पूर्णिया में चैती छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य:श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ मनाया महापर्व

पूर्णिया में चैती छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य:श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ मनाया महापर्व

पूर्णिया में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ रविवार, 22 मार्च को ‘नहाए-खाए’ के साथ शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में सूर्य उपासना और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न छठ घाटों पर दोपहर से ही व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी, जो सूर्यास्त के समय तक आस्था के सैलाब में बदल गई। छठ व्रती महिलाएं और पुरुष नदी, तालाबों और पोखरों में खड़े होकर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किए। इस दौरान “छठी मैया की जय” और “सूर्य देव की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। हर तरफ भक्ति और श्रद्धा का गहरा भाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। घाटों को सुंदर ढंग से सजाया गया था, और व्रती व श्रद्धालु पीले तथा लाल वस्त्रों में नजर आए। छठ के लिए सजाए गए ‘डाला’ में नारियल, केला, केतारी (गन्ना), ठकुआ सहित विभिन्न प्रकार के पकवान और फल चढ़ाए गए थे। पूर्णिया शहर के पक्की तालाब, कला भवन छठ घाट, सौरा नदी घाट और गुलाबबाग जैसे प्रमुख स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इन घाटों पर चैती छठ का भव्य दृश्य देखने को मिला। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे, साथ ही असामाजिक तत्वों पर भी पुलिस की पैनी नजर थी। पूर्णिया के लाइन बाजार निवासी श्रद्धालु शंकर साहनी ने बताया कि चैती छठ उनके लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वे चार दिनों तक पूरे नियम और निष्ठा के साथ यह व्रत रखते हैं, जिससे परिवार में खुशहाली, संतान की लंबी उम्र और समृद्धि बनी रहती है। शंकर साहनी ने आगे कहा कि वे छठ मैया से कामना करते हैं कि सभी लोग खुशहाल रहें और आंधी-तूफान से जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन पर छठी मैया अपनी कृपा बनाए रखें। पूर्णिया में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ रविवार, 22 मार्च को ‘नहाए-खाए’ के साथ शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में सूर्य उपासना और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न छठ घाटों पर दोपहर से ही व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी, जो सूर्यास्त के समय तक आस्था के सैलाब में बदल गई। छठ व्रती महिलाएं और पुरुष नदी, तालाबों और पोखरों में खड़े होकर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किए। इस दौरान “छठी मैया की जय” और “सूर्य देव की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। हर तरफ भक्ति और श्रद्धा का गहरा भाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। घाटों को सुंदर ढंग से सजाया गया था, और व्रती व श्रद्धालु पीले तथा लाल वस्त्रों में नजर आए। छठ के लिए सजाए गए ‘डाला’ में नारियल, केला, केतारी (गन्ना), ठकुआ सहित विभिन्न प्रकार के पकवान और फल चढ़ाए गए थे। पूर्णिया शहर के पक्की तालाब, कला भवन छठ घाट, सौरा नदी घाट और गुलाबबाग जैसे प्रमुख स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इन घाटों पर चैती छठ का भव्य दृश्य देखने को मिला। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे, साथ ही असामाजिक तत्वों पर भी पुलिस की पैनी नजर थी। पूर्णिया के लाइन बाजार निवासी श्रद्धालु शंकर साहनी ने बताया कि चैती छठ उनके लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वे चार दिनों तक पूरे नियम और निष्ठा के साथ यह व्रत रखते हैं, जिससे परिवार में खुशहाली, संतान की लंबी उम्र और समृद्धि बनी रहती है। शंकर साहनी ने आगे कहा कि वे छठ मैया से कामना करते हैं कि सभी लोग खुशहाल रहें और आंधी-तूफान से जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन पर छठी मैया अपनी कृपा बनाए रखें।  

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