इंदौर में बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल, एक्जीक्युटिव इंजीनियर (पीडब्ल्यूडी), डीएसपी ट्रैफिक और बीआरटीएस को तोड़ने वाला ठेकेदार उपस्थित थे। सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने एलिवेटेड ब्रिज, रैलिंग आदि को लेकर तर्क दिए जिस पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी इस मामले में ईमानदारी और ठोस योजना के तहत काम पूरा क्यों नहीं कर रहे हैं। अधिकारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, परेशानी जनता को हो रही है। ऐसी बहानेबाजी नहीं चलेगी। अगर ठेकेदार समयावधि में काम नहीं करता है तो निगम पर भी पेनल्टी लगाएं। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। सुनवाई में याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बगाडिया और एडवोकेट शिरीन सिलावट ने पक्ष रखा। अधिकारियों द्वारा बीआरटीएस के स्थान पर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के तर्क पर कोर्ट ने कहा कि कि प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर से शहर में परेशानियां और बढ़ सकती हैं। वर्तमान बीआरटीएस पहले से ही यातायात अव्यवस्था और आम जनता के लिए गंभीर असुविधा का कारण बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि एलआईजी से नवलखा तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण तक बीआरटीएस की एक तरफ की रेलिंग (11 किमी में से 6 किमी) को बैरिकेड के रूप में बनाए रखना जरूरी है। इस पर एडवोकेट अजय बागडिया ने विरोध करते हुए कहा कि बीआरटीएस हटाने का निर्णय सरकार का था। फिर भी मामला एक वर्ष से अधिक समय से लंबित है।अब एलिवेटेड कॉरिडोर का बहाना बनाकर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों, रेलिंग और बस-स्टॉप शीघ्र हटाने के पालन का उल्लंघन किया जा रहा है। 2019 में मंजूर एलिवेटेड कॉरिडोर अब तक लंबित है, जबकि इसका शिलान्यास जनवरी 2024 में हुआ था। बीआरटीएस हटाने का निर्णय स्वयं सरकार का था, फिर भी समयबद्ध और ठोस योजना सामने नहीं रखी गई। परेशानियों को अब और बढ़ने नहीं दिया जाएगा
मामले में कोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका है और अधिकारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालकर देरी नहीं कर सकते। जनता को होने वाली परेशानियों को अब और बढ़ने नहीं दिया जाएगा। सुनवाई में ठेकेदार ने नुकसान का हवाला देकर बीआरटीएस रैलिंग और बस-स्टॉप हटाने का काम आगे न करने की बात कही। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सार्वजनिक जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। कोर्ट ने निगम कमिश्नर को निर्देश दिए कि वे ठेकेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई करें। कोर्ट ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में काम पूरा न होने पेनल कास्ट लगाएं। एडवोकेट बागडिया ने तर्क दिया कि देश के अन्य शहरों में पहले एलिवेटेड कॉरिडोर पूरा किए बिना बीआरटीएस हटाने की शर्त नहीं रखी गई। उन्होंने इंदौर को प्रशासनिक प्रयोग बनाए जाने की आलोचना की। साथ ही भागीरथपुरा, जल-प्रदूषण और भारी वाहनों के प्रतिबंध जैसे उदाहरण देते हुए निर्माण गुणवत्ता और सार्वजनिक धन के कुप्रबंधन पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कलेक्टर, निगम कमिश्नर, अधिवक्ताओं की समिति की संयुक्त बैठक कर ठोस योजना बनाने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। ये खबर भी पढ़ें… BRTS पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त-15दिन में 1 लेन तोड़ने के निर्देश शहर में बिगड़ते ट्रैफिक को लेकर लगी जनहित याचिका के मामले में सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें बीआरटीएस तोड़ने में हो रही देरी पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 15 दिन में बीआरटीएस की एक तरफ की लाइन का हिस्सा तोड़कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।पूरी खबर पढ़ें


