राज्य सरकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नीतियों से आक्रोशित बिहार के राजस्व कर्मचारी अब आर–पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। सालों से लंबित मांगों को नजरअंदाज किए जाने, स्वीकार किए गए निर्णयों को लागू नहीं करने और नित नए कथित असंवैधानिक फरमान जारी किए जाने के विरोध में आज जिला मुख्यालय के जे.पी स्मारक के समझ राजस्व कर्मचारियों ने एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया धरना बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बिहार सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। धरना के दौरान जिला अध्यक्ष रंजीत कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार जिन योजनाओं और व्यवस्थाओं के दम पर अपनी उपलब्धियां गिनाती है, उनकी रीढ़ यही राजस्व कर्मचारी हैं, लेकिन इन्हीं कर्मचारियों के साथ सबसे ज्यादा उपेक्षा की जा रही है। जमुई जिला मुख्यालय पर आयोजित धरना में मौजूद संघ के जिला सचिव ने बताया कि साल 2025 में विभाग के साथ हुए समझौते में राजस्व कर्मचारियों की 17 सूत्री मांगों को मान लिया गया था, लेकिन आज तक उनका कार्यान्वयन नहीं किया गया। कर्मचारियों में भारी गुस्सा आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से कर्मचारियों में भारी रोष है। धरना स्थल पर कर्मचारियों ने वेतनमान, प्रोन्नति, पदस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कर्मचारियों का कहना है कि स्नातक योग्यता लागू होने के बावजूद ग्रेड पे में सुधार नहीं किया गया है। 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रोन्नति का प्रावधान होने के बावजूद 15 साल से अधिक सेवा दे चुके कर्मियों को भी पदोन्नति नहीं मिल पाई है। ACP/MACP और सेवा संपुष्टि जैसे अधिकार भी सालों से लंबित हैं। राजस्व कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक-एक कर्मचारी को कई हल्का और पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार देकर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। विभागीय काम ऑनलाइन होने के बावजूद इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। कई कर्मचारी पंचायत या सामुदायिक भवनों में बैठकर काम करने को मजबूर हैं। आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और तेज होगा संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। 3 फरवरी को पूरे बिहार में काला बिल्ला लगाकर कार्य किया गया, 5 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया और 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में राज्यस्तरीय धरना प्रस्तावित है। इसके बाद भी यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो 11 फरवरी से सभी राजस्व कर्मचारी सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और राजस्व विभाग की होगी। राज्य सरकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नीतियों से आक्रोशित बिहार के राजस्व कर्मचारी अब आर–पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। सालों से लंबित मांगों को नजरअंदाज किए जाने, स्वीकार किए गए निर्णयों को लागू नहीं करने और नित नए कथित असंवैधानिक फरमान जारी किए जाने के विरोध में आज जिला मुख्यालय के जे.पी स्मारक के समझ राजस्व कर्मचारियों ने एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया धरना बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बिहार सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। धरना के दौरान जिला अध्यक्ष रंजीत कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार जिन योजनाओं और व्यवस्थाओं के दम पर अपनी उपलब्धियां गिनाती है, उनकी रीढ़ यही राजस्व कर्मचारी हैं, लेकिन इन्हीं कर्मचारियों के साथ सबसे ज्यादा उपेक्षा की जा रही है। जमुई जिला मुख्यालय पर आयोजित धरना में मौजूद संघ के जिला सचिव ने बताया कि साल 2025 में विभाग के साथ हुए समझौते में राजस्व कर्मचारियों की 17 सूत्री मांगों को मान लिया गया था, लेकिन आज तक उनका कार्यान्वयन नहीं किया गया। कर्मचारियों में भारी गुस्सा आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से कर्मचारियों में भारी रोष है। धरना स्थल पर कर्मचारियों ने वेतनमान, प्रोन्नति, पदस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कर्मचारियों का कहना है कि स्नातक योग्यता लागू होने के बावजूद ग्रेड पे में सुधार नहीं किया गया है। 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रोन्नति का प्रावधान होने के बावजूद 15 साल से अधिक सेवा दे चुके कर्मियों को भी पदोन्नति नहीं मिल पाई है। ACP/MACP और सेवा संपुष्टि जैसे अधिकार भी सालों से लंबित हैं। राजस्व कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक-एक कर्मचारी को कई हल्का और पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार देकर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। विभागीय काम ऑनलाइन होने के बावजूद इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। कई कर्मचारी पंचायत या सामुदायिक भवनों में बैठकर काम करने को मजबूर हैं। आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और तेज होगा संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। 3 फरवरी को पूरे बिहार में काला बिल्ला लगाकर कार्य किया गया, 5 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया और 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में राज्यस्तरीय धरना प्रस्तावित है। इसके बाद भी यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो 11 फरवरी से सभी राजस्व कर्मचारी सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और राजस्व विभाग की होगी।


