आज ही के दिन ‘लिटिल मास्टर’ ने जड़ा था अपना पहला सैंकड़ा, बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो 55 सालों से नहीं टूटा

आज ही के दिन ‘लिटिल मास्टर’ ने जड़ा था अपना पहला सैंकड़ा, बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो 55 सालों से नहीं टूटा

Sunil Gavaskar Debut Hundred: 21 मार्च 1971 को गुयाना के जॉर्जटाउन में तीसरे टेस्ट के दौरान सुनील गावस्कर ने अपना पहला टेस्ट शतक जड़ा था। इसी सीरीज में उन्होंने कुल 774 रन बनाए, जो किसी भी खिलाड़ी का डेब्यू सीरीज में सर्वाधिक रन का विश्व रिकॉर्ड है। 

Sunil Gavaskar Debut Hundred: वेस्टइंडीज की धरती पर गैरी सोबर्स, रोहन कन्हाई और क्लाइव लॉयड जैसे दिग्गजों से सजी एक टीम। और उनके सामने खड़ा था 21 साल का एक मुंबईकर नौजवान, जो न तो हेलमेट पहनता था, न तेज गेंदबाजों से घबराता था।

तारीख थी 21 मार्च 1971, जब जॉर्जटाउन के बोर्डा ग्राउंड पर इस युवा ने तीसरे टेस्ट में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा और भारतीय क्रिकेट में एक ऐसे युग की शुरुआत की, जिसे इतिहास आज भी सुनहरे शब्दों में याद करता है। वह नौजवान कोई और नहीं, बल्कि ‘लिटिल मास्टर’ सुनील मनोहर गावस्कर थे और आज ही के दिन 55 साल पहले उन्होंने टेस्ट बैटिंग का बेंचमार्क इतना ऊंचा सेट कर दिया था कि पांच दशकों बाद भी कोई खिलाड़ी उनके रिकॉर्ड के आसपास भी नहीं पहुंच सका है।

जॉर्जटाउन से शुरु हुई कहानी

1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उस ऐतिहासिक सीरीज में सुनील गावस्कर का टेस्ट डेब्यू हुआ था। पहला टेस्ट किंग्सटन में खेला गया जिसमें गावस्कर चोट की वजह से नहीं खेल सके। दरअसल, गावस्कर पहले टेस्ट में ‘व्हिटलो’ नामक उंगली की बीमारी के कारण अवेलेबल नहीं थे। दूसरे टेस्ट में पोर्ट ऑफ स्पेन में 6 मार्च को उन्होंने डेब्यू किया। उन्होंने दोनों पारियों में अर्धशतक लगाते हुए 65 और 67* रन बनाए और भारत को सात विकेट से जीत दिलाई।

फिर आई तीसरे टेस्ट की बारी, जॉर्जटाउन, 21 मार्च 1971। गावस्कर ने तीसरे टेस्ट में 116 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 11 चौके लगाए। यह उनका पहला टेस्ट शतक था। दूसरी पारी में भी वे 64 रन बनाकर नाबाद रहे। वेस्टइंडीज के गेंदबाजों के सामने इस युवा की पिच पर डटे रहने की क्षमता और तकनीक देखकर कैरेबियाई दर्शक भी दंग रह गए थे।

55 साल से अजेय है यह कीर्तिमान

गावस्कर ने चौथे टेस्ट (ब्रिजटाउन) में 117 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि पांचवें और अंतिम टेस्ट में पोर्ट ऑफ स्पेन वापस लौटते हुए उन्होंने 124 और 220 रन जड़े। 220 रन की इस पारी के दौरान उन्होंने 529 मिनट पिच पर बिताए थे।

गावस्कर ने पूरी सीरीज में 154.80 की औसत से 774 रन बनाए, जिसमें चार शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे। यह डेब्यू सीरीज में किसी भी बल्लेबाज का सर्वाधिक स्कोर था, जिसने जॉर्ज हेडली के 703 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ा। वे मैच के दौरान एक टूथ इन्फेक्शन के दर्द से जूझते हुए भी डटे रहे और अपने जज्बे के दम पर यह कारनामा किया। पांच मैचों की उस सीरीज में गावस्कर की बल्लेबाजी से प्रभावित होकर त्रिनिदाद के एक गायक ने उनके सम्मान में ‘गावस्कर कैलिप्सो’ नाम का एक गीत भी बनाया।

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