Venezuela संकट के बीच तेल शेयरों में तेजी, रिलायंस और ओएनजीसी फोकस में

Venezuela संकट के बीच तेल शेयरों में तेजी, रिलायंस और ओएनजीसी फोकस में
सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में तेल और ऊर्जा कंपनियों के लिए सकारात्मक रही, जहां भू-राजनीतिक हलचलों के बीच इन शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। खास तौर पर दक्षिण अमेरिका के प्रमुख तेल उत्पादक देश वेनेजुएला में चल रहे घटनाक्रम का असर घरेलू बाजार की धारणा पर भी पड़ा है।
बता दें कि सोमवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 1,611.20 रुपये के नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों में भी मजबूती दिखी। हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने बढ़त का नेतृत्व करते हुए इंट्रा-डे में 1.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 508.45 रुपये का स्तर छुआ। ओएनजीसी 1.16 प्रतिशत चढ़कर 246.80 रुपये पर कारोबार करती दिखी, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में 1.03 प्रतिशत और ऑयल इंडिया में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
गौरतलब है कि यह तेजी ऐसे समय आई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर सप्लाई सरप्लस को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इसके बावजूद निवेशकों का फोकस वेनेजुएला से जुड़ी अनिश्चितताओं पर रहा, जहां हाल ही में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हटाए जाने की घटना ने तेल उद्योग को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता हस्तांतरण तक वेनेजुएला में नियंत्रण बनाए रखने की बात कही है, जिससे वहां की तेल परिसंपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसका सीधा असर ओएनजीसी पर भी माना जा रहा है, क्योंकि इसकी विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के वेनेजुएला में दो प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, ओएनजीसी को वेनेजुएला में अपने सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र से करीब 50 करोड़ डॉलर के बकाया डिविडेंड की वसूली का मौका मिल सकता है। यह राशि अब तक अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अटकी हुई थी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रतिबंधों में ढील और नियंत्रण व्यवस्था में बदलाव होता है, तो कंपनी को इस निवेश से अतिरिक्त नकदी प्रवाह मिल सकता है।
इसके अलावा, ओएनजीसी की ओरिनोको बेल्ट स्थित कैराबोबो फील्ड में भी हिस्सेदारी है, जहां पूंजीगत खर्च की योजनाएं अब तक रुकी हुई थीं। हालात सुधरने पर इन योजनाओं को फिर से शुरू किया जा सकता है। वहीं ऑयल इंडिया भी निवेशकों की नजर में है, क्योंकि उसकी सहयोगी कंपनियों के जरिए वेनेजुएला की परियोजनाओं में हिस्सेदारी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर भी चर्चा बनी हुई है, क्योंकि बीते वर्षों में कंपनी ने वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदा था, हालांकि अमेरिकी टैरिफ नीति के चलते इन आयातों पर आगे विराम लग सकता है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन भी अपनी विदेशी निवेश इकाइयों के कारण फोकस में रही।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड मामूली बढ़त के साथ करीब 60.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। ओपेक प्लस की ओर से उत्पादन में बदलाव न करने के फैसले और वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप, दोनों कारकों के बीच बाजार फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश में नजर आ रहा है और निवेशक आगे के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *