *