Order For Teachers : एसआईआर के कारण शिक्षक दोहरी व्यवस्था में उलझे हुए हैं। इससे स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। शिक्षकों में दो अलग-अलग आदेशों को लेकर गहरी नाराजगी है। बता दें कि उत्तराखंड में 11 हजार से अधिक बीएलओ में 6000 कार्मिक अकेले शिक्षा विभाग के शामिल हैं। शिक्षकों का कहना है कि वह एक साथ दो-दो ड्यूटी कैसे कर सकते हैं। कई शिक्षकों को उनके स्कूल से दूर बीएलओ की ड्यूटी दी गई है। देहरादून में जूनियर हाईस्कूल तेलीवाला में तैनात तीन शिक्षकों को शहर के अलग-अलग बूथ का बीएलओ बनाया गया है। इनमें तो एक को दूसरे कोने बालावाला में तैनात किया गया है। अब आधे दिन तक स्कूल में रहने के बाद वह बालावाला पहुंचते हैं तो एसआईआर का काम कब कर पाएंगे। यह स्थिति राज्य में अन्य स्थानों पर भी है।
दोहरी ड्यूटी कैसे संभव
एसआईआर में चूक होने पर बीएलओ को राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त चेतावनी दी है। सहायक मुख्य निवार्चन अधिकारी मस्तू दास की ओर से भारत निर्वाचन आयोग का हवाला देकर बीएलओ स्तर पर किसी भी चूक पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र रावत कहा कहना है कि शिक्षक दोहरी व्यवस्था में झूल रहे हैं। बीएलओ बनाए गए शिक्षकों से शिक्षण का कार्य लेने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि निर्वाचन आयोग बीएलओ से फुलटाइम कर्मचारी के रूप में काम ले रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ पौड़ी के जिलाध्यक्ष मनोज जुगरान के मुताबिक बीएलओ में 70 फीसदी शिक्षक ड्यूटी दे रहे हैं। यहां भी शिक्षकों से आधे दिन पढ़ाने और आधे दिन एसआईआर करने के लिए कहा जा रहा है।
आयोग कर चुका है हस्तक्षेप
देहरादून में प्राइमरी स्कूल अमृतकौर रोड के प्रधानाचार्य का वेतन शिक्षा विभाग ने सिर्फ इसलिए रोक दिया था कि वह स्कूल में उपस्थित नहीं थे। फिर आयोग को हस्तक्षेप कर बताना पड़ा कि उन्होंने अपने बूथ पर प्री-एसआईआर उत्कृष्ट कार्य किया है और वह लगातार एसआईआर में थे, इसलिए उनका वेतन जारी किया जाए। साथ ही यह पत्र भी जारी करना पड़ा कि आधे दिन पढ़ाने फिर एसआईआर जाने वाले शिक्षा विभाग के आदेश से अगर निर्वाचन का कार्य में कहीं चूक हुई तो इसमें कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों पर भी दोहरी मार
एसआईआर के तहत बीएलओ ड्यूटी में शिक्षकों के बाद सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी कर्मचारी तैनात हैं। इन्हें भी इनके विभाग की ओर से आधे दिन तक आंगनबाड़ी संचालित करने और फिर एसआईआर के काम में जाने के लिए कहा जा रहा है। इससे आंगनबाड़ी कर्मचारी दोहरे आदेश और दोहरे काम में फंसी हुई हैं। इससे उन्हें भी परेशानी का सामाना करना पड़ा रहा है।


