रियल एस्टेट कंपनी आरआरआर इंफ्रा बिल्डर (अहिंसा ग्रुप) पर आयकर विभाग के सर्वे में बड़े स्तर पर आय छुपाने का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी जहां सालाना करीब एक करोड़ रुपये का आयकर रिटर्न दाखिल कर रही थी, वहीं उसका वास्तविक टर्नओवर लगभग 20 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा था। इस बड़े अंतर को लेकर जब विभाग ने सख्ती दिखाई तो बिल्डर ने जांच के दौरान ही तथ्यों को स्वीकार करते हुए बकाया कर जमा करने की सहमति दे दी है।
आयकर विभाग की टीम ने मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे से शहर के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी, जो गुरुवार सुबह तक लगातार चली। इस दौरान आरआरआर इंफ्रा बिल्डर के संचालक रोहित जैन और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों को खंगाला गया। कार्रवाई में हाथरस रोड स्थित मुख्य कार्यालय, एत्मादपुर स्थित रियल एस्टेट साइट, कुंडौल में विकसित हो रहा ग्रांड ग्रीन वैली प्रोजेक्ट सहित करीब आधा दर्जन स्थान शामिल रहे।
जांच के दौरान विभागीय टीमों को कई अहम दस्तावेज और कागजात मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि प्लॉट और आवास की बिक्री में बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन किया गया। इन लेन-देन को व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड से बाहर रखा गया और आयकर रिटर्न में वास्तविक आय को कम दर्शाया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए कंपनी ने बड़े स्तर पर मुनाफा कमाया, लेकिन उस पर देय टैक्स का भुगतान नहीं किया गया।
दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी द्वारा करीब एक करोड़ रुपये वार्षिक आय का रिटर्न दाखिल किया जाता था, जबकि तिमाही आधार पर करीब 30 लाख रुपये का रिटर्न भरा जाता था। इसके विपरीत वास्तविक कारोबार लगभग 20 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा था, जो घोषित आय से कई गुना अधिक है। इस अंतर को लेकर जब आयकर विभाग ने साक्ष्य प्रस्तुत किए, तो बिल्डर ने भी इसे स्वीकार कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, नकद में ली गई रकम को विभिन्न माध्यमों से खपाया गया, जिससे उसे आधिकारिक खातों में नहीं दिखाया गया। अब विभाग इन दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुल कितना टैक्स बकाया है और किन-किन स्तरों पर अनियमितताएं की गईं।
यह पूरी कार्रवाई प्रधान आयकर आयुक्त अनुपम कांत गर्ग के नेतृत्व में की गई, जिसमें करीब तीन दर्जन आयकर अधिकारी और कर निरीक्षक शामिल रहे। सर्वे की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन जब्त दस्तावेजों की जांच अभी जारी है और आगे भी विभाग की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई


