Refinery Attacks: मिडिल ईस्ट (Middle East Conflict) में रिफाइनरियों पर हमले से (Refinery Attacks) ये हालात बेहद तनावपूर्ण व चिंताजनक हो गए हैं। इंटरनेशल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई करने वाले सबसे बड़े केंद्र अब सीधे निशाने पर हैं। सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों पर हुए हमलों से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। इसके साथ ही, दक्षिणी लेबनान में लगातार हो रही बमबारी (Lebanon Airstrikes) ने एक बड़े मानवीय संकट को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ एक क्षेत्र का युद्ध नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर किया गया सीधा प्रहार है।
सऊदी और कतर के ऊर्जा संयंत्रों पर भयंकर अटैक (Ras Tanura)
दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में मानरी जाने वाली सऊदी अरामको की ‘रास तनूरा’ रिफाइनरी पर ड्रोन्स से बड़ा हमला हुआ है। इसके स्टोरेज टैंकों में भीषण आग लग गई है, जिसके चलते तेल का उत्पादन और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहीं, कतर के ‘रास लफ्फान’ (Ras Laffan) इंडस्ट्रियल इलाके पर भी मिसाइलें दागी गई हैं। कतर दुनिया को सबसे ज्यादा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) देता है। इस हमले के बाद कतर ने गैस का उत्पादन पूरी तरह रोक दिया है।
यूएई में दहशत: एडनोक की रूवैस रिफाइनरी बंद (Ruwais Refinery)
इस युद्ध की आंच अब यूएई तक भी पहुंच गई है। सुरक्षा कारणों और संभावित हवाई हमलों के खतरे को देखते हुए अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने अपनी सबसे बड़ी ‘रूवैस रिफाइनरी’ (Ruwais Refinery) को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है। रूवैस रिफाइनरी मध्य पूर्व के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक है। इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत और ज्यादा बढ़ गई है।
दक्षिणी लेबनान में लाशों का ढेर और तबाही (Lebanon Airstrikes)
एक तरफ तेल के कुएं जल रहे हैं, तो दूसरी तरफ लेबनान में बारूदी बारिश हो रही है। दक्षिणी लेबनान पूरी तरह से युद्ध के मैदान में बदल गया है। यहां लगातार हो रही एयरस्ट्राइक और धमाकों में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं और लाखों लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं।
अगर यह युद्ध नहीं रुका, तो दुनिया दशकों पीछे चली जाएगी: यूएन (UN)
इस खौफनाक मंजर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध नहीं रुका, तो दुनिया दशकों पीछे चली जाएगी। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। वहीं, शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में निवेशक दहशत में हैं, जिससे कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं।
ओपेक देशों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई (OPEC)
हमलों के तुरंत बाद ओपेक (OPEC) देशों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। सऊदी अरब और यूएई अपने डिफेंस सिस्टम को और मजबूत कर रहे हैं। लाल सागर (Red Sea) से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों का रूट बदल दिया गया है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या ईरान या अन्य क्षेत्रीय ताकतें इस युद्ध में सीधे तौर पर उतरेंगी।


