‘’मेरा या मेरे पति का देवर से कोई झगड़ा नहीं था। चार महीने पहले मुंबई मजदूरी के लिए गया था। दो महीने मुंबई में रहा, फिर गांव आ गया। पति ट्रेन के पेंट्री कार में जॉब करते हैं। इसलिए देवर घर पर ही रहकर गयाजी में मजदूरी के लिए आता-जाता था। पति और देवर के बीच पैसे को लेकर मामूली विवाद था, इसलिए देवर मुझसे बात नहीं करता था। शुक्रवार सुबह मैं नवमी पूजन के लिए नहा कर तैयार हो रही थी। इसी बीच देवर ने इतना बड़ा कांड कर दिया। उसने ऐसा क्यों किया, मुझे नहीं पता।’’ औरंगाबाद के हसपुरा थाना क्षेत्र के खुटहन गांव की रहने वाली 25 साल की अनीता कुमारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। अनीता के तीन बच्चों (10 साल के अनीश, 7 साल के आयुष, 5 साल की अनुष्का) की उसके ही देवर 25 साल के अमंत ने गला काटकर हत्या कर दी। खुद भी अपना गला काटकर सुसाइड की कोशिश की। आरोपी ने तीन बच्चों की हत्या क्यों की? आरोपी का बच्चों के माता-पिता से किस बात को लेकर झगड़ा था? वारदात को लेकर आरोपी के बारे में पड़ोसियों ने क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले घटनास्थल की तीन तस्वीरें देखिए अब जानिए तीनों बच्चों की मां अनीता ने क्या बताया? अनीता कुमारी अपनी 50 साल की सास, 30 साल के पति गुड्डू, 25 साल के देवर अमंत और तीन बच्चों के साथ चार कमरों के मकान में रह रही है। अनीता के ससुर की 5 साल पहले मौत हो चुकी है। अनीता ने बताया कि 2015 में मेरी शादी हुई। शादी के एक साल बाद ही बड़े बेटे अनीश का जन्म हुआ, जो 10 साल का है। इसके बाद आयुष 7 साल और सबसे छोटी बेटी अनुष्का 5 साल की है। शादी के बाद जब मैं ससुराल आई तो देवर अमंत भी मेरी ही उम्र का था। मैं उसको बेटे की तरह ख्याल रखती थी। कभी-कभी अमंत का मेरे पति यानी उसके बड़े भाई गुड्डू से झगड़ा होता था, तो वो मुझसे बात नहीं करता था, लेकिन ये सब कुछ ही दिन तक रहता था, फिर हम लोग हंसी-खुशी से रहते थे। तीनों बच्चों की मां के मुताबिक, मेरे पति ट्रेन में पेंट्री कार में जॉब करते हैं। ससुर की मौत और पति के जॉब की वजह से देवर घर पर ही रहता है। बच्चे भी छोटे हैं तो स्कूल ले जाना, घर लेकर आना, घर के अन्य काम देवर अमंत ही करता था। अमंत को कभी-कभी पैसे की जरुरत होती थी, तो गुड्डू उसे पैसे देते थे, लेकिन कभी-कभी गुड्डू इसका हिसाब भी मांगते थे। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच झगड़ा होता था। इस विवाद की वजह से चार महीने पहले अमंत मजदूरी के लिए मुंबई गया था। लेकिन वहां दो महीने काम करने के बाद घर लौट आया। फिर गयाजी में मजदूरी करने लगा। कुछ दिनों से वो गयाजी में ही रह रहा था और बुधवार को वो गयाजी से घर आया था। ‘सास से झगड़ा हुआ था, इसलिए देवर से मेरी बातचीत बंद थी’ अनीता ने बताया कि शुक्रवार सुबह मुझे नवमी पूजन के लिए मंदिर जाना था। देवर सुबह उठा और बड़े बेटे अनीश को साथ लेकर बाजार चला गया। मुझे लगा कि जब तक वो बाजार से आएगा, तब तक मैं नहा लेती हूं। मैं नहा ही रही थी कि देवर बड़े बेटे को लेकर आया। फिर मंझले बेटे आयुष को भी उसकी दादी के पास से घर ले आया। छोटी बेटी अनुष्का पहले से घर में थी। अनुष्का और आयुष ने जब अनीश के हाथ में बिस्किट का पैकेट देखा तो दोनों रोने लगे। फिर मैंने आयुष को कुछ पैसे दिए और कहा कि पास के दुकान से नारियल लेकर आ जाओ और बिस्किट भी ले लेना। अनीता ने बताया कि चूंकि देवर से मेरी बात नहीं हो रही थी। इसलिए उसे नारियल लाने को नहीं भेजा। दरअसल, रविवार को सास से मेरा झगड़ा हुआ था। ये हर घर की बात है, लेकिन देवर को जब इस बारे में पता चला तो वो मुझसे बात नहीं कर रहा था। वो दो दिनों से घर पर था, तो खाना-पानी, चाय-नाश्ता मैं बच्चों से दिलवा देती थी। देवर मेरे बड़े बेटे के साथ बाजार से घर पहुंचा तो मैं दूसरे कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी। मंझले बेटे को नारियल लाने के लिए पैसे देकर मैं मंदिर के लिए तैयार होने लगी। पता नहीं कब आयुष आया और नारियल रख दिया। तभी मैंने सुना की अमंत ने तीनों बच्चों को कैरमबोर्ड खेलने के लिए बुलाया और अपने कमरे में लेकर चला गया। थोड़ी देर बाद तेज आवाज में म्यूजिक बजने लगा। आयुष के चिल्लाने की आवाज आई, दरवाजा पीटा, लेकिन देवर ने नहीं खोला अनीता ने बताया कि सुबह के करीब 10 बज रहे थे। सास खेत में थी। तीनों बच्चे अमंत के साथ कमरे में थे, म्यूजिक तेज आवाज में बज रहा था। इसी दौरान मुझे आयुष के चिल्लाने की आवाज आई। मैं तुरंत अमंत के कमरे के बाहर पहुंची और दरवाजा खटखटाया, पूछा भी कि क्या हुआ, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। पता नहीं क्यों मुझे घबराहट होने लगी और मैं तत्काल बाहर आई और पड़ोसियों को आवाज देकर बुलाया। पड़ोसी भी घर आए, सभी ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। मैं और ज्यादा परेशान हो गई। इसके बाद पड़ोसी धर्मपाल ने सीढ़ी के जरिए वेंटिलेशन से अंदर झांककर देखा। 2 दिन पहले ही घर से बाहर गया था मृत बच्चों के पिता गुड्डू वहीं, अनीता ने बताया कि मेरे पति गया से मुंबई जाने वाली ट्रेन में पैंट्री कार में काम करते हैं। ट्रेन जब गया लौटती थी, तो गुड्डू घर आता था। अगले दिन फिर गया पहुंच कर ड्यूटी जॉइन करते थे। 2 दिन पहले ही गुड्डू घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। अब जानिए प्रत्यक्षदर्शी ने अंदर क्या देखा प्रत्यक्षदर्शी धर्मपाल ने बताया कि मैं बांस की सीढ़ियों की मदद से वेंटिलेशन से अंदर झांककर देखा। अंदर तीनों बच्चे लहूलुहान पड़े थे, उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। तीनों लहूलुहान बच्चों के बीच अमंत भी लहूलुहान बेसुध पड़ा था। मैं समझ गया था कि चारों की मौत हो चुकी है। मैं सीढ़ी से नीचे उतरा और पास मौजूद महिलाओं से कहा कि आप लोग अनीता को संभालिए। मैं दोबारा वेंटिलेशन के रास्ते ही अंदर पहुंचा। मैं तो दो मिनट के लिए सन्न हो गया था। सबसे पहले मैंने बाहर मौजूद लोगों से लोहे का रॉड मंगवाया। धर्मपाल ने बताया कि अमंत के कमरे का दरवाजा लोहे का है। उसने अंदर से कुंडी लगा कर ताला लगा दिया था। चाबी कहां थी, मुझे नहीं पता। मैंने लोहे के रॉड से ताला तोड़ा, जिसके बाद गांव के कुछ लोग अंदर आए। गांव के लोगों को भी लगा कि चारों की मौत हो चुकी है। अभी लोग पुलिस को कॉल कर ही रहे थे कि पता चला कि अमंत की सांसे चल रही है। उधर, घटना की गंभीरता समझते हुए तत्काल स्थानीय हसपुरा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और सबसे पहले अमंत को सदर अस्पताल भिजवाया। जहां अमंत की हालत को गंभीर देखते हुए उसे गयाजी के मगध मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। फिलहाल, अमंत की हालत नाजुक बताई जा रही है। अब जानिए अमंत के बारे में गांव के लोगों ने क्या बताया? पड़ोसी रीना देवी ने बताया कि अमंत का स्वभाव ठीक था। वो हर वक्त बच्चों के साथ खेलता रहता था। बच्चों को बाजार ले जाना हो, स्कूल ले जाना हो, स्कूल से घर लाना हो, बच्चों को कुछ दिलाना हो, अमंत सारे काम करता था। कभी ऐसा नहीं लगा कि वो अपने ही भतीजों की इतने निर्मम तरीके से हत्या कर सकता है। गांव के लोगों ने बताया कि अमंत की शादी 6 महीने पहले ही अरवल में तय हो गई थी। शादी के बाद घर कैसे चलेगा, इसी बात को लेकर अमंत मुंबई कमाने गया था, लेकिन शायद उसका मन नहीं लगा, इसलिए दो महीने में ही मुंबई से घर आ गया था। वो गयाजी में मजदूरी कर पैसे इकट्ठे कर रहा था। गांव के लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले अमंत के सगे चाचा की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी, इसलिए शादी टल गई थी। हालांकि, दो महीने बाद ही उसकी शादी होनी थी। नशे की हालत में वारदात को अंजाम देने की आशंका गांव के कुछ लोगों ने नाम न छापने की रिक्वेस्ट पर बताया कि अमंत ब्राउन सुगर का नशा भी करता था। उसने नशे में ही वारदात को अंजाम दिया है। हालांकि, आरोपी अमंत ने तीनों बच्चों की हत्या क्यों की, इस बारे में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस हिरासत में ही अमंत का मगध मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। पुलिस उसके ठीक होने का इंतजार कर रही है, ताकि उसका बयान लिया जा सके कि आखिर उसने वारदात को क्यों अंजाम दिया। उधर, हसपुरा थाना अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि वारदात की सूचना के बाद घटनास्थल से FSL की टीम ने सबूत इक्ट्ठे किए हैं। पुलिस ट्रिपल हत्याकांड से जुड़े जो भी संभावित कारण हो सकते हैं, उन सभी बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है। ‘’मेरा या मेरे पति का देवर से कोई झगड़ा नहीं था। चार महीने पहले मुंबई मजदूरी के लिए गया था। दो महीने मुंबई में रहा, फिर गांव आ गया। पति ट्रेन के पेंट्री कार में जॉब करते हैं। इसलिए देवर घर पर ही रहकर गयाजी में मजदूरी के लिए आता-जाता था। पति और देवर के बीच पैसे को लेकर मामूली विवाद था, इसलिए देवर मुझसे बात नहीं करता था। शुक्रवार सुबह मैं नवमी पूजन के लिए नहा कर तैयार हो रही थी। इसी बीच देवर ने इतना बड़ा कांड कर दिया। उसने ऐसा क्यों किया, मुझे नहीं पता।’’ औरंगाबाद के हसपुरा थाना क्षेत्र के खुटहन गांव की रहने वाली 25 साल की अनीता कुमारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। अनीता के तीन बच्चों (10 साल के अनीश, 7 साल के आयुष, 5 साल की अनुष्का) की उसके ही देवर 25 साल के अमंत ने गला काटकर हत्या कर दी। खुद भी अपना गला काटकर सुसाइड की कोशिश की। आरोपी ने तीन बच्चों की हत्या क्यों की? आरोपी का बच्चों के माता-पिता से किस बात को लेकर झगड़ा था? वारदात को लेकर आरोपी के बारे में पड़ोसियों ने क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले घटनास्थल की तीन तस्वीरें देखिए अब जानिए तीनों बच्चों की मां अनीता ने क्या बताया? अनीता कुमारी अपनी 50 साल की सास, 30 साल के पति गुड्डू, 25 साल के देवर अमंत और तीन बच्चों के साथ चार कमरों के मकान में रह रही है। अनीता के ससुर की 5 साल पहले मौत हो चुकी है। अनीता ने बताया कि 2015 में मेरी शादी हुई। शादी के एक साल बाद ही बड़े बेटे अनीश का जन्म हुआ, जो 10 साल का है। इसके बाद आयुष 7 साल और सबसे छोटी बेटी अनुष्का 5 साल की है। शादी के बाद जब मैं ससुराल आई तो देवर अमंत भी मेरी ही उम्र का था। मैं उसको बेटे की तरह ख्याल रखती थी। कभी-कभी अमंत का मेरे पति यानी उसके बड़े भाई गुड्डू से झगड़ा होता था, तो वो मुझसे बात नहीं करता था, लेकिन ये सब कुछ ही दिन तक रहता था, फिर हम लोग हंसी-खुशी से रहते थे। तीनों बच्चों की मां के मुताबिक, मेरे पति ट्रेन में पेंट्री कार में जॉब करते हैं। ससुर की मौत और पति के जॉब की वजह से देवर घर पर ही रहता है। बच्चे भी छोटे हैं तो स्कूल ले जाना, घर लेकर आना, घर के अन्य काम देवर अमंत ही करता था। अमंत को कभी-कभी पैसे की जरुरत होती थी, तो गुड्डू उसे पैसे देते थे, लेकिन कभी-कभी गुड्डू इसका हिसाब भी मांगते थे। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच झगड़ा होता था। इस विवाद की वजह से चार महीने पहले अमंत मजदूरी के लिए मुंबई गया था। लेकिन वहां दो महीने काम करने के बाद घर लौट आया। फिर गयाजी में मजदूरी करने लगा। कुछ दिनों से वो गयाजी में ही रह रहा था और बुधवार को वो गयाजी से घर आया था। ‘सास से झगड़ा हुआ था, इसलिए देवर से मेरी बातचीत बंद थी’ अनीता ने बताया कि शुक्रवार सुबह मुझे नवमी पूजन के लिए मंदिर जाना था। देवर सुबह उठा और बड़े बेटे अनीश को साथ लेकर बाजार चला गया। मुझे लगा कि जब तक वो बाजार से आएगा, तब तक मैं नहा लेती हूं। मैं नहा ही रही थी कि देवर बड़े बेटे को लेकर आया। फिर मंझले बेटे आयुष को भी उसकी दादी के पास से घर ले आया। छोटी बेटी अनुष्का पहले से घर में थी। अनुष्का और आयुष ने जब अनीश के हाथ में बिस्किट का पैकेट देखा तो दोनों रोने लगे। फिर मैंने आयुष को कुछ पैसे दिए और कहा कि पास के दुकान से नारियल लेकर आ जाओ और बिस्किट भी ले लेना। अनीता ने बताया कि चूंकि देवर से मेरी बात नहीं हो रही थी। इसलिए उसे नारियल लाने को नहीं भेजा। दरअसल, रविवार को सास से मेरा झगड़ा हुआ था। ये हर घर की बात है, लेकिन देवर को जब इस बारे में पता चला तो वो मुझसे बात नहीं कर रहा था। वो दो दिनों से घर पर था, तो खाना-पानी, चाय-नाश्ता मैं बच्चों से दिलवा देती थी। देवर मेरे बड़े बेटे के साथ बाजार से घर पहुंचा तो मैं दूसरे कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी। मंझले बेटे को नारियल लाने के लिए पैसे देकर मैं मंदिर के लिए तैयार होने लगी। पता नहीं कब आयुष आया और नारियल रख दिया। तभी मैंने सुना की अमंत ने तीनों बच्चों को कैरमबोर्ड खेलने के लिए बुलाया और अपने कमरे में लेकर चला गया। थोड़ी देर बाद तेज आवाज में म्यूजिक बजने लगा। आयुष के चिल्लाने की आवाज आई, दरवाजा पीटा, लेकिन देवर ने नहीं खोला अनीता ने बताया कि सुबह के करीब 10 बज रहे थे। सास खेत में थी। तीनों बच्चे अमंत के साथ कमरे में थे, म्यूजिक तेज आवाज में बज रहा था। इसी दौरान मुझे आयुष के चिल्लाने की आवाज आई। मैं तुरंत अमंत के कमरे के बाहर पहुंची और दरवाजा खटखटाया, पूछा भी कि क्या हुआ, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। पता नहीं क्यों मुझे घबराहट होने लगी और मैं तत्काल बाहर आई और पड़ोसियों को आवाज देकर बुलाया। पड़ोसी भी घर आए, सभी ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। मैं और ज्यादा परेशान हो गई। इसके बाद पड़ोसी धर्मपाल ने सीढ़ी के जरिए वेंटिलेशन से अंदर झांककर देखा। 2 दिन पहले ही घर से बाहर गया था मृत बच्चों के पिता गुड्डू वहीं, अनीता ने बताया कि मेरे पति गया से मुंबई जाने वाली ट्रेन में पैंट्री कार में काम करते हैं। ट्रेन जब गया लौटती थी, तो गुड्डू घर आता था। अगले दिन फिर गया पहुंच कर ड्यूटी जॉइन करते थे। 2 दिन पहले ही गुड्डू घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। अब जानिए प्रत्यक्षदर्शी ने अंदर क्या देखा प्रत्यक्षदर्शी धर्मपाल ने बताया कि मैं बांस की सीढ़ियों की मदद से वेंटिलेशन से अंदर झांककर देखा। अंदर तीनों बच्चे लहूलुहान पड़े थे, उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। तीनों लहूलुहान बच्चों के बीच अमंत भी लहूलुहान बेसुध पड़ा था। मैं समझ गया था कि चारों की मौत हो चुकी है। मैं सीढ़ी से नीचे उतरा और पास मौजूद महिलाओं से कहा कि आप लोग अनीता को संभालिए। मैं दोबारा वेंटिलेशन के रास्ते ही अंदर पहुंचा। मैं तो दो मिनट के लिए सन्न हो गया था। सबसे पहले मैंने बाहर मौजूद लोगों से लोहे का रॉड मंगवाया। धर्मपाल ने बताया कि अमंत के कमरे का दरवाजा लोहे का है। उसने अंदर से कुंडी लगा कर ताला लगा दिया था। चाबी कहां थी, मुझे नहीं पता। मैंने लोहे के रॉड से ताला तोड़ा, जिसके बाद गांव के कुछ लोग अंदर आए। गांव के लोगों को भी लगा कि चारों की मौत हो चुकी है। अभी लोग पुलिस को कॉल कर ही रहे थे कि पता चला कि अमंत की सांसे चल रही है। उधर, घटना की गंभीरता समझते हुए तत्काल स्थानीय हसपुरा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और सबसे पहले अमंत को सदर अस्पताल भिजवाया। जहां अमंत की हालत को गंभीर देखते हुए उसे गयाजी के मगध मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। फिलहाल, अमंत की हालत नाजुक बताई जा रही है। अब जानिए अमंत के बारे में गांव के लोगों ने क्या बताया? पड़ोसी रीना देवी ने बताया कि अमंत का स्वभाव ठीक था। वो हर वक्त बच्चों के साथ खेलता रहता था। बच्चों को बाजार ले जाना हो, स्कूल ले जाना हो, स्कूल से घर लाना हो, बच्चों को कुछ दिलाना हो, अमंत सारे काम करता था। कभी ऐसा नहीं लगा कि वो अपने ही भतीजों की इतने निर्मम तरीके से हत्या कर सकता है। गांव के लोगों ने बताया कि अमंत की शादी 6 महीने पहले ही अरवल में तय हो गई थी। शादी के बाद घर कैसे चलेगा, इसी बात को लेकर अमंत मुंबई कमाने गया था, लेकिन शायद उसका मन नहीं लगा, इसलिए दो महीने में ही मुंबई से घर आ गया था। वो गयाजी में मजदूरी कर पैसे इकट्ठे कर रहा था। गांव के लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले अमंत के सगे चाचा की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी, इसलिए शादी टल गई थी। हालांकि, दो महीने बाद ही उसकी शादी होनी थी। नशे की हालत में वारदात को अंजाम देने की आशंका गांव के कुछ लोगों ने नाम न छापने की रिक्वेस्ट पर बताया कि अमंत ब्राउन सुगर का नशा भी करता था। उसने नशे में ही वारदात को अंजाम दिया है। हालांकि, आरोपी अमंत ने तीनों बच्चों की हत्या क्यों की, इस बारे में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस हिरासत में ही अमंत का मगध मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। पुलिस उसके ठीक होने का इंतजार कर रही है, ताकि उसका बयान लिया जा सके कि आखिर उसने वारदात को क्यों अंजाम दिया। उधर, हसपुरा थाना अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि वारदात की सूचना के बाद घटनास्थल से FSL की टीम ने सबूत इक्ट्ठे किए हैं। पुलिस ट्रिपल हत्याकांड से जुड़े जो भी संभावित कारण हो सकते हैं, उन सभी बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है।


