जमुई जिले में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर हुए स्थानांतरण से शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है। कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात बुरी तरह असंतुलित हो गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। प्राथमिक विद्यालय तिलकाखांड़ में 130 छात्रों पर मात्र एक शिक्षक तैनात है। इस स्थिति के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना लगभग असंभव होता जा रहा है। एक ही शिक्षक को सैकड़ों छात्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे न तो नियमित पढ़ाई हो पा रही है और न ही छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल पा रहा है। सोनो प्रखंड के विद्यालयों की स्थिति इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। प्राथमिक विद्यालय चौराधारी में 31 छात्रों पर एक शिक्षक है, जबकि उत्क्रमित मध्य विद्यालय थम्हन में 498 छात्रों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं। खरीक में 198 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धमनी में 265 छात्रों के लिए दो शिक्षक हैं, वहीं खरीक में 198 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं। टहकार में 332 छात्रों की जिम्मेदारी चार शिक्षक निभा रहे हैं, जबकि रजौन विद्यालय में 568 छात्रों की पढ़ाई का भार तीन शिक्षक उठा रहे हैं। ये आंकड़े केवल कुछ उदाहरण हैं, प्रखंड के दर्जनों विद्यालयों में यही स्थिति बनी हुई है। यह इलाका पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है, जहां शिक्षा को विकास का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर एक शिक्षक पर अधिकतम 30 से 35 छात्र और मध्य विद्यालय में 35 से 40 छात्र होने चाहिए। हालांकि, जमीनी हकीकत इन मानकों से बिल्कुल उलट है, जहां कई जगह यह अनुपात तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। ट्रांसफर के बाद फिर से हालात बिगड़ गए
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बीपीएससी टीआरई 1 और 2 के तहत शिक्षकों की नियुक्ति के बाद स्थिति में सुधार हुआ था और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बना था। लेकिन हालिया ट्रांसफर के बाद फिर से हालात बिगड़ गए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं को संभालना पड़ता है, जिससे न तो पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाता है और न ही बच्चों की समझ विकसित हो पाती है। बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा इसका असर
इसके अलावा शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ मध्याह्न भोजन, नामांकन, सरकारी योजनाओं की रिपोर्टिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों का भी जिम्मा उठाना पड़ता है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि ऐसी स्थिति में गुणवत्ता शिक्षा की बात करना बेमानी है। यदि जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि रिक्त पदों पर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और स्थानांतरण नीति की समीक्षा की जाए, ताकि विद्यालयों में संतुलित शिक्षक-छात्र अनुपात बहाल हो सके। दर्जनों नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया
बता दे कि कभी सोनो प्रखंड के तिलकाखांड,चरका पत्थर,टहकार,थ्महन,पंजिया ,चरैया,विशनपुर,भलसूमिया के इलाके में नक्सलियों का कब्जा था। बता दे कि 2009 से 2019 तक इस इलाके में दिन के उजालें में ही नक्सलियों द्वारा दर्जनों विद्यालय जिसमें चरका पत्थर विद्यालय,भलसूमिया विद्यालय,थ्महन के विद्यालय को नक्सलियों द्वारा विस्फोट कर उड़ा दिया गया था। जिसके बाद उस इलाके में शिक्षा पुरी तरह बाधित हो गई थी। हालाकि बाद में लगातार सुरक्षा कर्मियों द्वारा चलाए गए नक्सल अभियान में दर्जनों नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। जबकि बाकि बचे नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब इस इलाके में शिक्षा की स्थिति में सुधार आएगा लेकिन शिक्षकों की कमी ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जमुई के शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि बिहार शिक्षा विभाग पटना के द्वारा ही ट्रांसफर पोस्टिंग हुई है। जिससे कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी हुई है उसे जल्द पूरा कर लिया जाए। जमुई जिले में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर हुए स्थानांतरण से शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है। कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात बुरी तरह असंतुलित हो गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। प्राथमिक विद्यालय तिलकाखांड़ में 130 छात्रों पर मात्र एक शिक्षक तैनात है। इस स्थिति के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना लगभग असंभव होता जा रहा है। एक ही शिक्षक को सैकड़ों छात्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे न तो नियमित पढ़ाई हो पा रही है और न ही छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल पा रहा है। सोनो प्रखंड के विद्यालयों की स्थिति इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। प्राथमिक विद्यालय चौराधारी में 31 छात्रों पर एक शिक्षक है, जबकि उत्क्रमित मध्य विद्यालय थम्हन में 498 छात्रों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं। खरीक में 198 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धमनी में 265 छात्रों के लिए दो शिक्षक हैं, वहीं खरीक में 198 बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं। टहकार में 332 छात्रों की जिम्मेदारी चार शिक्षक निभा रहे हैं, जबकि रजौन विद्यालय में 568 छात्रों की पढ़ाई का भार तीन शिक्षक उठा रहे हैं। ये आंकड़े केवल कुछ उदाहरण हैं, प्रखंड के दर्जनों विद्यालयों में यही स्थिति बनी हुई है। यह इलाका पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है, जहां शिक्षा को विकास का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर एक शिक्षक पर अधिकतम 30 से 35 छात्र और मध्य विद्यालय में 35 से 40 छात्र होने चाहिए। हालांकि, जमीनी हकीकत इन मानकों से बिल्कुल उलट है, जहां कई जगह यह अनुपात तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। ट्रांसफर के बाद फिर से हालात बिगड़ गए
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बीपीएससी टीआरई 1 और 2 के तहत शिक्षकों की नियुक्ति के बाद स्थिति में सुधार हुआ था और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बना था। लेकिन हालिया ट्रांसफर के बाद फिर से हालात बिगड़ गए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं को संभालना पड़ता है, जिससे न तो पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाता है और न ही बच्चों की समझ विकसित हो पाती है। बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा इसका असर
इसके अलावा शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ मध्याह्न भोजन, नामांकन, सरकारी योजनाओं की रिपोर्टिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों का भी जिम्मा उठाना पड़ता है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि ऐसी स्थिति में गुणवत्ता शिक्षा की बात करना बेमानी है। यदि जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि रिक्त पदों पर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और स्थानांतरण नीति की समीक्षा की जाए, ताकि विद्यालयों में संतुलित शिक्षक-छात्र अनुपात बहाल हो सके। दर्जनों नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया
बता दे कि कभी सोनो प्रखंड के तिलकाखांड,चरका पत्थर,टहकार,थ्महन,पंजिया ,चरैया,विशनपुर,भलसूमिया के इलाके में नक्सलियों का कब्जा था। बता दे कि 2009 से 2019 तक इस इलाके में दिन के उजालें में ही नक्सलियों द्वारा दर्जनों विद्यालय जिसमें चरका पत्थर विद्यालय,भलसूमिया विद्यालय,थ्महन के विद्यालय को नक्सलियों द्वारा विस्फोट कर उड़ा दिया गया था। जिसके बाद उस इलाके में शिक्षा पुरी तरह बाधित हो गई थी। हालाकि बाद में लगातार सुरक्षा कर्मियों द्वारा चलाए गए नक्सल अभियान में दर्जनों नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। जबकि बाकि बचे नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब इस इलाके में शिक्षा की स्थिति में सुधार आएगा लेकिन शिक्षकों की कमी ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जमुई के शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि बिहार शिक्षा विभाग पटना के द्वारा ही ट्रांसफर पोस्टिंग हुई है। जिससे कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी हुई है उसे जल्द पूरा कर लिया जाए।


