करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने मैनपुरी में केंद्र सरकार के यूजीसी कानून का कड़ा विरोध किया। उन्होंने एसडीएम अंजलि सिंह को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। शेखावत ने आरोप लगाया कि सरकार ने असंवैधानिक बिल पारित कर सामान्य वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन किया है। राज शेखावत ने यूजीसी एक्ट को एक सोची-समझी साजिश बताया, जो संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “काला कानून” करार देते हुए कहा कि इसे हर हाल में वापस कराया जाएगा। इसके लिए देशभर में ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समान वर्ग के कई संगठनों ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति’ नामक एक फेडरेशन का गठन किया है। यह फेडरेशन 8 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में दोपहर 12 बजे एक महाआंदोलन करेगा। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में आमंत्रण यात्राएं निकाली जा रही हैं। राज शेखावत ने मैनपुरी के सामान्य वर्ग के लोगों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचकर इस कानून के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि या तो यूजीसी कानून वापस लिया जाएगा या फिर केंद्र सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राजनीतिक संकेत देते हुए शेखावत ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि केवल मायावती ने ही इस मुद्दे पर खुलकर विरोध जताया है। यदि बसपा का समर्थन आगे भी जारी रहता है, तो सामान्य वर्ग का समाज आगामी चुनावों में उनका साथ देगा। शेखावत ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून में विसंगतियों को नोटिस किया है, तो अन्य राजनीतिक दल चुप क्यों हैं। उन्होंने दोहराया कि जब तक यूजीसी कानून वापस नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जो पार्टी इस मुद्दे पर उनका समर्थन करेगी, उसे चुनाव में पूर्ण समर्थन दिया जाएगा।


