बालाघाट के आदिवासी वन क्षेत्रों में सरकार की ओर से बॉक्साइट खनन के लिए ब्लॉक आवंटित किए जाने का विरोध लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को एसटी, एससी और ओबीसी क्रांति मोर्चा के प्रतिनिधियों ने इस खनन के खिलाफ आम लोगों से जंगल और पर्यावरण को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। आपत्तियों को नजरअंदाज किए जाने से लोग आक्रोशित यह विरोध लौंगुर और पचामा दादर के बीच 60 हेक्टेयर बॉक्साइट खनन की अनुमति से संबंधित है। इस संबंध में आगामी 18 फरवरी को जनसुनवाई होनी है। इससे पहले भी खनन अनुमति पर उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज किए जाने से लोगों में आक्रोश है। इससे पहले, 12 फरवरी को आदिवासियों ने सरकार के बॉक्साइट खनन ब्लॉक आवंटन के विरोध में चक्काजाम आंदोलन किया था। क्रांति मोर्चा ने इस आंदोलन के दो दिन बाद जनता से इस मुद्दे पर आगे आने का आग्रह किया है। बॉक्साइट खनन के लिए कानूनों, नियमों की अनदेखी का आरोप मोर्चा प्रतिनिधि महेश सहारे ने बताया कि सरकार बॉक्साइट खनन के लिए कानूनों और नियमों की अनदेखी कर मनमानी कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि छत्तीसगढ़ और झारखंड की तर्ज पर खनन की अनुमति देने से जिले के सैकड़ों एकड़ वृक्ष काटे जाएंगे, जिससे स्थानीय वातावरण और पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। महेश सहारे ने स्पष्ट किया कि क्रांति मोर्चा सरकार की इस मनमानी का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया जाएगा।


