अधिकारी अब परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की शिकायतों को अधिक समय तक पेडिंग नहीं रख सकेंगे। सरकार ने पेंडेंसी खत्म करने के लिए कॉर्डिनेटर सतीश खोला को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी हैं। जिसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमत्री को होगी। इसके लिए मुख्यमंत्री के चीफ सेक्रेटरी अरूण गुप्ता ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को आदेश जारी किया है। जिसमें पेडिंग शिकायतों का निर्धारित समय सीमा में समाधान करने के लिए एडीसी और सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश देने के लिए कहा गया है। सभी की जिम्मेदारी होगी फिक्स नई व्यवस्था में सरकार ने शिकायतकर्ता से चंडीगढ़ सचिवालय में बैठे सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी फिक्स की है। अब अधिकारियों को न केवल पेंडिंग शिकायतों का समय पर समाधान करना होगा, बल्कि स्टेट कॉर्डिनेटर के साथ तालमेल भी बनाकर रखना होगा। जिसकी समय-समय पर कॉर्डिनेटर सतीश खोला द्वारा भेजी जानी वाली रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा भी की जाएगी। अब यदि कोई शिकायतकर्ता आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करवाता है तो उससे भी जवाब तलबी की जाएगी। जन्म तिथि की पेंडिंग शिकायतें अधिक परिवार पहचान पत्र की शिकायतों के समाधान के लिए फिलहाल सात दिन का समय निर्धारित है। जवाबदेही तय नहीं होने के कारण समय पर शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता था। सबसे अधिक पेडेंसी जन्म तिथि की शिकायतों में है। जिनमें मुख्यमंत्री का जिला कुरुक्षेत्र भी प्रदेश के टॉप पांच जिलो में शुमार है। इसके अलावा वाहनों, शिक्षा की शिकायतों में भी पेडिंग देखी जा सकती है। सूत्रों की माने तो प्रदेश में जन्मतिथि की 42 हजार, व्हीकल की 6 हजार, शिक्षा की तीन हजार, शादी की 900 और विभिन्न मटरियल की 7 हजार से अधिक शिकायतें पेडिंग हैं। हिसार, करनाल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, नूंह और भिवानी में शिकायतों की पेडिंग सबसे अधिक है। यह भी पेंडेंसी का बड़ा कारण अभी तक एक व्यक्ति अपनी शिकायत अलग अलग जगह दर्ज करवा देता था। मॉनटरिंग की नई व्यवस्था से मल्टीपल शिकायतों के कारण होने वाली पेडेंसी कम होगी। नई व्यवस्था में क्रिड विभाग, एडीसी कार्यालय (नोडल अधिकारी), तकनीकी विभाग का आपसी तालमेल मजबूत होगा। अब तक जिला स्तर व चंडीगढ़ में बैठे क्रिड अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल के अभाव में शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था में हर स्तर पर मॉनटरिंग की व्यवस्था की गई है। सतीश खोला ने की पत्र की पुष्टि PPP के स्टेट कॉडिनेटर सतीश खोला ने कहा कि मुख्यमंत्री के चीफ सेक्रेटरी ने 5 मार्च को सभी जिला उपायुक्तों को आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का प्रयास है कि परिवार पहचान पत्र को लेकर आने वाली शिकायतों का निर्धारित समय में समाधान हो। इसके लिए अब हर स्तर पर मॉनटरिंग सिस्टम को मजबूत बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने नई व्यवस्था में अधिकारियों के साथ शिकायतकर्ता की भी जवाबदेही तय की है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से शिकायतों की पेंडेंसी में कमी आएगी।


